31 मई 2026 : ठाणे शहर की यातायात समस्या को कम करने के उद्देश्य से प्रस्तावित 12,200 करोड़ रुपये की रिंग मेट्रो परियोजना अब विवादों में घिर गई है। शहर में 29 किलोमीटर लंबी इस मेट्रो परियोजना को केंद्र और राज्य सरकार की मंजूरी मिल चुकी है, लेकिन शहरी नियोजन विशेषज्ञों, पर्यावरणविदों और स्थानीय नागरिकों ने इसके खिलाफ मोर्चा खोल दिया है।
‘सिटिज़न्स फॉर सस्टेनेबल ट्रांसपोर्ट’ संस्था ने मुख्यमंत्री से परियोजना के कार्यों पर तत्काल रोक लगाने की मांग की है। संस्था का आरोप है कि विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) में कई मूलभूत खामियां हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि परियोजना में यात्रियों की संख्या के अवास्तविक अनुमान लगाए गए हैं, जबकि यह मार्ग पहले से प्रस्तावित मेट्रो-4 और मेट्रो-5 की कुछ स्टेशनों के समानांतर भी चलता है, जिससे सार्वजनिक धन की बर्बादी हो सकती है।
नगर नियोजन विशेषज्ञ सुलक्षणा महाजन ने कहा कि एमएमआरडीए और महामेट्रो के बीच समन्वय की कमी के कारण कनेक्टिविटी संबंधी समस्याएं पैदा हो सकती हैं। वहीं पर्यावरण कानून विशेषज्ञ हेमा रमणी का मानना है कि मेट्रो पर भारी खर्च करने के बजाय बस सेवा विस्तार, साइकिल ट्रैक, पैदल मार्ग और पार्किंग प्रबंधन जैसे विकल्पों पर ध्यान देना चाहिए।
विशेषज्ञों ने यह भी दावा किया है कि ऊंचे एलिवेटेड और भूमिगत हिस्सों के कारण यह मेट्रो “रोलर कोस्टर राइड” जैसी बन सकती है, जहां यात्रियों को तीव्र चढ़ाव और उतार का सामना करना पड़ सकता है। संकरी सड़कों और घनी आबादी वाले इलाकों से गुजरने के कारण निर्माण कार्य भी चुनौतीपूर्ण माना जा रहा है।
इसके अलावा, ठाणे रेलवे स्टेशन क्षेत्र में तीन किलोमीटर लंबी भूमिगत सुरंग के लिए बड़े पैमाने पर खुदाई करनी होगी। इससे यातायात, बस स्टैंड, रेलवे सुविधाओं और पैदल यात्रियों को भारी असुविधा होने की आशंका जताई गई है। मानसून के दौरान जलभराव और बाढ़ जैसी स्थिति का खतरा भी बताया गया है।
पर्यावरणविदों ने परियोजना के पर्यावरणीय प्रभाव पर भी चिंता जताई है। जहां डीपीआर में केवल 662 पेड़ों पर असर पड़ने का दावा किया गया है, वहीं विशेषज्ञों का कहना है कि वास्तव में 3,224 से अधिक पेड़ प्रभावित हो सकते हैं। उनका सुझाव है कि पेड़ों की कटाई के बजाय वैज्ञानिक छंटाई और संरक्षण के विकल्पों पर विचार किया जाना चाहिए।
