19 सितंबर, 2026 : चंडीगढ़ की समाजसेवी निती सरिन को स्वैच्छिक रक्तदान के क्षेत्र में लंबे समय से किए जा रहे कार्यों के लिए कोच्चि में Lifetime Achievement Award से सम्मानित किया गया। यह सम्मान उन्हें इंडियन सोसाइटी ऑफ ब्लड ट्रांसफ्यूजन एंड इम्यूनोहेमेटोलॉजी (ISBTI) की ओर से दिया गया।
निती सरिन को यह सम्मान ISBTI की 51वीं राष्ट्रीय कॉन्फ्रेंस TRANSCON-2026 के दौरान प्रदान किया गया, जिसका आयोजन कोच्चि में किया जा रहा है। यह पुरस्कार उनके स्वैच्छिक रक्तदान के क्षेत्र में योगदान, समर्पण और निरंतर सामाजिक सेवा को देखते हुए दिया गया।
स्वैच्छिक रक्तदान के लिए लंबे समय से कर रहीं काम
निती सरिन चंडीगढ़ में सामाजिक कार्यों से जुड़ी हुई हैं और करीब चार दशकों से ब्लड बैंक सोसाइटी (BBS), चंडीगढ़ से जुड़ी हैं। वह पिछले करीब 20 वर्षों से संस्था की सचिव के रूप में भी जिम्मेदारी निभा रही हैं।
रक्तदान को लेकर जागरूकता फैलाने और लोगों को स्वैच्छिक रक्तदान के लिए प्रेरित करने में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही है। रिपोर्ट के अनुसार, निती सरिन खुद 58 बार रक्तदान कर चुकी हैं।
परिवार से मिली समाजसेवा की प्रेरणा
निती सरिन को समाजसेवा की प्रेरणा उनके परिवार से भी मिली। उनकी मां स्वर्गीय पद्मश्री कांता सरूप कृष्ण ने वर्ष 1964 में ब्लड बैंक सोसाइटी की स्थापना की थी।
इसके बाद निती सरिन ने भी स्वैच्छिक रक्तदान के क्षेत्र में अपनी सक्रिय भूमिका जारी रखी और संस्था के साथ लंबे समय तक काम किया। उनके कार्यों को चंडीगढ़ प्रशासन की ओर से भी पहले सम्मानित किया जा चुका है।
चंडीगढ़ प्रशासन भी कर चुका है सम्मानित
स्वैच्छिक सामाजिक कार्यों में योगदान के लिए निती सरिन को चंडीगढ़ प्रशासन की ओर से गणतंत्र दिवस के अवसर पर वर्ष 2000 और 2014 में सम्मानित किया गया था।
इसके अलावा, वह लंबे समय से रक्तदान को बढ़ावा देने और लोगों में इसके प्रति जागरूकता पैदा करने के लिए काम कर रही हैं।
सम्मान को स्वयंसेवकों को किया समर्पित
कोच्चि में Lifetime Achievement Award प्राप्त करने के बाद निती सरिन ने इस सम्मान को अकेले अपने नाम नहीं रखा। उन्होंने इसे ब्लड बैंक सोसाइटी, चंडीगढ़ से जुड़े सभी स्वयंसेवकों को समर्पित किया।
उन्होंने कहा कि इन स्वयंसेवकों ने पिछले करीब 60 वर्षों से स्वैच्छिक रक्तदान को बढ़ावा देने के लिए लगातार काम किया है। उनके अनुसार, रक्तदान को लेकर लोगों में जागरूकता पैदा करने में स्वयंसेवी कार्यकर्ताओं की भूमिका महत्वपूर्ण रही है।
रक्त की खरीद-बिक्री पर रोक से भी जुड़ा अभियान
रिपोर्ट के अनुसार, ब्लड बैंक सोसाइटी से जुड़े स्वयंसेवकों ने रक्त की खरीद-बिक्री पर रोक लगाने से संबंधित जनहित याचिका दायर करने में भी भूमिका निभाई थी। यह मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा और इसके बाद देश में रक्त की खरीद-बिक्री पर रोक लगाने का रास्ता साफ हुआ।
स्वैच्छिक रक्तदान को बढ़ावा देने वाले संगठनों का उद्देश्य जरूरतमंद मरीजों के लिए सुरक्षित और पर्याप्त रक्त उपलब्ध कराने के साथ लोगों को नियमित रूप से रक्तदान के लिए प्रेरित करना रहा है।
सामाजिक सेवा के क्षेत्र में पहचान
निती सरिन को मिला यह Lifetime Achievement Award उनके लंबे सामाजिक योगदान को राष्ट्रीय स्तर पर मिली पहचान के रूप में देखा जा रहा है। करीब 40 वर्षों तक ब्लड बैंक सोसाइटी से जुड़े रहकर उन्होंने स्वैच्छिक रक्तदान के क्षेत्र में काम किया है।
कोच्चि में आयोजित राष्ट्रीय सम्मेलन के दौरान उन्हें यह सम्मान दिए जाने से चंडीगढ़ के सामाजिक क्षेत्र में भी खुशी का माहौल है। उनका कार्य रक्तदान के प्रति लोगों को जागरूक करने और जरूरतमंदों की मदद के लिए स्वयंसेवी भागीदारी को बढ़ावा देने से जुड़ा रहा है।
