28 अक्तूबर 2026: चंडीगढ़ हाउसिंग बोर्ड (CHB) की संपत्तियों की ई-नीलामी में खरीदारों की रुचि कम देखने को मिली। ऊंची आरक्षित कीमतों और लीजहोल्ड से जुड़ी शर्तों को इसकी प्रमुख वजह बताया जा रहा है। नीलामी में शामिल 79 व्यावसायिक संपत्तियों के लिए कोई बोली नहीं मिली, जबकि 12 आवासीय संपत्तियों में से केवल दो ही बिक सकीं। इन दोनों आवासीय संपत्तियों की कुल बिक्री कीमत 3.74 करोड़ रुपये रही।
79 व्यावसायिक संपत्तियों के लिए नहीं मिली बोली
चंडीगढ़ हाउसिंग बोर्ड ने नीलामी में 79 व्यावसायिक संपत्तियां रखी थीं। इनमें मनीमाजरा के बूथ, सेक्टर-40ए के सर्विस बूथ, सेक्टर-61 के कजहेड़ी क्षेत्र की दुकानें और मनीमाजरा में रेस्टोरेंट के लिए निर्धारित एक साइट शामिल थी।
नीलामी में इनमें से किसी भी व्यावसायिक संपत्ति के लिए बोली नहीं आई। इससे बोर्ड के सामने अपनी संपत्तियों को बाजार में आकर्षक बनाने और संभावित खरीदारों की रुचि बढ़ाने की चुनौती सामने आई है।
लीजहोल्ड व्यवस्था से खरीदारों को परेशानी
प्रॉपर्टी क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञों के अनुसार, लीजहोल्ड संपत्तियों की शर्तें खरीदारों के फैसले को प्रभावित कर सकती हैं। ऐसी संपत्तियों में खरीद मूल्य के अलावा ग्राउंड रेंट और जीएसटी जैसे खर्च भी जुड़ सकते हैं।
लीजहोल्ड व्यवस्था में संपत्ति के अधिकार फ्रीहोल्ड संपत्ति से अलग होते हैं। कुछ मामलों में ऋण लेने, संपत्ति को गिरवी रखने या हस्तांतरण से जुड़ी शर्तें भी खरीदारों के लिए चुनौती बन सकती हैं। इसी कारण निवेशक संपत्ति खरीदने से पहले उससे जुड़े खर्चों और कानूनी शर्तों का आकलन करते हैं।
आवासीय संपत्तियों में भी सीमित बिक्री
नीलामी में 12 आवासीय संपत्तियां भी शामिल थीं। इनमें से केवल दो संपत्तियों की बिक्री हो सकी। एक संपत्ति 1.82 करोड़ रुपये और दूसरी 1.92 करोड़ रुपये में बिकी। इस तरह बोर्ड को दोनों संपत्तियों से कुल 3.74 करोड़ रुपये मिले।
बाकी 10 आवासीय संपत्तियों के लिए खरीदार नहीं मिले। इससे यह सवाल भी उठा कि क्या संपत्तियों की आरक्षित कीमतें संभावित खरीदारों की अपेक्षाओं के अनुरूप हैं।
आरक्षित कीमतों की समीक्षा की मांग
व्यापार और रियल एस्टेट क्षेत्र से जुड़े प्रतिनिधियों ने बोर्ड की मूल्य निर्धारण नीति की समीक्षा करने की जरूरत बताई है। उनका मानना है कि यदि संपत्तियों की कीमतें बाजार की परिस्थितियों के अनुरूप हों और लीजहोल्ड से जुड़ी शर्तों को सरल बनाया जाए, तो खरीदारों की रुचि बढ़ सकती है।
लीजहोल्ड संपत्तियों को फ्रीहोल्ड में बदलने की मांग भी उठाई गई है। हालांकि, इस संबंध में बोर्ड की ओर से किसी नई नीति या बदलाव की आधिकारिक घोषणा की जानकारी उपलब्ध नहीं है।
आगे क्या कदम उठाएगा हाउसिंग बोर्ड?
नीलामी में व्यावसायिक संपत्तियों के लिए बोली नहीं मिलने और आवासीय संपत्तियों की सीमित बिक्री के बाद अब चंडीगढ़ हाउसिंग बोर्ड की अगली कार्रवाई पर नजर रहेगी। कीमतों, भुगतान की शर्तों और संपत्ति के स्वामित्व से जुड़े नियमों की समीक्षा से भविष्य की नीलामी में खरीदारों की भागीदारी प्रभावित हो सकती है।
