19 अक्तूबर 2026: चंडीगढ़ के सहायता प्राप्त कॉलेजों में कार्यरत शिक्षकों ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से अपनी लंबे समय से लंबित मांगों और सेवा संबंधी समस्याओं का समाधान कराने की अपील की है। शिक्षकों का कहना है कि कई बार प्रतिनिधित्व देने और बैठकों के बावजूद उनकी समस्याओं का समाधान नहीं हुआ है। इन मांगों में करियर एडवांसमेंट स्कीम (CAS) के तहत पदोन्नति, पुराने सेवा लाभ, वेतन संबंधी मुद्दे और खाली पदों को भरना शामिल है।
चंडीगढ़ एडेड कॉलेज टीचर्स एसोसिएशन (CACTA) लंबे समय से इन मांगों को उठा रही है। एसोसिएशन के नेतृत्व में 13 अक्टूबर को डीएवी कॉलेज, सेक्टर-10 में विरोध प्रदर्शन भी किया गया। इसमें 250 से अधिक शिक्षक और विभिन्न छात्र संगठनों के 100 से ज्यादा प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। प्रदर्शन के माध्यम से शिक्षकों ने प्रशासन से लंबित मामलों पर समयबद्ध फैसला लेने की मांग की।
शिक्षकों की प्रमुख मांगों में करियर एडवांसमेंट स्कीम के तहत लंबित पदोन्नतियों का समाधान शामिल है। उनका कहना है कि पात्र शिक्षकों को लागू नियमों के अनुसार पदोन्नति और पुराने सेवा लाभ मिलने चाहिए। लंबे समय से फैसले लंबित रहने के कारण शिक्षकों के पेशेवर विकास और सेवा शर्तों पर असर पड़ रहा है।
एसोसिएशन ने 1 अप्रैल 2022 से पहले नियुक्त कर्मचारियों के मूल वेतन से जुड़े मुद्दे को भी उठाया है। इसके अलावा, शिक्षकों ने मकान किराया भत्ता (HRA) मौजूदा 16 प्रतिशत से बढ़ाकर 20 प्रतिशत करने की मांग की है। उनका कहना है कि वेतन और भत्तों से जुड़े मामलों में स्पष्ट नीति और समय पर निर्णय जरूरी हैं।
शिक्षकों ने कॉलेजों में खाली पड़े शिक्षण और गैर-शिक्षण पदों को भरने की मांग भी की है। इसके साथ ही प्रिंसिपल के रिक्त पदों पर नियुक्तियां करने की जरूरत पर जोर दिया गया है। एसोसिएशन के अनुसार, कर्मचारियों की कमी का असर कॉलेजों के प्रशासनिक कामकाज और शैक्षणिक गतिविधियों पर पड़ सकता है।
CACTA के अध्यक्ष गुरचरण सिंह गिल ने कहा कि एसोसिएशन कई बार संबंधित अधिकारियों के समक्ष अपनी मांगें रख चुकी है, लेकिन अब तक समस्याओं का समाधान नहीं हुआ है। एसोसिएशन के उपाध्यक्ष सुमित गोकलानी ने भी कहा कि शिक्षकों को बार-बार आश्वासन देने के बजाय निर्धारित समयसीमा के भीतर निर्णय दिए जाने चाहिए।
शिक्षकों का कहना है कि उनकी मांगें केवल वेतन वृद्धि तक सीमित नहीं हैं, बल्कि पदोन्नति, सेवा लाभ और बेहतर कार्य परिस्थितियों से भी जुड़ी हैं। उनका मानना है कि स्पष्ट सेवा नियम लागू होने से कर्मचारियों को अपने अधिकारों और भविष्य की योजनाओं को लेकर निश्चितता मिलेगी।
अमित शाह से अपील के पीछे भी यही उम्मीद है कि केंद्र सरकार और चंडीगढ़ प्रशासन के स्तर पर लंबित मुद्दों की समीक्षा हो और उनके समाधान के लिए ठोस कदम उठाए जाएं। सहायता प्राप्त कॉलेजों में शिक्षकों की सेवा शर्तों और विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) के नियमों को लागू करने से संबंधित विवाद पहले भी सामने आते रहे हैं।
एसोसिएशन ने चेतावनी दी है कि यदि मांगों पर कार्रवाई नहीं की गई तो आंदोलन को और तेज किया जा सकता है। ऐसे में प्रशासन के सामने शिक्षकों की शिकायतों पर विचार करने और कॉलेजों में शैक्षणिक गतिविधियों को सुचारु बनाए रखने की चुनौती है।
फिलहाल, शिक्षकों की मुख्य मांग है कि लंबित सेवा मामलों पर स्पष्ट निर्णय लिया जाए, खाली पदों को भरा जाए और वेतन तथा भत्तों से संबंधित समस्याओं का समाधान किया जाए। अब यह देखना होगा कि संबंधित अधिकारी इन मांगों पर कब तक कार्रवाई करते हैं।
