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चंडीगढ़ में तीन दिनों तक होगी पटाखों की बिक्री, प्रशासन ने 96 स्टॉल को दी मंजूरी; तय स्थानों पर ही मिलेंगे पटाखे

6 नवंबर 2026 :   दिवाली के त्योहार को देखते हुए चंडीगढ़ प्रशासन ने पटाखों की बिक्री को लेकर तैयारियां शुरू कर दी हैं। शहर में पटाखों की बिक्री के लिए कुल 96 स्टॉल आवंटित किए गए हैं। इन स्टॉलों के माध्यम से तीन दिनों तक पटाखों की बिक्री की जाएगी। प्रशासन की ओर से यह व्यवस्था त्योहार के दौरान बाजारों में भीड़ को नियंत्रित करने, सुरक्षा सुनिश्चित करने और पटाखों की बिक्री को व्यवस्थित तरीके से संचालित करने के उद्देश्य से की गई है।

प्रशासन द्वारा निर्धारित व्यवस्था के अनुसार, पटाखों की बिक्री केवल अधिकृत स्टॉलों पर ही की जा सकेगी। इसके लिए शहर में अलग-अलग स्थानों को चिन्हित किया गया है, जहां लाइसेंस प्राप्त विक्रेता पटाखे बेच सकेंगे। 96 स्टॉल आवंटित किए जाने से पटाखा कारोबार से जुड़े विक्रेताओं को भी राहत मिलेगी। वहीं, लोगों को भी निर्धारित स्थानों पर जाकर पटाखे खरीदने की सुविधा मिलेगी।

दिवाली के दौरान हर साल पटाखों की खरीदारी के लिए बाजारों में बड़ी संख्या में लोग पहुंचते हैं। ऐसे में अनधिकृत दुकानों और अस्थायी बिक्री केंद्रों के कारण कई बार भीड़, यातायात और सुरक्षा से जुड़ी समस्याएं पैदा हो जाती हैं। इन्हीं परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए प्रशासन ने इस बार पटाखों की बिक्री के लिए विशेष व्यवस्था तैयार की है। तीन दिनों की निर्धारित अवधि में ही विक्रेताओं को पटाखे बेचने की अनुमति होगी।

पटाखों की बिक्री के लिए स्टॉल आवंटित करने का उद्देश्य यह भी है कि शहर में जगह-जगह अवैध रूप से पटाखों की दुकानें न लगें। निर्धारित स्थानों पर बिक्री होने से प्रशासन के लिए निगरानी रखना आसान होगा। इसके अलावा, बाजारों में अनावश्यक भीड़ और लोगों की आवाजाही को नियंत्रित करने में भी मदद मिल सकती है।

प्रशासन की ओर से पटाखा विक्रेताओं को नियमों का पालन करने के निर्देश दिए जाने की उम्मीद है। लाइसेंस के बिना पटाखों की बिक्री करना नियमों के खिलाफ हो सकता है। इसलिए विक्रेताओं को निर्धारित शर्तों और सुरक्षा मानकों का ध्यान रखना होगा। स्टॉल लगाने के दौरान भी सुरक्षा से संबंधित नियमों का पालन करना जरूरी होगा, ताकि किसी भी तरह की अप्रिय घटना से बचा जा सके।

पटाखों की बिक्री के दौरान आग लगने की आशंका को देखते हुए अग्निशमन विभाग की भूमिका भी महत्वपूर्ण रहेगी। पटाखों के स्टॉल पर आग बुझाने के उपकरणों की उपलब्धता और अन्य जरूरी सुरक्षा इंतजामों पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता होगी। इसके साथ ही स्टॉलों के आसपास ऐसी व्यवस्था होनी चाहिए, जिससे आपातकालीन स्थिति में लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला जा सके।

दिवाली के समय पटाखों की मांग में बढ़ोतरी देखने को मिलती है। ऐसे में तीन दिनों के लिए निर्धारित बिक्री अवधि के दौरान अधिक संख्या में ग्राहक स्टॉलों पर पहुंच सकते हैं। लोगों को सलाह दी जाती है कि वे केवल अधिकृत विक्रेताओं से ही पटाखे खरीदें और खरीदारी करते समय उत्पादों पर दिए गए सुरक्षा निर्देशों को जरूर पढ़ें।

पटाखों के इस्तेमाल को लेकर पर्यावरण और स्वास्थ्य से जुड़े मुद्दे भी लगातार चर्चा में रहते हैं। पटाखों से निकलने वाला धुआं वायु प्रदूषण बढ़ा सकता है। इससे बच्चों, बुजुर्गों और सांस संबंधी परेशानियों से जूझ रहे लोगों को अधिक परेशानी हो सकती है। इसके अलावा, पटाखों से निकलने वाला तेज शोर भी आसपास रहने वाले लोगों और पशु-पक्षियों के लिए परेशानी का कारण बन सकता है।

ऐसे में लोगों को पटाखे चलाते समय सावधानी बरतनी चाहिए। प्रशासन और संबंधित विभागों द्वारा निर्धारित समय और नियमों का पालन करना जरूरी है। पटाखे जलाते समय खुले स्थान का चयन करना चाहिए और ज्वलनशील वस्तुओं से दूरी बनाए रखनी चाहिए। बच्चों को पटाखे अकेले नहीं जलाने देने चाहिए और उनके साथ किसी बड़े व्यक्ति का मौजूद रहना आवश्यक है।

चंडीगढ़ प्रशासन द्वारा 96 स्टॉल आवंटित किए जाने से दिवाली के दौरान पटाखों की बिक्री के लिए एक व्यवस्थित व्यवस्था तैयार की गई है। अब तीन दिनों तक निर्धारित स्थानों पर पटाखों की बिक्री होगी। इस व्यवस्था से विक्रेताओं और ग्राहकों दोनों को सुविधा मिलने की उम्मीद है। साथ ही प्रशासन के सामने यह सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी होगी कि बिक्री के दौरान सभी नियमों और सुरक्षा मानकों का पालन हो।

हालांकि, स्टॉलों की संख्या और बिक्री की अवधि के अलावा निर्धारित स्थानों की पूरी जानकारी, बिक्री के सटीक समय और अन्य शर्तों की पुष्टि संबंधित प्रशासनिक आदेशों से की जानी चाहिए। लोगों को पटाखे खरीदने के लिए जाने से पहले प्रशासन द्वारा जारी आधिकारिक दिशा-निर्देशों की जानकारी लेनी चाहिए।

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