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लाहौर में वर्ल्ड पंजाबी कॉन्फ्रेंस में शामिल न हो पाने पर CM भगवंत मान ने जताया अफसोस

24 अक्तूबर 2026:  पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने लाहौर में आयोजित होने वाली वर्ल्ड पंजाबी कॉन्फ्रेंस में शामिल नहीं हो पाने पर अफसोस जताया है। इस सम्मेलन को पंजाबी भाषा, साहित्य और सांस्कृतिक विरासत से जुड़े लोगों के लिए एक महत्वपूर्ण मंच माना जाता है। मान का इसमें शामिल न हो पाना भारत और पाकिस्तान के पंजाब क्षेत्रों के बीच साझा पंजाबी विरासत को लेकर होने वाली चर्चाओं के संदर्भ में अहम है।

पंजाबी भाषा और संस्कृति से जुड़ा सम्मेलन

वर्ल्ड पंजाबी कॉन्फ्रेंस का उद्देश्य पंजाबी भाषा, साहित्य, कला और सांस्कृतिक परंपराओं से जुड़े विषयों पर विचार-विमर्श के लिए मंच उपलब्ध कराना है। पंजाबी भाषा भारत और पाकिस्तान, दोनों देशों के पंजाब क्षेत्रों की सांस्कृतिक पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा है।

ऐसे आयोजनों में लेखकों, साहित्यकारों, कलाकारों और पंजाबी भाषा से जुड़े लोगों को अपने विचार साझा करने का अवसर मिलता है। सम्मेलन के जरिए पंजाबी विरासत और भाषा के संरक्षण से संबंधित मुद्दों पर भी चर्चा हो सकती है।

भगवंत मान ने जताया अफसोस

मुख्यमंत्री भगवंत मान ने लाहौर में होने वाली वर्ल्ड पंजाबी कॉन्फ्रेंस में शामिल नहीं हो पाने पर निराशा जताई है। हालांकि, उपलब्ध जानकारी में उनके सम्मेलन में न पहुंच पाने का कारण, कार्यक्रम की तारीख और उनकी ओर से जारी विस्तृत बयान का उल्लेख नहीं है।

इसलिए फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि उनकी अनुपस्थिति के पीछे कौन-सी परिस्थितियां रहीं। इस संबंध में अतिरिक्त जानकारी सामने आने पर स्थिति अधिक स्पष्ट हो सकेगी।

साझा पंजाबी विरासत का महत्व

भारत और पाकिस्तान के पंजाब क्षेत्रों की भाषा, लोकगीत, साहित्य, खान-पान और कई सांस्कृतिक परंपराओं में ऐतिहासिक समानताएं हैं। विभाजन के बाद दोनों क्षेत्रों के बीच भौगोलिक और राजनीतिक सीमाएं स्थापित हुईं, लेकिन पंजाबी भाषा और सांस्कृतिक विरासत आज भी दोनों ओर के लोगों के लिए महत्वपूर्ण हैं।

वर्ल्ड पंजाबी कॉन्फ्रेंस जैसे आयोजन इस साझा विरासत पर चर्चा करने और भाषा-साहित्य से जुड़े मुद्दों को सामने लाने का अवसर प्रदान करते हैं।

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