6 मई 2026 : अमृतसर के बराड़ गांव में हर साल की तरह इस बार भी गुरु हरगोबिंद जी की ऐतिहासिक यात्रा की याद में भव्य मेला और लंगर आयोजित किया गया। यह आयोजन स्थानीय लोगों के साथ-साथ दूर-दराज से आने वाले श्रद्धालुओं के लिए आस्था और परंपरा का बड़ा केंद्र बन गया है।
मान्यता है कि गुरु हरगोबिंद जी ने अपने समय में इस गांव में कुछ समय बिताया था। उसी ऐतिहासिक घटना की स्मृति में हर वर्ष यह मेला आयोजित किया जाता है, जो अब एक बड़ी परंपरा का रूप ले चुका है।
मेला स्थल पर सुबह से ही श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ने लगी। लोगों ने गुरुद्वारा साहिब में मत्था टेका और आशीर्वाद लिया। इसके बाद सामूहिक लंगर का आयोजन किया गया, जिसमें सभी लोगों को बिना किसी भेदभाव के भोजन कराया गया।
गुरु हरगोबिंद जी के जीवन और उनके उपदेशों को भी इस अवसर पर याद किया गया। गुरुद्वारा परिसर में कीर्तन और धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन हुआ, जिसमें बड़ी संख्या में संगत ने भाग लिया।
स्थानीय आयोजकों का कहना है कि इस मेले का उद्देश्य केवल धार्मिक आस्था को बढ़ावा देना ही नहीं, बल्कि सामाजिक एकता और भाईचारे का संदेश देना भी है।
पंजाब की सांस्कृतिक और धार्मिक विरासत को दर्शाने वाला यह आयोजन हर साल और भी भव्य होता जा रहा है।
श्रद्धालुओं के लिए विशेष व्यवस्थाएं की गई थीं, जिनमें पानी, चिकित्सा सुविधा और सुरक्षा के इंतजाम शामिल थे।
इस मेले में आसपास के गांवों के लोग भी बड़ी संख्या में शामिल होते हैं, जिससे यह एक सामुदायिक उत्सव का रूप ले लेता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे आयोजन न केवल धार्मिक महत्व रखते हैं, बल्कि स्थानीय संस्कृति और परंपराओं को जीवित रखने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
अमृतसर के बराड़ गांव में आयोजित यह मेला एक बार फिर लोगों को एकजुट करने और आध्यात्मिक ऊर्जा से भरने में सफल रहा।
यह आयोजन यह दर्शाता है कि परंपराएं और आस्था आज भी समाज को जोड़ने का मजबूत माध्यम हैं।
