23 मई 2026 : अजनाला के 82 वर्षीय किसान ने पारंपरिक और आधुनिक कृषि तकनीकों के मेल से एकीकृत कृषि मॉडल को फिर से जीवित कर मिसाल पेश की है। उम्र के इस पड़ाव पर भी उनका खेती के प्रति समर्पण और नवाचार ग्रामीण क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है।
जानकारी के अनुसार, किसान ने फसल उत्पादन, पशुपालन, डेयरी और अन्य कृषि गतिविधियों को एक साथ जोड़कर ऐसा मॉडल विकसित किया है, जिससे खेती अधिक टिकाऊ और लाभकारी बन सके।
विशेषज्ञों के मुताबिक, एकीकृत कृषि मॉडल में खेती की विभिन्न गतिविधियों को आपस में जोड़ा जाता है ताकि संसाधनों का बेहतर उपयोग हो और किसानों की आय के कई स्रोत तैयार हो सकें।
पंजाब लंबे समय से कृषि प्रधान राज्य रहा है, लेकिन बदलती जलवायु, बढ़ती लागत और मिट्टी की गुणवत्ता में गिरावट जैसी चुनौतियों के कारण किसानों को नए विकल्प तलाशने पड़ रहे हैं।
सूत्रों के अनुसार, इस किसान ने रासायनिक निर्भरता कम करने, प्राकृतिक संसाधनों के बेहतर उपयोग और कृषि लागत घटाने पर विशेष ध्यान दिया है।
कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि एकीकृत खेती मॉडल छोटे और मध्यम किसानों के लिए फायदेमंद हो सकता है, क्योंकि इससे जोखिम कम होता है और आय में स्थिरता आती है।
भारत में टिकाऊ खेती और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण को लेकर अब अधिक जोर दिया जा रहा है। सरकार और कृषि संस्थान भी वैकल्पिक खेती मॉडल को बढ़ावा देने की दिशा में काम कर रहे हैं।
ग्रामीण क्षेत्र के लोगों का कहना है कि बुजुर्ग किसान का अनुभव और मेहनत युवा किसानों के लिए प्रेरणा बन रही है।
विशेषज्ञों के अनुसार, कृषि क्षेत्र में अनुभव आधारित ज्ञान और आधुनिक तकनीक का संतुलित उपयोग भविष्य की खेती के लिए महत्वपूर्ण हो सकता है।
फिलहाल, किसान का यह मॉडल आसपास के क्षेत्रों में भी चर्चा का विषय बना हुआ है और कई किसान इसे अपनाने में रुचि दिखा रहे हैं।
यह घटनाक्रम यह दर्शाता है कि उम्र चाहे कोई भी हो, नवाचार और मेहनत के जरिए कृषि क्षेत्र में सकारात्मक बदलाव लाए जा सकते हैं।
