9 अक्टूबर 2026: कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके ने मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR (Special Intensive Revision) को लेकर भारतीय जनता पार्टी (BJP) और चुनाव आयोग पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने दावा किया कि SIR प्रक्रिया के जरिए उन लोगों को मताधिकार से वंचित करने की कोशिश की जा रही है, जो BJP का समर्थन नहीं करते। दीपके ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चुनाव आयोग पर लोकतांत्रिक व्यवस्था को कमजोर करने का आरोप भी लगाया। हालांकि, ये उनके राजनीतिक आरोप हैं; इन्हें स्वतंत्र रूप से सिद्ध तथ्य नहीं माना जाना चाहिए।
बेंगलुरु में SIR के खिलाफ प्रदर्शन
गुरुवार, 8 अक्टूबर को बेंगलुरु के फ्रीडम पार्क में SIR के विरोध में एक प्रदर्शन आयोजित किया गया। इसमें नागरिक संगठनों, कार्यकर्ताओं और युवाओं ने हिस्सा लिया। प्रदर्शन के दौरान मतदाता सूची से कथित तौर पर नाम हटाए जाने के मुद्दे को उठाया गया।
इस कार्यक्रम में CJP संस्थापक अभिजीत दीपके के साथ अभिनेता और सामाजिक कार्यकर्ता प्रकाश राज तथा यूट्यूबर ध्रुव राठी भी शामिल हुए। प्रदर्शनकारियों ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की और मतदाता सूची में कथित अनियमितताओं पर सवाल उठाए।
‘BJP का विरोध करने वालों को निशाना बनाया जा रहा’
अभिजीत दीपके ने आरोप लगाया कि मतदाता सूची से नाम हटाने की प्रक्रिया का इस्तेमाल राजनीतिक विरोधियों को चुनावी अधिकारों से वंचित करने के लिए किया जा रहा है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और चुनाव आयोग के अधिकारियों पर भी सवाल उठाए।
दीपके का दावा था कि कुछ ऐसे लोगों के नाम मतदाता सूची से हटाए जाने की बात सामने आई है, जो जीवित हैं। उन्होंने कहा कि कथित रूप से मृत घोषित किए गए कुछ लोग प्रदर्शन में मौजूद थे और अपनी स्थिति सामने रख रहे थे।
उन्होंने इस घटनाक्रम को लोकतंत्र और नागरिकों के मतदान के अधिकार से जुड़ा मुद्दा बताया। हालांकि, मतदाता सूची से नाम हटाए जाने के पीछे राजनीतिक मंशा होने का उनका आरोप स्वतंत्र रूप से प्रमाणित नहीं है।
मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग
प्रदर्शनकारियों ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की। दीपके ने कहा कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होतीं, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।
उन्होंने SIR प्रक्रिया को समाप्त करने और प्रक्रिया से पहले की मतदाता सूचियों को बहाल करने की मांग भी उठाई। प्रदर्शन में शामिल लोगों ने मतदाता सूची में नाम हटाए जाने की शिकायतों की जांच और चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करने पर जोर दिया।
‘वन नेशन, वन इलेक्शन’ पर भी उठाए सवाल
दीपके ने केंद्र सरकार के ‘वन नेशन, वन इलेक्शन’ प्रस्ताव पर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि इस नारे के पीछे देश में राजनीतिक सत्ता को एक पार्टी तक सीमित करने की मंशा हो सकती है।
अपने भाषण में उन्होंने भारत की लोकतांत्रिक संस्थाओं की स्वतंत्रता और विपक्षी विचारों के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने महात्मा गांधी, डॉ. भीमराव आंबेडकर और जवाहरलाल नेहरू की विचारधारा का उल्लेख करते हुए कहा कि देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था को सुरक्षित रखना जरूरी है। ये टिप्पणियां उनके भाषण और राजनीतिक विचारों का हिस्सा थीं।
मतदाता सूची और लोकतांत्रिक अधिकारों पर बहस
SIR को लेकर जारी विवाद में मतदाता सूची की शुद्धता, पात्र मतदाताओं के नामों की पुष्टि और नाम हटाए जाने की प्रक्रिया प्रमुख मुद्दे बन गए हैं। विरोध कर रहे समूहों का कहना है कि किसी भी पात्र नागरिक का नाम गलत तरीके से सूची से नहीं हटना चाहिए और शिकायतों के समाधान की प्रक्रिया पारदर्शी होनी चाहिए।
दूसरी ओर, मतदाता सूची के पुनरीक्षण का उद्देश्य रिकॉर्ड को अद्यतन करना और पात्र मतदाताओं की जानकारी की पुष्टि करना है। किसी विशेष नाम को हटाए जाने का कारण जानने के लिए संबंधित चुनावी रिकॉर्ड और आधिकारिक प्रक्रिया की जांच आवश्यक है।
आंदोलन आगे बढ़ाने का ऐलान
बेंगलुरु के प्रदर्शन के दौरान CJP और अन्य प्रदर्शनकारियों ने आंदोलन जारी रखने की बात कही। रिपोर्टों के अनुसार, 10 अक्टूबर को दिल्ली के जंतर-मंतर पर भी प्रदर्शन की योजना बनाई गई थी। आंदोलनकारियों की प्रमुख मांग मुख्य चुनाव आयुक्त का इस्तीफा और SIR प्रक्रिया से जुड़ी शिकायतों पर कार्रवाई है।
