5 नवंबर 2026 : राजधानी दिल्ली में एक और इमारत गिरने की घटना के बाद आम आदमी पार्टी (AAP) ने दिल्ली सरकार की सुरक्षा व्यवस्था और इमारतों के सेफ्टी ऑडिट को लेकर सवाल खड़े किए हैं। पार्टी ने पूछा है कि जब सरकार की ओर से इमारतों की सुरक्षा जांच और ऑडिट कराने के उपाय किए जा रहे हैं, तो इसके बावजूद लगातार इमारतें गिरने की घटनाएं क्यों सामने आ रही हैं। AAP ने सरकार से सुरक्षा व्यवस्था को लेकर जवाब मांगा है और कहा है कि लोगों की जान-माल की सुरक्षा सुनिश्चित करना प्रशासन की जिम्मेदारी है।
इमारत गिरने की घटनाएं दिल्ली में पुरानी और कमजोर इमारतों की स्थिति को लेकर चिंता बढ़ाती रही हैं। राजधानी के कई इलाकों में ऐसी इमारतें मौजूद हैं, जिनकी उम्र काफी अधिक हो चुकी है। इनमें से कुछ इमारतों में मरम्मत की जरूरत है, जबकि कुछ भवनों की संरचनात्मक स्थिति को लेकर भी सवाल उठते रहे हैं। ऐसे में नियमित सुरक्षा जांच और समय पर मरम्मत को महत्वपूर्ण माना जाता है।
AAP ने ताजा घटना के बाद दिल्ली सरकार की ओर से किए जा रहे सुरक्षा ऑडिट के दावों पर सवाल उठाते हुए पूछा है कि आखिर इन जांचों का जमीन पर कितना असर दिखाई दे रहा है।
चावड़ी बाजार में निर्माणाधीन तीन मंजिला इमारत ढही
यह पूरा मामला गुरुवार सुबह पुरानी दिल्ली के चावड़ी बाजार इलाके में हुई एक इमारत गिरने की घटना के बाद सामने आया। जानकारी के अनुसार, चावड़ी बाजार मेट्रो स्टेशन के पास गली सितारा, शीश महल इलाके में एक निर्माणाधीन तीन मंजिला इमारत का हिस्सा अचानक ढह गया। हादसे के बाद आसपास के इलाके में अफरा-तफरी मच गई और मलबे में कई लोगों के फंसे होने की आशंका जताई गई।
घटना की सूचना मिलते ही दिल्ली फायर सर्विस की छह गाड़ियां मौके पर पहुंचीं। इसके अलावा पुलिस और अन्य आपातकालीन सेवाओं की टीमों ने भी राहत एवं बचाव अभियान शुरू किया। बचाव दल ने मलबे में फंसे लोगों को बाहर निकालने के लिए अभियान चलाया।
शुरुआती जानकारी में कई लोगों के मलबे में दबे होने की आशंका जताई गई थी। बाद में दिल्ली पुलिस के अनुसार, इस हादसे में दो लोगों की मौत हो गई, जबकि एक व्यक्ति घायल हुआ। घायलों को इलाज के लिए अस्पताल पहुंचाया गया।
बताया गया कि इमारत पिछले तीन से चार महीनों से निर्माणाधीन थी। स्थानीय लोगों के अनुसार, इमारत में निर्माण कार्य चल रहा था और कुछ हिस्सों का निर्माण पहले ही किया जा चुका था। अचानक ढांचा गिरने से आसपास के लोगों में डर का माहौल बन गया।
सौरभ भारद्वाज ने सरकार और MCD को घेरा
हादसे के बाद AAP की दिल्ली इकाई के अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज ने मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के नेतृत्व वाली बीजेपी सरकार और नगर निगम (MCD) की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा कि दिल्ली में बार-बार इमारतों का सेफ्टी ऑडिट कराने के आदेश दिए जाते हैं, लेकिन इसके बावजूद इमारतें गिरने की घटनाएं रुक नहीं रही हैं।
भारद्वाज ने सवाल किया कि जब सरकार और MCD ने दिल्ली की इमारतों का कई बार सुरक्षा ऑडिट कराया है, तो फिर इस तरह के हादसे लगातार क्यों हो रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि ऑडिट के नाम पर कार्रवाई करने के बजाय विभिन्न विभागों में भ्रष्टाचार हो रहा है।
AAP नेता ने दिल्ली पुलिस, MCD, फायर विभाग और राजस्व विभाग के अधिकारियों पर भवन मालिकों से रिश्वत लेने के आरोप भी लगाए। उन्होंने दावा किया कि जो भवन मालिक रिश्वत देने से इनकार करते हैं, उनके खिलाफ MCD सीलिंग की कार्रवाई करती है, जबकि अन्य स्थानों पर कथित उल्लंघनों के बावजूद कार्रवाई नहीं होती।
हालांकि, ये सभी आरोप सौरभ भारद्वाज की ओर से लगाए गए हैं। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि या संबंधित विभागों की ओर से इन पर प्रतिक्रिया की जानकारी उपलब्ध नहीं है।
ग्रेटर कैलाश-2 में कार्रवाई को लेकर भी उठाए सवाल
सौरभ भारद्वाज ने दक्षिण दिल्ली के ग्रेटर कैलाश-2 मार्केट में दो जिम को सील किए जाने का उदाहरण देते हुए सरकारी कार्रवाई की निष्पक्षता पर सवाल उठाए। उन्होंने पूछा कि यदि कुछ व्यावसायिक इमारतों के खिलाफ सुरक्षा नियमों के उल्लंघन पर कार्रवाई की जा रही है, तो उसी क्षेत्र में मौजूद अन्य जिम और व्यावसायिक इमारतों की जांच क्यों नहीं की जा रही है।
उन्होंने इसे चुनिंदा कार्रवाई बताते हुए सरकार और संबंधित विभागों से जवाबदेही तय करने की मांग की। AAP नेता के अनुसार, भवनों की जांच और सुरक्षा नियमों का पालन सभी संस्थानों के लिए समान रूप से सुनिश्चित किया जाना चाहिए।
सत्या निकेतन हादसे के बाद सरकार ने दिए थे ऑडिट के आदेश
दिल्ली में इमारतों की सुरक्षा का मुद्दा सितंबर 2026 में सत्या निकेतन इलाके में हुए बड़े हादसे के बाद भी चर्चा में आया था। वहां एक पांच मंजिला इमारत, जिसमें छात्र पीजी के रूप में रह रहे थे, ढह गई थी। इस घटना में सात लोगों की मौत हुई थी।
इस हादसे के बाद मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने MCD के साथ मिलकर सार्वजनिक इस्तेमाल वाली इमारतों की सुरक्षा को लेकर नई नीति तैयार करने की बात कही थी। इसमें पीजी, नर्सिंग होम, स्कूल और अन्य सार्वजनिक उपयोग वाली इमारतों का समय-समय पर स्ट्रक्चरल ऑडिट कराने और सुरक्षा प्रमाणपत्र अनिवार्य करने का प्रस्ताव शामिल था।
इसके अलावा सरकार ने पीजी वाले इलाकों में इमारतों की संरचनात्मक जांच कराने और नियमों का उल्लंघन करने वाली इमारतों के खिलाफ कार्रवाई करने की बात कही थी। NDTV+1
दिल्ली में पुरानी और निर्माणाधीन इमारतों की सुरक्षा पर सवाल
चावड़ी बाजार की ताजा घटना ने एक बार फिर पुरानी दिल्ली की इमारतों और निर्माणाधीन भवनों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है। राजधानी के कई पुराने बाजारों में घनी आबादी, संकरी गलियां और एक-दूसरे से सटी इमारतें मौजूद हैं। ऐसे क्षेत्रों में निर्माण और मरम्मत के दौरान सुरक्षा नियमों का पालन करना बेहद जरूरी है।
विशेषज्ञों के अनुसार, किसी भी इमारत की संरचनात्मक मजबूती की नियमित जांच, निर्माण की अनुमति, इस्तेमाल की जा रही सामग्री और सुरक्षा मानकों का पालन सुनिश्चित करना आवश्यक है। यदि किसी इमारत में निर्माण के दौरान लापरवाही होती है, तो इससे आसपास रहने वाले लोगों और मजदूरों की जान को भी खतरा हो सकता है।
फिलहाल चावड़ी बाजार हादसे के बाद AAP ने सरकार और MCD से सुरक्षा ऑडिट की वास्तविक स्थिति सार्वजनिक करने और जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय करने की मांग उठाई है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि संबंधित एजेंसियां इस घटना की जांच में क्या कदम उठाती हैं और दिल्ली में इमारतों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए क्या कार्रवाई की जाती है।
