5 नवंबर 2026 : राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में वायु प्रदूषण का स्तर लगातार बढ़ने से लोगों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। गुरुवार, 5 नवंबर 2026 को दिल्ली की हवा ‘बेहद खराब’ (Very Poor) श्रेणी में दर्ज की गई। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के आंकड़ों के अनुसार, सुबह 8 बजे दिल्ली का औसत वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 367 रहा। शहर में घनी धुंध और स्मॉग की चादर छाई रही, जिससे कई इलाकों में लोगों को सांस लेने में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
दिल्ली में लगातार चौथे दिन हवा की गुणवत्ता बेहद खराब श्रेणी में बनी हुई है। प्रदूषण का असर केवल राजधानी के बाहरी इलाकों तक सीमित नहीं है, बल्कि शहर के कई प्रमुख क्षेत्रों में भी AQI का स्तर 400 के पार पहुंच गया है। ऐसे में बच्चों, बुजुर्गों और सांस संबंधी बीमारियों से पीड़ित लोगों के लिए स्थिति अधिक चिंताजनक बनी हुई है।
कई इलाकों में AQI 400 के पार
CPCB के रियल टाइम आंकड़ों के मुताबिक, दिल्ली के कई निगरानी केंद्रों पर प्रदूषण का स्तर गंभीर श्रेणी में दर्ज किया गया। जहांगीरपुरी सबसे अधिक प्रभावित इलाकों में शामिल रहा, जहां AQI 459 तक पहुंच गया। इसके अलावा IIT दिल्ली में 447, पंजाबी बाग में 446, अलीपुर में 437 और विवेक विहार में 434 AQI दर्ज किया गया।
इन इलाकों में वायु गुणवत्ता गंभीर श्रेणी में रही। वहीं राजधानी के अन्य हिस्सों में भी प्रदूषण का स्तर बेहद खराब बना हुआ है। सुबह के समय आसमान में धुंध छाए रहने के कारण दृश्यता भी प्रभावित हुई।
दिल्ली के 59 निगरानी केंद्रों में से 18 पर हवा की गुणवत्ता गंभीर श्रेणी में दर्ज की गई, जबकि 36 केंद्रों पर AQI बेहद खराब रहा। केवल पांच निगरानी केंद्रों पर प्रदूषण का स्तर खराब श्रेणी में दर्ज किया गया।
PM2.5 और PM10 बने प्रदूषण की बड़ी वजह
दिल्ली की हवा में प्रदूषण बढ़ने के पीछे PM2.5 और PM10 जैसे सूक्ष्म कण प्रमुख कारण बने हुए हैं। CPCB के आंकड़ों के अनुसार, सुबह 7 बजे शहर के 59 निगरानी केंद्रों में से 53 पर PM2.5 मुख्य प्रदूषक रहा, जबकि बाकी छह केंद्रों पर PM10 का स्तर प्रमुख था।
PM2.5 बेहद छोटे कण होते हैं, जो सांस के जरिए फेफड़ों के अंदर तक पहुंच सकते हैं। लंबे समय तक इनके संपर्क में रहने से सांस संबंधी समस्याएं बढ़ सकती हैं। वहीं PM10 के संपर्क में आने से भी खांसी, गले में जलन और सांस लेने में परेशानी हो सकती है।
विशेषज्ञों के अनुसार, प्रदूषण के बढ़ते स्तर को देखते हुए लोगों को बाहर निकलते समय सावधानी बरतनी चाहिए। खासकर अस्थमा, हृदय रोग और सांस की अन्य बीमारियों से पीड़ित लोगों को अधिक सतर्क रहने की जरूरत है।
पिछले दिनों से लगातार बिगड़ रही हवा
दिल्ली में पिछले कुछ दिनों से वायु गुणवत्ता में लगातार गिरावट देखी जा रही है। बुधवार को राजधानी का 24 घंटे का औसत AQI 377 दर्ज किया गया था। इससे पहले मंगलवार को यह 350 और सोमवार को 324 रहा था।
आंकड़ों से पता चलता है कि अक्टूबर के अंतिम दिनों की तुलना में नवंबर की शुरुआत में प्रदूषण का स्तर तेजी से बढ़ा है। मौसम में बदलाव, हवा की कम गति और वातावरण में प्रदूषकों के जमा होने से स्थिति और खराब हो रही है।
दिल्ली में सर्दियों की शुरुआत के साथ प्रदूषण की समस्या हर साल गंभीर रूप ले लेती है। इस दौरान वाहनों से निकलने वाला धुआं, निर्माण गतिविधियां, औद्योगिक उत्सर्जन और पराली जलाने से निकलने वाला धुआं वायु गुणवत्ता को प्रभावित करने वाले प्रमुख कारकों में शामिल होते हैं।
दिल्ली-NCR में प्रदूषण नियंत्रण के प्रयास
वायु गुणवत्ता में गिरावट को देखते हुए दिल्ली-NCR में प्रदूषण नियंत्रण के लिए ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (GRAP) के दूसरे चरण के तहत पाबंदियां लागू की गई हैं। इन उपायों का उद्देश्य प्रदूषण के स्रोतों को नियंत्रित करना और हवा की गुणवत्ता में सुधार लाना है।
इन उपायों के तहत सड़कों की नियमित सफाई, पानी का छिड़काव, धूल नियंत्रण और निर्माण स्थलों पर नियमों का पालन सुनिश्चित करने जैसे कदम शामिल हैं। इसके अलावा प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों और औद्योगिक गतिविधियों पर निगरानी बढ़ाने पर भी जोर दिया जा रहा है।
हालांकि, इन उपायों के बावजूद राजधानी में प्रदूषण का स्तर ऊंचा बना हुआ है। विशेषज्ञों के अनुसार, प्रदूषण पर प्रभावी नियंत्रण के लिए अलग-अलग स्रोतों से होने वाले उत्सर्जन को कम करना जरूरी है।
