• Thu. Nov 5th, 2026

दिल्ली में SIR के दौरान वोटर लिस्ट से नाम कटने पर Form 6 भरने वालों को राहत, पहले से पंजीकृत होने के आधार पर नहीं होगी कार्रवाई

5 नवंबर 2026 :  दिल्ली में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के दौरान जिन लोगों के नाम ड्राफ्ट वोटर लिस्ट से हट गए हैं, उन्हें चुनाव आयोग ने बड़ी राहत दी है। दिल्ली के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) ने स्पष्ट किया है कि पहले से मतदाता के रूप में पंजीकृत रहे लोग भी अपना नाम दोबारा मतदाता सूची में शामिल कराने के लिए Form 6 भर सकते हैं। केवल इस आधार पर उनके खिलाफ कोई कानूनी कार्रवाई या मुकदमा दर्ज नहीं किया जाएगा कि उनका नाम पहले भी किसी मतदाता सूची में शामिल था।

चुनाव अधिकारियों का यह स्पष्टीकरण उन लोगों की चिंताओं के बाद आया है, जिन्हें डर था कि पहले से वोटर होने के बावजूद Form 6 जमा करने पर उनके खिलाफ गलत जानकारी देने का मामला दर्ज हो सकता है। दरअसल, Form 6 में आवेदक को पहली बार मतदाता सूची में नाम शामिल कराने से संबंधित घोषणा करनी होती है। ऐसे में पहले से पंजीकृत मतदाताओं के सामने यह सवाल खड़ा हो गया था कि वे इस फॉर्म को कैसे भरें।

दिल्ली CEO कार्यालय ने स्पष्ट किया है कि केवल पहले से मतदाता सूची में नाम होने और SIR प्रक्रिया के दौरान या उसके बाद Form 6 जमा करने के आधार पर किसी मतदाता के खिलाफ जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की धारा 31 के तहत कार्रवाई शुरू नहीं की जाएगी।

चुनाव आयोग ने 3 नवंबर को जारी किया था स्पष्टीकरण

भारत निर्वाचन आयोग (ECI) ने 3 नवंबर 2026 को सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों को पत्र जारी कर इस मामले में स्थिति स्पष्ट की थी। आयोग ने कहा कि जिन मतदाताओं के नाम SIR के दौरान प्रकाशित ड्राफ्ट मतदाता सूची में नहीं हैं, वे निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार Form 6 जमा करके अपना नाम दोबारा शामिल कराने के लिए आवेदन कर सकते हैं।

आयोग के अनुसार, किसी व्यक्ति का नाम पहले मतदाता सूची में शामिल होना अपने आप में यह साबित नहीं करता कि Form 6 जमा करते समय उसने गलत घोषणा की है। ऐसे मामलों में आवेदन का उद्देश्य मौजूदा पुनरीक्षण प्रक्रिया के तहत मतदाता सूची में दोबारा नाम शामिल कराना है।

हालांकि, इसके लिए कुछ शर्तें भी रखी गई हैं। आवेदन करने वाला व्यक्ति किसी अन्य लोकसभा या विधानसभा क्षेत्र की मतदाता सूची में पहले से पंजीकृत नहीं होना चाहिए और उसके द्वारा की गई घोषणा कानून के अनुरूप होनी चाहिए।

Form 6 को लेकर क्यों पैदा हुई थी चिंता?

दरअसल, Form 6 का इस्तेमाल नए मतदाताओं के पंजीकरण और मतदाता सूची में नाम शामिल कराने के लिए किया जाता है। इस फॉर्म में आवेदक को यह घोषणा करनी होती है कि उसका नाम किसी अन्य निर्वाचन क्षेत्र की मतदाता सूची में पहले से शामिल नहीं है और वह निर्धारित नियमों के अनुसार नाम शामिल कराने के लिए आवेदन कर रहा है।

SIR प्रक्रिया के दौरान कई ऐसे लोगों के नाम ड्राफ्ट मतदाता सूची से गायब हो गए थे, जो पहले से मतदाता के रूप में पंजीकृत थे। ऐसे लोगों को Form 6 भरने के लिए कहा गया तो उन्हें आशंका हुई कि पहले से वोटर होने के बावजूद नए पंजीकरण के लिए आवेदन करना गलत घोषणा माना जा सकता है।

इसी आशंका को दूर करने के लिए चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया कि केवल पिछले मतदाता पंजीकरण के आधार पर Form 6 जमा करने वाले व्यक्ति के खिलाफ धारा 31 के तहत कार्रवाई नहीं की जाएगी।

दिल्ली हाईकोर्ट के आदेश का भी दिया गया हवाला

दिल्ली CEO कार्यालय ने अपने स्पष्टीकरण में दिल्ली हाईकोर्ट के 14 अक्टूबर 2026 के आदेश का भी उल्लेख किया। यह मामला नीलोत्पल दत्ता और अन्य बनाम भारत निर्वाचन आयोग से संबंधित था।

हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ताओं की उस आशंका को स्वीकार नहीं किया था कि पहले से मतदाता सूची में नाम होने के बावजूद Form 6 जमा करना अपने आप में गलत घोषणा माना जाएगा। अदालत ने आवेदन को कानून के अनुसार प्रक्रिया में शामिल करने की अनुमति दी थी।

इसी आदेश का हवाला देते हुए चुनाव आयोग ने कहा कि पहले से पंजीकृत मतदाताओं को केवल इस वजह से कानूनी कार्रवाई का डर नहीं होना चाहिए कि वे SIR के दौरान अपना नाम शामिल कराने के लिए Form 6 जमा कर रहे हैं।

दिल्ली में लाखों मतदाताओं के नाम हुए थे प्रभावित

दिल्ली में चल रही SIR प्रक्रिया के दौरान मतदाता सूची में बड़े स्तर पर बदलाव देखने को मिला है। 31 अगस्त को प्रकाशित ड्राफ्ट मतदाता सूची में करीब 47.56 लाख मतदाताओं के नाम शामिल नहीं थे। इनमें अनुपस्थित, स्थानांतरित, मृत और डुप्लीकेट मतदाताओं की श्रेणियों से जुड़े मामले भी शामिल थे।

इसके बाद कई लोगों ने अपने नाम दोबारा शामिल कराने और मतदाता सूची में मौजूद गलतियों को ठीक कराने के लिए आवेदन करना शुरू किया।

चुनाव आयोग के अनुसार, 4 नवंबर तक दिल्ली में 33.14 लाख से अधिक मतदाताओं को नो-मैपिंग और तार्किक विसंगतियों से संबंधित नोटिस जारी किए गए थे। इनमें बड़ी संख्या में मामलों को अंतिम मतदाता सूची में शामिल करने के लिए चिह्नित किया गया था।

इस पूरी प्रक्रिया के दौरान मतदाताओं को अपने दस्तावेजों और पंजीकरण से संबंधित जानकारी उपलब्ध कराने के लिए कहा गया है।

25 नवंबर तक दर्ज करा सकते हैं दावे और आपत्तियां

चुनाव आयोग ने दिल्ली में मतदाता सूची के दावों और आपत्तियों को दर्ज कराने की समयसीमा 25 नवंबर 2026 तक निर्धारित की है। मतदाता संबंधित निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी (ERO), सहायक निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी (AERO), बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) या निर्धारित मतदान केंद्रों पर जाकर आवेदन जमा कर सकते हैं।

इसके अलावा ऑनलाइन माध्यम से भी आवेदन करने की सुविधा उपलब्ध है। इसके लिए मतदाता चुनाव आयोग के Voter Services Portal और ECINET मोबाइल एप्लिकेशन का इस्तेमाल कर सकते हैं।

चुनाव आयोग के कार्यक्रम के अनुसार, दावों और आपत्तियों का निपटारा 15 दिसंबर तक किया जाना है, जबकि दिल्ली की अंतिम मतदाता सूची 22 दिसंबर 2026 को प्रकाशित करने का कार्यक्रम निर्धारित किया गया है।

मतदाताओं को नाम जांचने की सलाह

चुनाव अधिकारियों ने मतदाताओं से अपील की है कि वे अंतिम सूची जारी होने का इंतजार करने के बजाय अभी अपनी जानकारी की जांच करें। यदि किसी व्यक्ति का नाम ड्राफ्ट मतदाता सूची में नहीं है, तो उसे निर्धारित प्रक्रिया के तहत आवेदन करना चाहिए।

Form 6 को लेकर जारी स्पष्टीकरण से उन लोगों को राहत मिलने की उम्मीद है, जो पहले से मतदान करते रहे हैं लेकिन SIR के दौरान उनका नाम ड्राफ्ट सूची में नहीं आया।

हालांकि, यह राहत केवल पहले से पंजीकृत होने के आधार पर होने वाली कार्रवाई से संबंधित है। इसका मतलब यह नहीं है कि फॉर्म में किसी भी प्रकार की गलत या भ्रामक जानकारी देने की छूट मिल गई है। आवेदन करने वाले व्यक्ति को अन्य सभी कानूनी शर्तों और सही घोषणा का पालन करना होगा।

इस तरह चुनाव आयोग का यह स्पष्टीकरण SIR प्रक्रिया के दौरान मतदाताओं की चिंताओं को दूर करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। इससे पहले से पंजीकृत मतदाताओं को अपना नाम दोबारा शामिल कराने के लिए आवेदन करने में कानूनी कार्रवाई का डर नहीं रहेगा।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *