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जालंधर के सरकारी स्कूलों में मरम्मत और जरूरी सुविधाओं पर शिक्षकों ने अपनी जेब से खर्च किए लाखों रुपये, सरकारी ग्रांट का अब भी इंतजार

5 नवंबर 2026 :   पंजाब के जालंधर जिले में सरकारी स्कूलों की व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए शिक्षकों को आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। स्कूलों की मरम्मत और जरूरी सुविधाओं से जुड़े काम पूरे करवाने के लिए कई शिक्षकों ने अपनी जेब से लाखों रुपये खर्च कर दिए हैं। हालांकि, इन खर्चों के बदले मिलने वाली सरकारी ग्रांट का भुगतान अभी तक नहीं हुआ है। ऐसे में शिक्षकों को अपनी खर्च की गई राशि वापस मिलने का इंतजार है।

सरकारी स्कूलों में विद्यार्थियों को बेहतर शैक्षणिक माहौल उपलब्ध करवाने के लिए समय-समय पर मरम्मत और रखरखाव के काम करवाने की जरूरत पड़ती है। इनमें कक्षाओं की मरम्मत, दीवारों की रंगाई, बिजली और पानी की व्यवस्था, शौचालयों की साफ-सफाई तथा अन्य बुनियादी सुविधाओं से जुड़े काम शामिल हैं। इन कार्यों को समय पर पूरा करवाने के लिए शिक्षकों को कई बार अपने स्तर पर इंतजाम करना पड़ता है।

शिक्षकों ने अपनी जेब से करवाए मरम्मत के काम

जालंधर के कई सरकारी स्कूलों में शिक्षकों ने विद्यार्थियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए मरम्मत और रखरखाव के काम अपनी जेब से करवाए। स्कूलों में जरूरी सुविधाओं की कमी के कारण पढ़ाई प्रभावित न हो, इसके लिए शिक्षकों ने पहले खर्च किया और बाद में सरकारी ग्रांट मिलने की उम्मीद रखी।

शिक्षकों का कहना है कि स्कूलों में बुनियादी सुविधाएं बनाए रखना उनकी प्राथमिकता है। अगर किसी कक्षा की छत, दीवार या अन्य जरूरी व्यवस्था में समस्या आती है तो उसे लंबे समय तक नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। विद्यार्थियों की सुरक्षा और पढ़ाई को ध्यान में रखते हुए कई बार तुरंत काम करवाना जरूरी हो जाता है।

सरकारी ग्रांट नहीं मिलने से बढ़ी परेशानी

स्कूलों की मरम्मत पर खर्च करने के बाद शिक्षकों को उम्मीद थी कि सरकारी स्तर पर निर्धारित ग्रांट जारी होने से उनकी खर्च की गई राशि वापस मिल जाएगी। लेकिन भुगतान में देरी के कारण उन्हें आर्थिक परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

शिक्षकों के सामने सबसे बड़ी समस्या यह है कि स्कूलों के काम पूरे करवाने के लिए खर्च की गई रकम लंबे समय से वापस नहीं मिली है। इससे उनके निजी बजट पर भी असर पड़ रहा है। शिक्षकों का कहना है कि स्कूलों के विकास और रखरखाव की जिम्मेदारी विभाग की है, इसलिए इसके लिए समय पर आर्थिक सहायता उपलब्ध करवाई जानी चाहिए।

सरकारी स्कूलों की सुविधाओं पर उठे सवाल

इस मामले ने सरकारी स्कूलों में बुनियादी सुविधाओं और रखरखाव के लिए मिलने वाली सरकारी सहायता को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। सरकारी स्कूलों में बड़ी संख्या में विद्यार्थी पढ़ाई करते हैं और उनके लिए सुरक्षित कक्षाएं, साफ शौचालय, पीने का पानी तथा बेहतर शैक्षणिक वातावरण उपलब्ध होना जरूरी है।

अगर स्कूलों में मरम्मत के काम समय पर नहीं होते तो इसका सीधा असर विद्यार्थियों की पढ़ाई और स्कूल की व्यवस्था पर पड़ सकता है। ऐसे में शिक्षकों की ओर से अपनी जेब से खर्च करके काम करवाना व्यवस्था से जुड़े कई सवाल सामने लाता है।

शिक्षकों को ग्रांट जारी होने का इंतजार

शिक्षकों की मांग है कि स्कूलों की मरम्मत और रखरखाव पर किए गए खर्च की राशि जल्द जारी की जाए। इसके साथ ही भविष्य में स्कूलों को मिलने वाली ग्रांट की प्रक्रिया भी आसान और समयबद्ध बनाई जानी चाहिए।

शिक्षकों का मानना है कि स्कूलों में जरूरी काम करवाने के लिए उन्हें अपनी व्यक्तिगत बचत का इस्तेमाल नहीं करना पड़े। विभाग को पहले से पर्याप्त बजट उपलब्ध करवाना चाहिए, ताकि स्कूलों की जरूरतों के अनुसार समय पर मरम्मत और अन्य कार्य पूरे किए जा सकें।

शिक्षा व्यवस्था के लिए जरूरी है समय पर फंड

सरकारी स्कूलों में बेहतर शिक्षा केवल शिक्षकों और पाठ्यक्रम तक सीमित नहीं है। इसके लिए स्कूलों का बुनियादी ढांचा भी मजबूत होना जरूरी है। अच्छी कक्षाएं, साफ-सुथरा परिसर और जरूरी सुविधाएं विद्यार्थियों के सीखने के माहौल को बेहतर बनाती हैं।

जालंधर में सामने आया यह मामला सरकारी स्कूलों के रखरखाव के लिए समय पर फंड जारी करने की जरूरत को उजागर करता है। यदि ग्रांट मिलने में देरी होती है तो स्कूलों के विकास कार्य प्रभावित हो सकते हैं और शिक्षकों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ सकता है।

कुल मिलाकर, जालंधर के सरकारी स्कूलों में मरम्मत के लिए शिक्षकों की ओर से लाखों रुपये खर्च किए जाने और सरकारी ग्रांट का इंतजार किए जाने का मामला शिक्षा विभाग के लिए महत्वपूर्ण है। अब शिक्षकों को उम्मीद है कि संबंधित विभाग उनकी समस्या पर ध्यान देगा और लंबित भुगतान जल्द जारी करेगा, ताकि उन्हें अपनी जेब से खर्च की गई राशि वापस मिल सके।

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