2 नवंबर 2026 : जाब में आम आदमी पार्टी (AAP) ने अपने दो विधायकों हरमीत सिंह पठानमाजरा और चेतन सिंह जौड़ामाजरा के खिलाफ कार्रवाई का अगला कदम उठाने की तैयारी कर ली है। पार्टी दोनों नेताओं की विधानसभा सदस्यता रद्द कराने की मांग को लेकर पंजाब विधानसभा के स्पीकर कुलतार सिंह संधवां से संपर्क करेगी। दोनों विधायक पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे चुके हैं। इससे पहले AAP ने कथित पार्टी विरोधी गतिविधियों के आरोप में उन्हें निलंबित किया था।
स्पीकर के सामने मामला उठाएगी आम आदमी पार्टी
रिपोर्टों के मुताबिक, AAP अब दोनों विधायकों की सदस्यता समाप्त करने की मांग विधानसभा स्तर पर उठाना चाहती है। पार्टी का आरोप है कि दोनों नेताओं ने पार्टी विरोधी गतिविधियों में हिस्सा लिया और संगठन के फैसलों के विपरीत काम किया।
हालांकि, विधानसभा सदस्यता रद्द करने का अंतिम फैसला स्पीकर को लागू संवैधानिक और कानूनी प्रावधानों के तहत लेना होगा। केवल पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा देने भर से किसी विधायक की विधानसभा सदस्यता अपने आप समाप्त नहीं होती।
किस सीट से विधायक हैं दोनों नेता?
हरमीत सिंह पठानमाजरा पटियाला जिले की सनौर विधानसभा सीट से विधायक हैं, जबकि चेतन सिंह जौड़ामाजरा समाना सीट का प्रतिनिधित्व करते हैं। जौड़ामाजरा भगवंत मान सरकार में कैबिनेट मंत्री भी रह चुके हैं। सितंबर 2024 में मंत्रिमंडल फेरबदल के दौरान उन्हें मंत्री पद से हटा दिया गया था।
दोनों नेताओं ने 1 नवंबर को AAP की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा देने की घोषणा की थी। यह घटनाक्रम पार्टी की ओर से पंजाब विधानसभा चुनाव 2027 के लिए 40 उम्मीदवारों की पहली सूची जारी किए जाने के एक दिन बाद सामने आया।
उम्मीदवारों की सूची के बाद बढ़ी नाराजगी
AAP की पहली सूची में सनौर और समाना विधानसभा क्षेत्रों के लिए उम्मीदवारों के नाम शामिल नहीं थे। हालांकि, पार्टी ने इन दोनों क्षेत्रों में नए हलका इंचार्ज नियुक्त कर दिए थे। इससे दोनों मौजूदा विधायकों के दोबारा टिकट मिलने की संभावनाओं को लेकर चर्चाएं शुरू हो गई थीं।
पार्टी के भीतर बढ़ते मतभेदों के बीच दोनों नेताओं ने इस्तीफा दे दिया। उनके अगले राजनीतिक कदम को लेकर भी चर्चा तेज हुई। दोनों के भाजपा में शामिल होने की घोषणा की खबरें सामने आईं।
अब स्पीकर के फैसले पर टिकी नजरें
AAP की ओर से सदस्यता रद्द करने की मांग किए जाने के बाद अब इस मामले में विधानसभा स्पीकर की भूमिका अहम होगी। स्पीकर संबंधित तथ्यों और संवैधानिक प्रावधानों के आधार पर आगे की कार्रवाई तय करेंगे।
पंजाब में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले यह घटनाक्रम राज्य की राजनीति में नई चर्चा का विषय बन गया है। अब देखना होगा कि AAP की मांग पर स्पीकर क्या फैसला लेते हैं और दोनों विधायकों की विधानसभा सदस्यता को लेकर आगे क्या कानूनी प्रक्रिया अपनाई जाती है।
