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सीचेवाल ने CM मान से की मुलाकात, प्रदूषित ड्रेनों और गोबर निस्तारण का मुद्दा उठाया

31 अक्तूबर 2026: पंजाब से राज्यसभा सांसद और पर्यावरण कार्यकर्ता संत बलबीर सिंह सीचेवाल ने मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान से मुलाकात कर राज्य में प्रदूषित नदियों और ड्रेनों की समस्या के साथ-साथ डेयरी से निकलने वाले गोबर के उचित निस्तारण का मुद्दा उठाया। मुलाकात के दौरान उन्होंने बुद्धा दरिया, काला संघिया ड्रेन, चिट्टी बेईं और धुस्सी बांध के किनारे सड़क निर्माण से जुड़ी समस्याओं पर मुख्यमंत्री का ध्यान आकर्षित किया।

सीचेवाल ने कहा कि प्रदूषण रोकने के लिए करोड़ों रुपये खर्च किए जाने के बावजूद कई जगहों पर गंदा पानी और डेयरी कचरा जल स्रोतों में पहुंच रहा है। मुख्यमंत्री भगवंत मान ने उनकी ओर से उठाए गए मुद्दों को सुनने के बाद संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक बुलाकर समाधान तलाशने का भरोसा दिया।

लुधियाना में गोबर निस्तारण की समस्या उठाई

सीचेवाल ने लुधियाना के डेयरी परिसरों से निकलने वाले गोबर के उचित संग्रह और निस्तारण की समस्या को प्रमुखता से उठाया। उनके अनुसार, पहले डेयरी संचालक प्रति पशु 13 रुपये देकर नियमित रूप से गोबर उठवाते थे। नगर निगम की ओर से गोबर संग्रह का काम तीन साल के लिए 22 करोड़ रुपये के ठेके पर दिए जाने के बाद डेयरी संचालकों ने गोबर उठवाना बंद कर दिया।

उन्होंने बताया कि पहले नगर निगम यह सेवा निशुल्क उपलब्ध कराता था। सीचेवाल ने इस व्यवस्था में आ रही दिक्कतों और संबंधित अधिकारियों की भूमिका पर सवाल उठाते हुए कहा कि इस समस्या की पूरी जानकारी मुख्यमंत्री तक पहुंचनी चाहिए थी।

डेयरी से निकलने वाला गोबर यदि सीवर और खुले नालों में जाता है तो इससे सीवरेज व्यवस्था और जल शोधन संयंत्रों पर भी असर पड़ता है। ऐसे में इसके संग्रह और वैज्ञानिक तरीके से निस्तारण की व्यवस्था जरूरी है।

28 करोड़ खर्च के बाद भी प्रदूषित है काला संघिया ड्रेन

सीचेवाल ने काला संघिया ड्रेन की स्थिति पर भी चिंता जताई। उन्होंने बताया कि स्मार्ट सिटी परियोजना के तहत शहर से गुजरने वाले ड्रेन के लगभग 15 किलोमीटर हिस्से में दोनों तरफ पत्थर लगाने पर 28 करोड़ रुपये खर्च किए गए थे। इसके बावजूद ड्रेन में प्रदूषित पानी का प्रवाह जारी है।

उन्होंने यह भी बताया कि ड्रेन के रखरखाव के लिए पांच करोड़ रुपये अतिरिक्त निर्धारित किए गए हैं। सीचेवाल ने सवाल उठाया कि जब बुनियादी ढांचे पर इतनी राशि खर्च की गई है, तो फिर गंदे पानी को इसमें गिरने से रोकने के लिए प्रभावी व्यवस्था क्यों नहीं हो पाई।

चिट्टी बेईं में पानी छोड़ने की व्यवस्था पर सवाल

राज्यसभा सांसद ने चिट्टी बेईं में पानी छोड़ने की व्यवस्था का मुद्दा भी मुख्यमंत्री के सामने रखा। उनके मुताबिक, बेईं में 200 क्यूसेक पानी छोड़ने के उद्देश्य से 1.19 करोड़ रुपये की लागत से रेगुलेटर बनाया गया था। निर्माण को दो साल से अधिक समय बीतने के बावजूद नियमित रूप से पानी छोड़ने की व्यवस्था लागू नहीं हो पाई है।

इसके अलावा बिस्त दोआब नहर से काला संघिया ड्रेन में 100 क्यूसेक पानी छोड़ने की योजना भी लंबित बताई गई। सीचेवाल ने संबंधित विभागों से इस व्यवस्था को लागू करने की जरूरत पर जोर दिया।

धुस्सी बांध के किनारे सड़क निर्माण का मुद्दा

बैठक में गिद्दड़पिंडी से फिल्लौर तक धुस्सी बांध के साथ 16 फुट चौड़ी सड़क बनाने का विषय भी उठाया गया। सीचेवाल के अनुसार, इस परियोजना में मंडी बोर्ड को सड़क निर्माण का काम करना है, जबकि बांध पर मिट्टी उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी ड्रेनेज विभाग की थी। उन्होंने बताया कि मिट्टी उपलब्ध कराने के मामले में विभाग पीछे हट गया है, जिससे परियोजना प्रभावित हो रही है।

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों की बैठक बुलाने का दिया भरोसा

सीचेवाल की ओर से उठाए गए सभी मुद्दों को सुनने के बाद मुख्यमंत्री भगवंत मान ने संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक बुलाने की बात कही। इस बैठक में प्रदूषित पानी के प्रवाह को रोकने, डेयरी गोबर के संग्रह और निस्तारण तथा लंबित विकास कार्यों की स्थिति पर चर्चा किए जाने की उम्मीद है।

बुद्धा दरिया और अन्य जल स्रोतों की सफाई पंजाब के लिए लंबे समय से महत्वपूर्ण पर्यावरणीय मुद्दा रही है। अब यह देखना होगा कि मुख्यमंत्री की ओर से प्रस्तावित बैठक के बाद संबंधित विभाग इन समस्याओं के समाधान के लिए क्या कदम उठाते हैं।

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