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PTU से संबद्धता के आदेश जारी नहीं होने से 10 हजार विद्यार्थी परेशान, 90 कॉलेजों में दाखिले और परीक्षाओं पर असमंजस

31 अक्तूबर 2026:   पंजाब में करीब 10 हजार विद्यार्थी अपने शैक्षणिक भविष्य को लेकर असमंजस में हैं। आईके गुजराल पंजाब टेक्निकल यूनिवर्सिटी (IKGPTU) ने शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए एलाइड हेल्थकेयर पाठ्यक्रम चलाने वाले करीब 80 से 90 कॉलेजों को अभी तक संबद्धता के आदेश जारी नहीं किए हैं। इस देरी के कारण विद्यार्थियों की पढ़ाई, परीक्षाओं और शैक्षणिक सत्र को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है।

इन पाठ्यक्रमों में दाखिला लेने वाले विद्यार्थी जुलाई से कक्षाएं लगा रहे हैं और लगभग तीन महीने की पढ़ाई कर चुके हैं। लेकिन संबद्धता को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं होने के कारण उनकी मिड-टर्म परीक्षाएं भी आयोजित नहीं हो पाई हैं। वहीं, इन पाठ्यक्रमों में दाखिले की अंतिम तारीख 31 अक्टूबर निर्धारित है।

संबद्धता में देरी की क्या है वजह?

मामले की शुरुआत राष्ट्रीय एलाइड एंड हेल्थकेयर प्रोफेशनल्स आयोग (NCAHP) की ओर से नियमों में किए गए बदलावों के बाद हुई। आयोग ने हाल ही में कुछ पाठ्यक्रमों के नामकरण और पाठ्यक्रम से जुड़े नियमों में संशोधन किए हैं।

आईकेजीपीटीयू ने पहले विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) की अधिसूचना का इंतजार किया था, जिसमें NCAHP के पाठ्यक्रमों को मान्यता देने से संबंधित जानकारी शामिल थी। यह अधिसूचना 27 अगस्त को जारी हुई। इसके बाद विश्वविद्यालय ने बीएससी कार्डियक केयर टेक्नोलॉजी (CCT) और बीएससी ऑपरेशन थिएटर टेक्नोलॉजी (OTT) जैसे पाठ्यक्रमों को लेकर आयोग से स्पष्टीकरण मांगा।

इन पाठ्यक्रमों के नामकरण और पाठ्यक्रम संबंधी कुछ बिंदुओं पर आयोग की आपत्तियों के चलते विश्वविद्यालय को अतिरिक्त जानकारी और स्पष्टीकरण मांगना पड़ा। इसी प्रक्रिया के कारण संबद्धता के आदेश जारी होने में देरी हुई।

कॉलेज एसोसिएशन ने मांगी एक महीने की मोहलत

पंजाब अनएडेड कॉलेज एसोसिएशन (PUCA) के अध्यक्ष डॉ. अंशु कटारिया ने इस मामले में स्वास्थ्य मंत्री को पत्र लिखकर राज्य सरकार से हस्तक्षेप की मांग की है। उन्होंने सरकार से NCAHP के साथ बातचीत कर दाखिले की अंतिम तारीख एक महीने बढ़ाने का अनुरोध किया है।

एसोसिएशन का कहना है कि प्रशासनिक और नियामकीय प्रक्रिया में देरी का नुकसान विद्यार्थियों को नहीं उठाना चाहिए। करीब 10 हजार विद्यार्थियों का शैक्षणिक वर्ष प्रभावित होने की आशंका को देखते हुए अतिरिक्त समय देने की मांग की गई है।

विश्वविद्यालय प्रशासन ने क्या कहा?

आईकेजीपीटीयू के रजिस्ट्रार डॉ. नवदीपक संधू के अनुसार, विश्वविद्यालय को राज्य आयोग से जल्द स्पष्टीकरण मिलने की उम्मीद है। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय नियमों का उल्लंघन नहीं करना चाहता और आयोग के अंतिम निर्णय के अनुसार ही आगे की प्रक्रिया अपनाएगा।

उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि जिन पाठ्यक्रमों के नामकरण या पाठ्यक्रम को लेकर NCAHP की कोई आपत्ति नहीं है, उन्हें संचालित करने की अनुमति दी जाएगी। जिन पाठ्यक्रमों पर आपत्तियां हैं, उनके संबंध में निर्धारित प्रक्रिया का पालन किया जाएगा।

विद्यार्थियों को फैसले का इंतजार

फिलहाल, कॉलेजों और विद्यार्थियों की नजर विश्वविद्यालय तथा संबंधित आयोग के अगले निर्णय पर है। यदि संबद्धता और दाखिले की प्रक्रिया जल्द स्पष्ट नहीं होती, तो पहले से कक्षाएं लगा रहे विद्यार्थियों के सामने परीक्षा और शैक्षणिक सत्र को लेकर मुश्किलें बढ़ सकती हैं।

अब देखना होगा कि राज्य सरकार, विश्वविद्यालय और NCAHP के बीच बातचीत से इस मामले का समाधान कब तक निकलता है और विद्यार्थियों को राहत देने के लिए दाखिले की समय-सीमा बढ़ाई जाती है या नहीं।

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