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पंजाब में वाल्मीकि-मझबी सिख नेताओं ने मांगी आबादी के अनुपात में राजनीतिक हिस्सेदारी

26 अक्तूबर 2026: पंजाब में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले वाल्मीकि और मझबी सिख समुदायों के नेताओं ने राजनीतिक दलों से उम्मीदवारों के चयन में आबादी के अनुपात के अनुसार प्रतिनिधित्व देने की मांग उठाई है। नेताओं का कहना है कि राज्य की 117 विधानसभा सीटों पर उम्मीदवार तय करते समय इन समुदायों को उचित हिस्सेदारी मिलनी चाहिए। इसके साथ ही उन्होंने अनुसूचित जाति (SC) के लिए आरक्षित 34 विधानसभा सीटों में से कम से कम 15 सीटों पर अपने समुदायों के उम्मीदवारों को टिकट देने की मांग की है।

117 सीटों पर 12.5 प्रतिशत प्रतिनिधित्व की मांग

वाल्मीकि और मझबी सिख समुदायों के नेताओं ने राजनीतिक दलों से अपील की है कि उम्मीदवारों की सूची तैयार करते समय उनकी आबादी और राजनीतिक भागीदारी को ध्यान में रखा जाए। उनकी मांग है कि कुल 117 विधानसभा सीटों में से कम से कम 12.5 प्रतिशत सीटों पर इन समुदायों को प्रतिनिधित्व दिया जाए।

इस मांग का उद्देश्य चुनावी राजनीति में समुदायों की भागीदारी बढ़ाना है। नेताओं का मानना है कि राजनीतिक दलों को टिकट वितरण के दौरान विभिन्न सामाजिक समूहों को उचित अवसर देना चाहिए।

आरक्षित सीटों में भी हिस्सेदारी की मांग

नेताओं ने पंजाब की 34 अनुसूचित जाति आरक्षित विधानसभा सीटों में से कम से कम 15 सीटों पर वाल्मीकि और मझबी सिख समुदायों के उम्मीदवारों को टिकट देने की मांग की है।

उनका कहना है कि इन समुदायों की राजनीतिक भागीदारी केवल आरक्षित सीटों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। सामान्य सीटों पर भी उम्मीदवार बनने के अवसर मिलने चाहिए, ताकि राजनीतिक और संगठनात्मक स्तर पर उनकी भूमिका बढ़ सके।

समुदायों की आबादी का दिया हवाला

2011 की जनगणना के अनुसार, पंजाब की कुल आबादी में अनुसूचित जातियों की हिस्सेदारी लगभग 31.9 प्रतिशत थी। राज्य में मझबी सिख और वाल्मीकि समुदाय भी अनुसूचित जाति आबादी के महत्वपूर्ण हिस्से हैं।

समुदायों के नेताओं का कहना है कि राजनीतिक प्रतिनिधित्व तय करते समय उनकी जनसंख्या और सामाजिक स्थिति पर ध्यान दिया जाना चाहिए। हालांकि, आबादी के अनुपात में राजनीतिक दलों से टिकट मांगना एक राजनीतिक मांग है। इसे विधानसभा चुनावों में लागू कानूनी आरक्षण नहीं माना जा सकता।

आरक्षण और राजनीतिक टिकट अलग-अलग मुद्दे

अनुसूचित जातियों के भीतर आरक्षण के लाभों के वितरण को लेकर भी लंबे समय से चर्चा होती रही है। सुप्रीम कोर्ट ने अगस्त 2024 में राज्यों को अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों के आरक्षण में उप-वर्गीकरण करने की अनुमति देने वाला फैसला सुनाया था।

हालांकि, सरकारी नौकरियों में आरक्षण और राजनीतिक दलों द्वारा चुनावी टिकटों का वितरण अलग-अलग विषय हैं। सरकारी नौकरियों में आरक्षण के प्रावधानों से राजनीतिक दलों पर उसी अनुपात में टिकट देने की कानूनी बाध्यता अपने आप लागू नहीं होती।

2027 के चुनाव से पहले बढ़ सकती है चर्चा

पंजाब में अगले विधानसभा चुनाव 2027 में होने हैं। ऐसे में वाल्मीकि और मझबी सिख नेताओं की मांग उम्मीदवारों के चयन और राजनीतिक दलों की रणनीति के लिहाज से चर्चा का विषय बन सकती है।

अब यह देखना होगा कि पंजाब के विभिन्न राजनीतिक दल आगामी चुनावों में टिकट वितरण और संगठनात्मक नियुक्तियों के दौरान इस मांग पर क्या रुख अपनाते हैं।

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