22 अक्तूबर 2026: बॉलीवुड अभिनेता टाइगर श्रॉफ की कार पर मुंबई में हुई फायरिंग के मामले में जांच एजेंसियों ने हथियारों की सप्लाई से जुड़े नेटवर्क का खुलासा किया है। पुलिस के मुताबिक, आरोपियों ने हथियारों को एक जगह से दूसरी जगह पहुंचाने के लिए ‘डेड लेटर बॉक्स’ तरीके का इस्तेमाल किया। इसके साथ ही एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग ऐप के जरिए संपर्क बनाए रखा गया, ताकि हथियारों की सप्लाई में शामिल लोगों को आमने-सामने न आना पड़े।
दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने इस मामले में हथियारों की कथित सप्लाई से जुड़े चार लोगों को गिरफ्तार किया है। उनकी पहचान कुणाल, सुमित, राधा और बबीता के रूप में हुई है। पुलिस के अनुसार, ये लोग कथित तौर पर लॉरेंस बिश्नोई गिरोह से जुड़े अनिल पंडित के संपर्क में थे। मामले में सभी आरोपों की जांच जारी है।
क्या है ‘डेड लेटर बॉक्स’ तरीका?
‘डेड लेटर बॉक्स’ ऐसी व्यवस्था को कहा जाता है, जिसमें कोई व्यक्ति पहले से तय स्थान पर सामान छोड़ देता है और दूसरा व्यक्ति वहां से उसे उठा लेता है। इस प्रक्रिया में दोनों लोगों का सीधे मिलना जरूरी नहीं होता।
पुलिस सूत्रों के मुताबिक, कुणाल और सुमित फायरिंग की घटना से लगभग दो सप्ताह पहले अमृतसर गए थे। वहां उन्होंने कथित तौर पर एक तय स्थान से पिस्तौल और 20 कारतूस प्राप्त किए। जांचकर्ताओं का कहना है कि उन्हें यह जानकारी नहीं थी कि हथियार उस जगह पर किसने छोड़े थे।
हथियार पहुंचाने के लिए महिलाओं की कथित मदद
जांच के अनुसार, अमृतसर से हथियार लेने के बाद उन्हें मुंबई पहुंचाने की जिम्मेदारी कथित तौर पर राधा और बबीता को दी गई थी। पुलिस सूत्रों का दावा है कि हथियारों की व्यवस्था करने के लिए अनिल पंडित ने कुणाल और सुमित को लगभग 70,000 से 80,000 रुपये दिए थे। इनमें से करीब 10,000 से 12,000 रुपये कथित तौर पर दोनों महिलाओं को दिए गए।
पुलिस के मुताबिक, कुणाल ने राधा से अपने संबंधों का इस्तेमाल कर उसे इस काम के लिए तैयार किया। बताया गया है कि दोनों की मुलाकात फायरिंग की घटना से करीब दो महीने पहले हुई थी। इसके बाद राधा और बबीता कथित तौर पर हथियार लेकर मुंबई पहुंचीं।
एन्क्रिप्टेड ऐप के जरिए संपर्क
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, कुणाल और अनिल पंडित के बीच एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग ऐप के जरिए बातचीत होती थी। जांच में सामने आया कि कुणाल की अनिल पंडित से पहचान एक परिचित के माध्यम से हुई थी।
जांच एजेंसियां अब डिजिटल बातचीत, फोन रिकॉर्ड, पैसों के लेनदेन और आरोपियों की आवाजाही से जुड़े सबूतों की पड़ताल कर रही हैं। पुलिस का उद्देश्य हथियारों के मूल स्रोत और सप्लाई नेटवर्क में शामिल अन्य लोगों की पहचान करना है।
18 अक्टूबर को हुई थी टाइगर श्रॉफ की कार पर फायरिंग
मुंबई के जुहू इलाके में 18 अक्टूबर 2026 को टाइगर श्रॉफ की कार पर गोलीबारी हुई थी। घटना के बाद पुलिस ने कथित शूटरों की तलाश शुरू की। तीन संदिग्धों को राजस्थान के कोटा से पकड़े जाने की रिपोर्ट सामने आई थी।
इसके बाद हथियारों की सप्लाई से जुड़े नेटवर्क की जांच आगे बढ़ाई गई और दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने चार अन्य आरोपियों को गिरफ्तार किया। जांच एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि हथियार किसने उपलब्ध कराए, उन्हें मुंबई तक कैसे पहुंचाया गया और फायरिंग की योजना में प्रत्येक आरोपी की क्या भूमिका थी।
जांच में गिरोह के कथित नेटवर्क की पड़ताल
पुलिस इस मामले में लॉरेंस बिश्नोई गिरोह से कथित संबंधों की भी जांच कर रही है। अधिकारियों के अनुसार, हथियारों की सप्लाई, आरोपियों के बीच संपर्क और पैसों के लेनदेन की कड़ियों को जोड़कर पूरे नेटवर्क का पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है।
फिलहाल, मामले में गिरफ्तार लोगों के खिलाफ आरोप जांच के अधीन हैं। पुलिस की आगे की जांच और अदालत में पेश किए जाने वाले साक्ष्यों से घटना की पूरी साजिश और आरोपियों की भूमिका स्पष्ट होने की उम्मीद है।
