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BK सिविल अस्पताल में स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित, ऑपरेशन के लिए ढाई महीने तक इंतजार; 26 में से 11 एंबुलेंस खराब

22 अक्तूबर 2026:  हरियाणा के फरीदाबाद स्थित बादशाह खान (BK) सिविल अस्पताल में डॉक्टरों, नर्सों, बेड और एंबुलेंस की कमी के कारण मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। जिले के प्रमुख सरकारी अस्पताल में ऑपरेशन के लिए मरीजों को दो से ढाई महीने तक की तारीख दी जा रही है। विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी के चलते कई मरीजों को दूसरे अस्पतालों में रेफर करना पड़ रहा है।

22 अक्टूबर 2026 को प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार, अस्पताल में प्रतिदिन 2,000 से 2,500 मरीज ओपीडी में इलाज के लिए पहुंचते हैं। करीब 26 लाख की आबादी के लिए प्रमुख सरकारी स्वास्थ्य केंद्र होने के कारण यहां मरीजों का दबाव काफी अधिक है।

विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी से ऑपरेशन में देरी

अस्पताल में विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी के कारण ओपीडी में मरीज देखने वाले डॉक्टरों को ऑपरेशन की जिम्मेदारी भी निभानी पड़ती है। इससे सर्जरी के लिए उपलब्ध समय सीमित हो जाता है और मरीजों को लंबा इंतजार करना पड़ता है। मामूली प्रक्रियाओं के लिए भी तीन महीने तक की प्रतीक्षा की स्थिति सामने आई है।

अस्पताल में पित्त की पथरी, घुटने और कूल्हे के प्रत्यारोपण, मोतियाबिंद के ऑपरेशन और प्रसव जैसी सेवाएं उपलब्ध हैं। हालांकि, किडनी और लिवर से जुड़े कुछ मरीजों को दूसरे अस्पतालों में भेजना पड़ता है। अस्पताल का हार्ट सेंटर भी बंद बताया गया है।

रिपोर्ट के मुताबिक, विशेषज्ञ डॉक्टरों के 55 स्वीकृत पदों में से 51 भरे हुए हैं और पांच कंसल्टेंट भी अस्पताल में सेवाएं दे रहे हैं। इसके बावजूद अस्पताल में रेडियोलॉजिस्ट, न्यूरोलॉजिस्ट और मनोचिकित्सक उपलब्ध नहीं हैं।

20 बेड की इमरजेंसी में रोज पहुंचते हैं करीब 100 मरीज

अस्पताल के इमरजेंसी विभाग में केवल 20 बेड हैं, जबकि यहां प्रतिदिन लगभग 100 मरीज पहुंचते हैं। इनमें से करीब 10 मरीजों को दिल्ली या अन्य अस्पतालों में रेफर किया जाता है। सीमित बेड और कर्मचारियों के कारण आपातकालीन सेवाओं पर दबाव बना हुआ है।

छह बेड वाले आईसीयू में भी विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी बताई गई है। कुछ उपकरणों के खराब होने की शिकायतें भी सामने आई हैं। इसके अलावा मरीजों और उनके परिजनों ने अस्पताल में गंदगी और बदबूदार शौचालयों को लेकर भी चिंता जताई है।

26 में से करीब 11 एंबुलेंस सेवा से बाहर

अस्पताल में लगभग 26 एंबुलेंस होने के बावजूद करीब 11 एंबुलेंस काम नहीं कर रही हैं। एंबुलेंस चालकों के 56 स्वीकृत पदों में से केवल 33 पर कर्मचारी तैनात हैं। ऐसे में मरीजों को समय पर परिवहन सुविधा उपलब्ध कराने में मुश्किलें आ सकती हैं।

नर्सिंग स्टाफ की कमी भी एक बड़ी समस्या है। अस्पताल को लगभग 90 नर्सों की जरूरत है, लेकिन यहां केवल 56 नर्सें कार्यरत हैं। इमरजेंसी विभाग में प्रत्येक शिफ्ट के दौरान करीब दो नर्सों की तैनाती बताई गई है।

अल्ट्रासाउंड सुविधा भी सीमित

अस्पताल में अल्ट्रासाउंड की सुविधा केवल गर्भवती महिलाओं के लिए और सप्ताह में तीन दिन उपलब्ध होने की जानकारी दी गई है। रिपोर्ट के अनुसार, सॉफ्टवेयर संबंधी खराबी के कारण अल्ट्रासाउंड मशीन करीब तीन दिनों से बंद थी।

अस्पताल के अलावा पाली, कौराली, तिगांव और खेड़ी कलां के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में भी सुविधाओं की कमी सामने आई है। कुछ केंद्रों पर एक्स-रे और अल्ट्रासाउंड मशीनें खराब होने की बात कही गई है।

स्वास्थ्य सुविधाओं में सुधार की मांग

स्थानीय विधायक विपुल गोयल ने कहा कि अस्पताल की आवश्यकताओं के बारे में राज्य सरकार को पहले ही अवगत कराया जा चुका है। वहीं, कांग्रेस के वरिष्ठ नेता करण दलाल ने कहा कि फरीदाबाद के अलावा पलवल और मेवात के मरीज भी इस अस्पताल में इलाज के लिए आते हैं। उन्होंने स्वास्थ्य विभाग से समस्याओं का जल्द समाधान करने की मांग की।

अस्पताल में मरीजों की बढ़ती संख्या को देखते हुए विशेषज्ञ डॉक्टरों और नर्सों की नियुक्ति, खराब एंबुलेंस और उपकरणों की मरम्मत तथा आपातकालीन सुविधाओं को मजबूत करना महत्वपूर्ण है।

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