21 अक्तूबर 2026: पंजाब में नशे की तस्करी और गैंगस्टरों की गतिविधियों को लेकर मुख्यमंत्री भगवंत मान ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर सवाल उठाए हैं। 20 अक्टूबर 2026 को मीडिया से बातचीत के दौरान मान ने केंद्र सरकार से पूछा कि पाकिस्तान से लगती पंजाब की अंतरराष्ट्रीय सीमा के रास्ते नशीले पदार्थों की तस्करी रोकने के लिए पर्याप्त कदम क्यों नहीं उठाए गए। उन्होंने एंटी-ड्रोन सिस्टम लगाने, नशीले पदार्थों की बड़ी खेपों की बरामदगी और गैंगस्टर नेटवर्क पर कार्रवाई को लेकर भी केंद्र से जवाब मांगा।
मुख्यमंत्री की ये टिप्पणियां अमित शाह के पंजाब दौरे के दौरान सामने आईं। शाह ने राज्य में नशे से प्रभावित परिवारों से मुलाकात की थी। इस बीच मान ने आरोप लगाया कि भारतीय जनता पार्टी पंजाब में नशे के मुद्दे का राजनीतिक लाभ लेने की कोशिश कर रही है।
पाकिस्तान सीमा पर नशे की तस्करी का मुद्दा उठाया
मुख्यमंत्री भगवंत मान ने कहा कि पंजाब की पाकिस्तान से लगती 532 किलोमीटर लंबी अंतरराष्ट्रीय सीमा पर ड्रोन के जरिए नशीले पदार्थों की तस्करी रोकना एक बड़ी चुनौती है। उन्होंने दावा किया कि वह इस समस्या से निपटने के लिए केंद्र सरकार से कई बार एंटी-ड्रोन सिस्टम लगाने की मांग कर चुके हैं।
मान के अनुसार, उन्होंने केंद्रीय गृह मंत्री और संबंधित अधिकारियों के साथ बैठकों में इस विषय को उठाया था। उन्होंने आरोप लगाया कि आवश्यक व्यवस्था स्थापित करने के लिए केंद्र से अपेक्षित सहयोग नहीं मिला।
मुख्यमंत्री ने सीमा सुरक्षा बल (BSF) की भूमिका का उल्लेख करते हुए कहा कि अंतरराष्ट्रीय सीमा से लगे क्षेत्र में सुरक्षा और निगरानी मजबूत करने की जरूरत है। उन्होंने केंद्र से सवाल किया कि सीमा पार से आने वाले नशीले पदार्थों को रोकने के लिए प्रभावी कदम क्यों नहीं उठाए जा रहे हैं।
हालांकि, एंटी-ड्रोन सिस्टम को लेकर मुख्यमंत्री के आरोपों और केंद्र सरकार की भूमिका पर अंतिम निष्कर्ष के लिए संबंधित पक्षों के आधिकारिक जवाब और उपलब्ध सुरक्षा रिकॉर्ड महत्वपूर्ण होंगे।
गुजरात में 2,200 किलो हेरोइन का मामला उठाया
भगवंत मान ने गुजरात में 2,200 किलोग्राम हेरोइन की बरामदगी से जुड़े मामले का भी उल्लेख किया। उन्होंने सवाल किया कि इतनी बड़ी मात्रा में नशीले पदार्थों की जब्ती के बाद उनके निपटारे और आगे की कार्रवाई को लेकर क्या कदम उठाए गए।
मान ने इस मामले में नशीले पदार्थों के चूहों द्वारा खा लिए जाने संबंधी कथित स्पष्टीकरण पर भी सवाल उठाए। उन्होंने केंद्र सरकार से नशीले पदार्थों की तस्करी के स्रोतों पर कार्रवाई करने और ऐसी घटनाओं की जवाबदेही तय करने की मांग की।
मुख्यमंत्री ने गुजरात के कांडला बंदरगाह से नशीले पदार्थों की बड़ी खेपों की बरामदगी का भी जिक्र किया। उनका कहना था कि देश में नशीले पदार्थों की आपूर्ति रोकने के लिए केवल राज्यों में कार्रवाई पर्याप्त नहीं है, बल्कि तस्करी के स्रोतों और परिवहन नेटवर्क पर भी प्रभावी निगरानी जरूरी है।
इन मामलों पर मान की टिप्पणियां केंद्र सरकार की नशीले पदार्थों की रोकथाम संबंधी नीतियों पर राजनीतिक सवालों के रूप में सामने आईं।
अकाली-भाजपा सरकार के कार्यकाल का भी किया जिक्र
मुख्यमंत्री ने पंजाब में 2007 से 2017 के बीच रही शिरोमणि अकाली दल और भाजपा की गठबंधन सरकार का उल्लेख करते हुए पूछा कि उस समय राज्य में नशे की समस्या बढ़ने पर प्रभावी कार्रवाई क्यों नहीं की गई।
मान ने कहा कि केंद्र में भाजपा के नेतृत्व वाली सरकार बनने के बाद भी नशीले पदार्थों की तस्करी को लेकर सवाल उठते रहे। उन्होंने आरोप लगाया कि नशे के कारोबार से जुड़े मामलों में प्रभावशाली लोगों के नाम सामने आने के बावजूद पर्याप्त कार्रवाई नहीं हुई।
मुख्यमंत्री ने पूर्व मंत्री बिक्रम सिंह मजीठिया से जुड़े मामले की जांच का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने सवाल किया कि पिछली गठबंधन सरकार के दौरान CBI जांच की मांगों पर कार्रवाई क्यों नहीं हुई।
ये आरोप मुख्यमंत्री की ओर से लगाए गए राजनीतिक दावे हैं। संबंधित व्यक्तियों और दलों की जवाबदेही का निर्धारण तथ्यों, आधिकारिक रिकॉर्ड और कानूनी प्रक्रिया के आधार पर किया जाना चाहिए।
हरियाणा और राजस्थान में गैंगस्टरों की गतिविधियों पर सवाल
भगवंत मान ने गैंगस्टरों की गतिविधियों को लेकर भी भाजपा पर निशाना साधा। उन्होंने हरियाणा और राजस्थान का उल्लेख करते हुए कहा कि संगठित अपराध और गैंगस्टर नेटवर्क की समस्या केवल पंजाब तक सीमित नहीं है।
मुख्यमंत्री ने मुंबई में एक फिल्म अभिनेता से जुड़े गोलीबारी मामले का भी जिक्र किया। उन्होंने इस घटना में गिरफ्तार किए गए आरोपियों और उनके कथित संबंधों को लेकर सवाल उठाए तथा कहा कि दूसरे राज्यों में आपराधिक नेटवर्क पर भी ध्यान दिया जाना चाहिए।
मान ने गुजरात की साबरमती जेल और दिल्ली की तिहाड़ जेल में बंद कुछ आरोपियों का उल्लेख करते हुए पूछा कि गंभीर अपराधों में शामिल होने का दावा करने वाले लोगों के खिलाफ कार्रवाई और जेलों में उनकी गतिविधियों की निगरानी किस तरह की जा रही है।
उन्होंने केंद्र सरकार से आग्रह किया कि गैंगस्टरों के नेटवर्क पर कार्रवाई करते समय किसी राज्य को राजनीतिक आधार पर निशाना बनाने के बजाय संगठित अपराध के पूरे नेटवर्क पर ध्यान दिया जाए।
NDPS कानून को और सख्त करने की मांग
मुख्यमंत्री ने नशीले पदार्थों की तस्करी पर नियंत्रण के लिए नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रॉपिक सब्सटेंस (NDPS) अधिनियम को मजबूत करने की जरूरत भी बताई।
मान ने कहा कि कई बार गांवों के लोग नशीले पदार्थों की बिक्री करने के आरोपियों की जानकारी पुलिस को देते हैं, लेकिन कानूनी प्रक्रिया में राहत मिलने के बाद आरोपी दोबारा क्षेत्र में पहुंच जाते हैं। उन्होंने केंद्र से कानून में आवश्यक संशोधन करने और नशे के कारोबार में शामिल लोगों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित करने की मांग की।
उनके अनुसार, नशे की समस्या से निपटने के लिए पंजाब सरकार, केंद्र सरकार, सुरक्षा एजेंसियों और पुलिस के बीच बेहतर समन्वय आवश्यक है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि पंजाब सरकार नशे के खिलाफ अपना अभियान जारी रखेगी और तस्करी के खिलाफ कार्रवाई को तेज किया जाएगा।
नशे के मुद्दे पर केंद्र और राज्य के बीच बढ़ी बहस
अमित शाह के पंजाब दौरे और भगवंत मान के बयानों के बाद नशे की तस्करी, सीमा सुरक्षा और गैंगस्टरों के खिलाफ कार्रवाई राज्य की राजनीति में प्रमुख मुद्दे बने रहे।
एक ओर केंद्र सरकार और भाजपा पंजाब में नशे की समस्या को लेकर राज्य सरकार की भूमिका पर सवाल उठाती रही हैं, वहीं मुख्यमंत्री मान ने सीमा सुरक्षा, नशीले पदार्थों की आपूर्ति के स्रोत और दूसरे राज्यों में संगठित अपराध के नेटवर्क पर कार्रवाई की जरूरत पर जोर दिया।
पंजाब में नशे की समस्या से निपटने के लिए सीमा पार तस्करी रोकना, वित्तीय नेटवर्क की जांच करना, स्थानीय स्तर पर नशे की आपूर्ति पर कार्रवाई करना और प्रभावित लोगों को उपचार उपलब्ध कराना महत्वपूर्ण पहलू हैं।
अब इस मुद्दे पर केंद्र और राज्य सरकार के बीच सहयोग, सीमा पर निगरानी व्यवस्था और तस्करी के मामलों में प्रभावी कानूनी कार्रवाई की भूमिका महत्वपूर्ण होगी। मुख्यमंत्री के सवालों के साथ नशे के खिलाफ कार्रवाई की जिम्मेदारी और उसके परिणामों पर सार्वजनिक बहस भी तेज हुई है।
