21 अक्तूबर 2026: पंजाब में आदत डालने वाली दवाओं और नशीली गोलियों के कथित दुरुपयोग पर रोक लगाने के लिए पुलिस ने केंद्र सरकार से कानून में संशोधन की मांग की है। पंजाब पुलिस चाहती है कि कुछ ऐसी दवाओं की अवैध बिक्री और दुरुपयोग से जुड़े मामलों में पुलिस को भी कार्रवाई करने के अधिकार दिए जाएं, जिन पर फिलहाल मुख्य रूप से ड्रग इंस्पेक्टर कार्रवाई करते हैं। इसके साथ ही कुछ आदत डालने वाली दवाओं को नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रॉपिक सब्सटेंस (NDPS) कानून की सूची में शामिल करने की मांग भी उठाई गई है।
पंजाब के पुलिस महानिदेशक (DGP) गौरव यादव ने बुधवार को पुलिस स्मृति दिवस के कार्यक्रम के दौरान यह मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि राज्य में फार्मास्युटिकल दवाओं के दुरुपयोग की समस्या से निपटने के लिए केंद्र और अन्य राज्यों के साथ मिलकर कदम उठाने की जरूरत है।
Drugs and Cosmetics Act में क्या बदलाव चाहती है पुलिस?
पंजाब पुलिस का कहना है कि कुछ दवाओं की अवैध बिक्री पर प्रभावी कार्रवाई के लिए मौजूदा कानूनी व्यवस्था को और मजबूत करने की जरूरत है। पुलिस चाहती है कि Drugs and Cosmetics Act, 1940 में संशोधन किया जाए, ताकि ऐसे मामलों में पुलिस को भी कार्रवाई करने के अधिकार मिल सकें, जो अभी ड्रग इंस्पेक्टरों के अधिकार क्षेत्र में आते हैं।
DGP गौरव यादव के अनुसार, इस मुद्दे को केंद्र सरकार के सामने उठाया गया है। पंजाब पुलिस ने राजस्थान, गुजरात, हिमाचल प्रदेश, उत्तर प्रदेश और हरियाणा के पुलिस प्रमुखों के साथ भी इस विषय पर बातचीत की है, ताकि दवाओं की आपूर्ति और अवैध बिक्री से जुड़े मामलों में राज्यों के बीच बेहतर समन्वय बनाया जा सके।
कुछ दवाओं को NDPS कानून के दायरे में लाने की मांग
पुलिस की मांग केवल Drugs and Cosmetics Act तक सीमित नहीं है। कुछ ऐसी दवाओं को भी NDPS कानून की सूची में शामिल करने की मांग की जा रही है, जिनका इस्तेमाल नशे के लिए किए जाने की शिकायतें सामने आती रही हैं।
हालांकि, किसी दवा को नियंत्रित करने, उसकी बिक्री के नियम तय करने या उसे किसी विशेष कानूनी सूची में शामिल करने का फैसला संबंधित कानूनी प्रक्रिया और केंद्र सरकार के अधिकार क्षेत्र के अनुसार होगा। पुलिस की मांग को अभी कानून में लागू हो चुका बदलाव नहीं माना जाना चाहिए।
परविंदर झोटा की हत्या के बाद बढ़ी चिंता
पंजाब में नशीली दवाओं की बिक्री का मुद्दा हाल ही में नशे के खिलाफ आवाज उठाने वाले कार्यकर्ता परविंदर सिंह झोटा की हत्या के बाद फिर चर्चा में आया है। रिपोर्टों के अनुसार, मानसा में एक केमिस्ट द्वारा गोली मारकर उनकी हत्या किए जाने के मामले ने आदत डालने वाली दवाओं की उपलब्धता और कथित अवैध बिक्री को लेकर चिंता बढ़ाई है।
इस मामले में पंजाब सरकार ने परिवार की मांग के बाद जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) को सौंपने का फैसला किया था। इस घटना के बाद राज्य में केमिस्ट दुकानों की जांच और दवाओं की बिक्री से जुड़े नियमों के पालन पर भी जोर दिया गया है।
पंजाब में दवाओं की बिक्री पर पहले भी हुई कार्रवाई
दवाओं के नियमों का उल्लंघन रोकने के लिए पंजाब के स्वास्थ्य विभाग की ड्रग्स विंग पहले भी कार्रवाई कर चुकी है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, 1 अप्रैल 2025 से 30 सितंबर 2026 के बीच 16,788 निरीक्षण किए गए। इस अवधि में 520 केमिस्टों के लाइसेंस निलंबित किए गए, जबकि 22 लाइसेंस रद्द किए गए। नियमों के उल्लंघन से जुड़े मामलों में 214 लाइसेंसधारी और बिना लाइसेंस वाले प्रतिष्ठानों से लगभग 20.6 करोड़ रुपये मूल्य की दवाएं जब्त की गईं।
ये आंकड़े बताते हैं कि राज्य में दवाओं की अवैध बिक्री रोकने के लिए नियामक कार्रवाई की जा रही है। हालांकि, पुलिस की ताजा मांग का उद्देश्य कानून के तहत कार्रवाई करने वाली एजेंसियों की भूमिका और अधिकारों को लेकर बदलाव कराना है।
प्रेगाबालिन को लेकर भी उठाया गया मुद्दा
पंजाब में प्रेगाबालिन जैसी दवाओं के दुरुपयोग को लेकर भी चिंता जताई गई है। प्रेगाबालिन का इस्तेमाल कुछ चिकित्सकीय स्थितियों में किया जाता है, लेकिन इसके गलत इस्तेमाल को रोकना स्वास्थ्य और नियामक एजेंसियों के लिए चुनौती बना हुआ है।
राज्य सरकार के मुताबिक, केंद्र सरकार ने 13 मई 2026 की अधिसूचना के जरिए प्रेगाबालिन को Drugs Rules, 1945 की Schedule H1 में शामिल किया है। संबंधित प्रावधान 12 नवंबर 2026 से लागू होने के लिए निर्धारित है। Schedule H1 के तहत आने वाली दवाओं की बिक्री और रिकॉर्ड रखने पर विशेष नियम लागू होते हैं।
आगे क्या होगा?
पंजाब पुलिस चाहती है कि केंद्र सरकार कानून में आवश्यक बदलावों पर विचार करे, ताकि आदत डालने वाली दवाओं की अवैध बिक्री और उनके दुरुपयोग के मामलों में कार्रवाई अधिक प्रभावी हो सके। इसके साथ ही पड़ोसी राज्यों के साथ समन्वय बढ़ाने पर भी जोर दिया जा रहा है।
फिलहाल Drugs and Cosmetics Act में पुलिस को अतिरिक्त अधिकार देने की मांग प्रस्ताव के स्तर पर है। आगे की स्थिति केंद्र सरकार के फैसले और संबंधित कानूनी प्रक्रिया पर निर्भर करेगी।
