21 अक्तूबर 2026: पंजाब के मानसा जिले में नशे के खिलाफ आवाज उठाने वाले सामाजिक कार्यकर्ता परविंदर सिंह झोटा की हत्या के मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने बुधवार, 21 अक्टूबर 2026 को नई FIR दर्ज कर जांच अपने हाथ में ले ली है। मामले में मेडिकल स्टोर संचालक अश्वनी कुमार और अन्य अज्ञात लोगों को आरोपी बनाया गया है। वहीं, झोटा का पोस्टमार्टम चंडीगढ़ स्थित पोस्ट ग्रेजुएट इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल एजुकेशन एंड रिसर्च (PGIMER) में विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम द्वारा किया जाएगा। चंडीगढ़ में मजिस्ट्रेट की निगरानी में जांच संबंधी औपचारिकताएं भी पूरी की जाएंगी। यह कदम झोटा के परिवार की प्रमुख मांगों में शामिल था। <Cite refs={[“turn418401search0″,”turn418401search1″,”turn418401search2”]}/>
CBI ने औपचारिक रूप से संभाली जांच
CBI ने झोटा हत्याकांड में पंजाब पुलिस की ओर से पहले दर्ज मामले को अपने यहां दोबारा दर्ज कर जांच शुरू की है। मूल FIR 14 अक्टूबर को मानसा के सिटी-2 पुलिस थाने में दर्ज की गई थी। इसके बाद पंजाब सरकार ने केंद्रीय एजेंसी को मामले की जांच सौंपने की प्रक्रिया पूरी की।
पंजाब के गृह विभाग ने 20 अक्टूबर को CBI को राज्य में इस मामले की जांच करने की सहमति दी थी। इसके बाद केंद्र सरकार के कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (DoPT) ने 21 अक्टूबर को संबंधित अधिसूचना जारी कर एजेंसी के अधिकार क्षेत्र का विस्तार किया।
CBI की चंडीगढ़ इकाई के अधिकारियों ने मामले से जुड़े दस्तावेज, पुलिस रिकॉर्ड और जब्त की गई सामग्री अपने कब्जे में लेने की प्रक्रिया शुरू की। एजेंसी की टीम मानसा पहुंचकर जांच कर रही है। <Cite refs={[“turn418401search0″,”turn418401search3″,”turn418401search4”]}/>
FIR में हत्या और आपराधिक साजिश से जुड़ी धाराएं
CBI ने अपनी FIR में भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 की धारा 103(1), 109, 118(1), 61(2) और 3(5) के तहत प्रावधान शामिल किए हैं। ये धाराएं हत्या, हत्या के प्रयास, खतरनाक हथियार से चोट पहुंचाने, आपराधिक साजिश और साझा मंशा जैसे आरोपों से संबंधित हैं। इसके अलावा शस्त्र अधिनियम, 1959 की धाराएं 25 और 27 भी लगाई गई हैं।
FIR में मेडिकल स्टोर संचालक अश्वनी कुमार और अन्य अज्ञात लोगों के नाम शामिल हैं। झोटा के पिता भीम सिंह इस मामले में शिकायतकर्ता हैं।
अब CBI घटनाक्रम, उपलब्ध साक्ष्यों और संबंधित लोगों के बयानों की जांच करेगी। FIR में लगाए गए आरोपों की पुष्टि जांच और न्यायिक प्रक्रिया के दौरान होनी है। <Cite refs={[“turn418401search0″,”turn418401search9”]}/>
PGIMER में विशेषज्ञ डॉक्टर करेंगे पोस्टमार्टम
झोटा के पोस्टमार्टम को लेकर परिवार लगातार मांग कर रहा था कि यह प्रक्रिया चंडीगढ़ PGIMER में वरिष्ठ डॉक्टरों के पैनल से कराई जाए। परिवार ने पोस्टमार्टम और अंतिम संस्कार की प्रक्रिया को लेकर अपनी सहमति देने से पहले मामले में निष्पक्ष जांच सहित कई मांगें रखी थीं।
अब CBI ने जानकारी दी है कि पोस्टमार्टम PGIMER में विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम करेगी। इसके साथ ही चंडीगढ़ में मजिस्ट्रेट द्वारा जांच संबंधी औपचारिकताएं पूरी की जाएंगी।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट से मृत्यु से जुड़े चिकित्सकीय तथ्यों और चोटों की प्रकृति के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी मिल सकती है। हालांकि, रिपोर्ट के निष्कर्ष सामने आने से पहले किसी भी चिकित्सकीय तथ्य के बारे में अंतिम दावा करना उचित नहीं होगा। <Cite refs={[“turn418401search1″,”turn418401search2″,”turn418401search6”]}/>
अमित शाह की मुलाकात के बाद तेज हुई कार्रवाई
इस मामले में जांच का जिम्मा CBI को सौंपने की मांग लगातार उठ रही थी। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने मानसा में झोटा के परिवार से मुलाकात की थी और मामले की जांच को लेकर भरोसा दिलाया था।
इसके बाद पंजाब सरकार की ओर से CBI जांच का रास्ता साफ हुआ। केंद्रीय एजेंसी की टीम मंगलवार रात मानसा पहुंची और पुलिस से मामले की फाइलें तथा संबंधित दस्तावेज मांगे। बुधवार को FIR दर्ज होने के साथ जांच औपचारिक रूप से CBI के पास आ गई।
परिवार की मांगों में केंद्रीय एजेंसी से जांच और चंडीगढ़ में विशेषज्ञ डॉक्टरों से पोस्टमार्टम कराना प्रमुख था। अब इन दोनों मांगों पर कार्रवाई शुरू होने से मामले की जांच अगले चरण में पहुंच गई है। <Cite refs={[“turn418401search3″,”turn418401search4″,”turn418401search7”]}/>
13 अक्टूबर को मेडिकल स्टोर में हुई थी हत्या
परविंदर सिंह झोटा पंजाब में नशे के खिलाफ अभियान चलाने वाले सामाजिक कार्यकर्ता के रूप में जाने जाते थे। वह कथित तौर पर मेडिकल स्टोरों पर नशीली और प्रतिबंधित दवाओं की बिक्री के मुद्दे उठाते थे और सोशल मीडिया पर वीडियो साझा करते थे।
13 अक्टूबर 2026 को मानसा के एक मेडिकल स्टोर में उनकी दुकान के संचालक अश्वनी कुमार के साथ कथित तौर पर बहस हुई। झोटा उस समय फेसबुक पर लाइव प्रसारण कर रहे थे। विवाद के दौरान गोली चलने से उनकी मौत हो गई। घटना में अन्य लोगों के घायल होने की भी खबर सामने आई थी।
पुलिस के अनुसार, घटना के बाद मुख्य आरोपी अश्वनी कुमार पंजाब से बाहर चला गया था और उसे राजस्थान के सालासर से गिरफ्तार किया गया। मामले में अन्य लोगों की भूमिका की भी जांच की जा रही है। <Cite refs={[“turn418401news12″,”turn418401search3″,”turn418401search4”]}/>
नशे के खिलाफ अभियान और सुरक्षा पर उठे सवाल
झोटा की हत्या के बाद पंजाब में नशे की समस्या, कथित अवैध दवा बिक्री और ऐसे मामलों में कार्रवाई को लेकर बहस तेज हुई। उनके परिवार और समर्थकों ने न्याय की मांग करते हुए विरोध प्रदर्शन किए और राज्यव्यापी बंद का आह्वान भी किया था।
इस मामले ने उन सामाजिक कार्यकर्ताओं की सुरक्षा को लेकर भी सवाल खड़े किए हैं, जो नशे के कारोबार या प्रतिबंधित दवाओं की बिक्री जैसे मुद्दों को सार्वजनिक रूप से उठाते हैं। हालांकि, किसी व्यापक नेटवर्क या साजिश की भूमिका की पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी।
CBI अब स्थानीय पुलिस से मिले रिकॉर्ड, उपलब्ध साक्ष्यों, फोरेंसिक सामग्री और संबंधित लोगों के बयानों के आधार पर जांच आगे बढ़ाएगी। पोस्टमार्टम और मजिस्ट्रेट की प्रक्रिया भी मामले के तथ्यों को स्पष्ट करने में महत्वपूर्ण हो सकती है।
फिलहाल, CBI ने FIR दर्ज कर जांच अपने हाथ में ले ली है और झोटा का पोस्टमार्टम चंडीगढ़ PGIMER में विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम द्वारा कराया जाएगा। मामले में आगे की कार्रवाई जांच के निष्कर्षों और कानूनी प्रक्रिया के अनुसार होगी।
