15 अक्तूबर 2026: पंजाब के तरनतारन जिले में सरकारी स्कूलों में शिक्षा की गुणवत्ता और बुनियादी सुविधाओं का जायजा लेने के लिए शिक्षा विभाग की ओर से निरीक्षण किया गया। डिप्टी जिला शिक्षा अधिकारी (प्राथमिक) राजिंदर कौर ने बुधवार को जिले के विभिन्न सरकारी प्राथमिक स्कूलों का दौरा किया। इस दौरान उन्होंने कक्षाओं में जाकर विद्यार्थियों से बातचीत की और उनकी पढ़ाई से जुड़े पहलुओं की समीक्षा की। निरीक्षण का उद्देश्य स्कूलों में शैक्षणिक गतिविधियों और दैनिक व्यवस्थाओं की स्थिति का आकलन करना था।
राजिंदर कौर ने अपने दौरे के दौरान कक्का कंडियाला, थारू और फतेहचक के सरकारी प्राथमिक स्कूलों का निरीक्षण किया। इसके अलावा उन्होंने मल्लियां स्थित ब्लॉक प्राथमिक शिक्षा कार्यालय का भी दौरा किया। इन स्थानों पर उन्होंने स्कूलों में चल रही शैक्षणिक गतिविधियों और प्रशासनिक व्यवस्थाओं की जानकारी ली। निरीक्षण के दौरान विद्यार्थियों और स्कूल कर्मचारियों के साथ बातचीत कर शिक्षा से जुड़े विभिन्न मुद्दों को समझने का प्रयास किया गया।
कक्षाओं में विद्यार्थियों से बातचीत करते हुए राजिंदर कौर ने पढ़ाई के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल डिग्री हासिल करना नहीं, बल्कि सोचने-समझने की क्षमता विकसित करना भी है। उन्होंने विद्यार्थियों को बड़े सपने देखने और उन्हें पूरा करने के लिए मेहनत करने के लिए प्रेरित किया। उनके अनुसार, शिक्षा बच्चों को ज्ञान देने के साथ-साथ उन्हें जीवन में सही निर्णय लेने और अपनी क्षमताओं को पहचानने में भी मदद करती है।
निरीक्षण के दौरान स्कूलों की साफ-सफाई की व्यवस्था भी जांची गई। स्कूल परिसर में स्वच्छता बनाए रखना विद्यार्थियों के स्वास्थ्य और सुरक्षित वातावरण के लिए जरूरी है। अधिकारियों ने यह देखा कि स्कूलों में साफ-सफाई का ध्यान रखा जा रहा है या नहीं और विद्यार्थियों को पढ़ाई के लिए उचित वातावरण उपलब्ध है या नहीं।
इसके साथ ही मिड-डे मील की तैयारियों का भी जायजा लिया गया। सरकारी स्कूलों में मिड-डे मील योजना का उद्देश्य बच्चों को पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराना और स्कूलों में उनकी नियमित उपस्थिति को प्रोत्साहित करना है। भोजन की तैयारी और उससे संबंधित व्यवस्थाओं का निरीक्षण यह सुनिश्चित करने के लिए महत्वपूर्ण है कि विद्यार्थियों को निर्धारित मानकों के अनुरूप भोजन मिले।
राजिंदर कौर ने शिक्षकों की डायरियों और विद्यार्थियों की नोटबुक की भी जांच की। इन दस्तावेजों से शिक्षण कार्य की योजना, कक्षा में पढ़ाए जा रहे विषयों और विद्यार्थियों की शैक्षणिक प्रगति के बारे में जानकारी मिलती है। नोटबुक की जांच से यह समझने में मदद मिलती है कि विद्यार्थी नियमित रूप से अपना काम पूरा कर रहे हैं या नहीं और पढ़ाई में उन्हें किन क्षेत्रों में अतिरिक्त सहायता की जरूरत हो सकती है।
निरीक्षण के दौरान उपस्थिति रजिस्टर भी जांचे गए। विद्यार्थियों की नियमित उपस्थिति शिक्षा व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है, क्योंकि लगातार स्कूल आने से बच्चों को पढ़ाई समझने और पाठ्यक्रम पूरा करने में मदद मिलती है। उपस्थिति रिकॉर्ड की समीक्षा से स्कूलों में विद्यार्थियों की उपस्थिति से जुड़ी स्थिति का आकलन किया जा सकता है।
सरकारी स्कूलों में नियमित निरीक्षण का उद्देश्य केवल कमियों की पहचान करना नहीं, बल्कि शिक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए आवश्यक कदम उठाना भी है। विद्यार्थियों से सीधे बातचीत करने से अधिकारियों को उनके अनुभवों और जरूरतों को समझने का अवसर मिलता है। इसी तरह शिक्षकों की डायरियों, नोटबुक और उपस्थिति रजिस्टर की जांच से शैक्षणिक गतिविधियों की निगरानी करने में सहायता मिलती है।
तरनतारन जिले में किए गए इस निरीक्षण के दौरान शिक्षा, स्वच्छता, मिड-डे मील और स्कूल रिकॉर्ड से संबंधित व्यवस्थाओं पर ध्यान दिया गया। अधिकारियों के स्कूलों में पहुंचने और विद्यार्थियों से बातचीत करने से बच्चों को अपनी पढ़ाई के प्रति प्रोत्साहित करने का अवसर भी मिला।
कुल मिलाकर, डिप्टी जिला शिक्षा अधिकारी राजिंदर कौर का यह दौरा सरकारी स्कूलों में शैक्षणिक गुणवत्ता और दैनिक व्यवस्थाओं की समीक्षा का हिस्सा था। उन्होंने विद्यार्थियों को मेहनत करने और बड़े लक्ष्य निर्धारित करने के लिए प्रेरित किया, जबकि स्कूलों में साफ-सफाई, मिड-डे मील, शिक्षकों की डायरियों, विद्यार्थियों की नोटबुक और उपस्थिति रजिस्टर की जांच की।
