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फगवाड़ा SDM ने पराली जलाने वाले हॉटस्पॉट गांव खलवारा का किया दौरा

15 अक्तूबर 2026: पंजाब के कपूरथला जिले के फगवाड़ा उपमंडल में पराली जलाने की घटनाओं को रोकने के लिए प्रशासन ने निगरानी तेज कर दी है। इसी कड़ी में फगवाड़ा की उपमंडल मजिस्ट्रेट (SDM) डॉ. नवजोत शर्मा ने पराली जलाने के संवेदनशील क्षेत्र खलवारा गांव का दौरा किया। उनके साथ कृषि अधिकारी परमजीत सिंह भी मौजूद रहे। अधिकारियों ने खेतों में फसल कटाई की स्थिति का जायजा लिया और किसानों को धान की पराली के उचित प्रबंधन के लिए जागरूक किया।

SDM ने खलवारा के साथ ढक्क पंडोरी और बिशनपुर गांवों का भी दौरा किया। इस दौरान उन्होंने खेतों में चल रही कंबाइन हार्वेस्टर मशीनों का निरीक्षण किया। उन्होंने सुनिश्चित किया कि फसल कटाई के दौरान मशीनों में सुपर स्ट्रॉ मैनेजमेंट सिस्टम (SMS) लगा हो, ताकि धान की कटाई के बाद खेत में बचने वाले अवशेषों का उचित प्रबंधन किया जा सके।

डॉ. नवजोत शर्मा ने कंबाइन हार्वेस्टर मालिकों और ऑपरेटरों को निर्देश दिया कि SMS उपकरण के बिना किसी भी मशीन को खेतों में काम करने की अनुमति न दी जाए। इस प्रणाली से धान की कटाई के बाद बचे अवशेषों को बेहतर तरीके से संभालने में मदद मिलती है। इससे किसानों के लिए पराली को खेत में ही प्रबंधित करना आसान हो सकता है और उसे आग लगाने की जरूरत कम हो सकती है।

दौरे के दौरान SDM ने यह भी देखा कि कुछ किसान फसल अवशेष प्रबंधन मशीनों की मदद से पराली का निपटारा कर रहे थे। प्रशासन ने इन किसानों के प्रयासों की सराहना की और अन्य किसानों से भी इसी तरह पर्यावरण के अनुकूल तरीके अपनाने की अपील की। अधिकारियों का कहना है कि पराली प्रबंधन के लिए उपलब्ध मशीनरी का इस्तेमाल बढ़ाकर खेतों में आग लगाने की घटनाओं को रोका जा सकता है।

डॉ. शर्मा ने किसानों को पराली जलाने से होने वाले नुकसान के बारे में जानकारी दी। उन्होंने कहा कि धान की पराली जलाने से वायु प्रदूषण बढ़ता है, जिसका असर लोगों के स्वास्थ्य पर पड़ सकता है। इसके अलावा खेतों में आग लगाने से मिट्टी में मौजूद उपयोगी जीव और जैविक पदार्थ नष्ट हो सकते हैं। इससे मिट्टी की गुणवत्ता और उसकी उपजाऊ क्षमता प्रभावित होने का खतरा रहता है।

पराली प्रबंधन के लिए किसान इन-सीटू और एक्स-सीटू जैसे तरीकों का इस्तेमाल कर सकते हैं। इन-सीटू प्रबंधन में मशीनों की सहायता से फसल अवशेषों को खेत में ही संभाला जाता है, जबकि एक्स-सीटू प्रबंधन में पराली को खेत से बाहर निकालकर उसके दूसरे उपयोग के लिए भेजा जाता है। इन विकल्पों को अपनाने से पराली जलाने पर निर्भरता कम की जा सकती है।

इसी बीच, जालंधर के उपायुक्त आकाश बंसल ने भी नोडल और क्लस्टर अधिकारियों को निर्देश दिया कि पराली जलाने के खिलाफ जागरूकता अभियान गांव-गांव तक पहुंचाया जाए। उन्होंने अधिकारियों से किसानों के साथ लगातार संपर्क बनाए रखने और उन्हें फसल अवशेषों के उचित प्रबंधन के लिए प्रेरित करने को कहा। प्रशासन ने अगले 15 दिनों के दौरान संबंधित क्षेत्रों में अधिकारियों के नियमित दौरे को प्राथमिकता देने पर जोर दिया है।

धान की कटाई के मौसम में पराली जलाने की घटनाओं को रोकना पंजाब प्रशासन के लिए महत्वपूर्ण चुनौती है। दीपावली से पहले और बाद की अवधि में खेतों में आग लगने की आशंका को देखते हुए प्रशासन निगरानी, जागरूकता और मशीनरी के इस्तेमाल पर ध्यान दे रहा है।

फगवाड़ा प्रशासन ने किसानों से अपील की है कि वे पर्यावरण संरक्षण में सहयोग करें और पराली को जलाने के बजाय वैज्ञानिक तरीकों से उसका प्रबंधन करें। अधिकारियों के अनुसार, किसानों, कृषि विभाग और प्रशासन के संयुक्त प्रयासों से वायु प्रदूषण को कम करने तथा मिट्टी की सेहत को सुरक्षित रखने में मदद मिल सकती है।

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