• Wed. Oct 14th, 2026

अमृतसर GNDU यूथ फेस्ट में गिद्धा, लोकगीत और रंगोली ने बिखेरे रंग

14 अक्तूबर 2026: गुरु नानक देव यूनिवर्सिटी (GNDU) में तीन दिवसीय जीसीए जोन यूथ फेस्टिवल का आयोजन किया जा रहा है। यह महोत्सव अमृतसर शहर की स्थापना की 450वीं वर्षगांठ को समर्पित है। 13 से 15 अक्टूबर तक चलने वाले इस कार्यक्रम में विभिन्न कॉलेजों के विद्यार्थी संगीत, नृत्य, साहित्य, ललित कला, थिएटर और पारंपरिक हस्तकलाओं से जुड़ी प्रतियोगिताओं में हिस्सा ले रहे हैं। गिद्धा, लोक गायन, रंगोली और अन्य सांस्कृतिक गतिविधियों के माध्यम से विद्यार्थियों ने पंजाब की समृद्ध विरासत और अपनी रचनात्मक प्रतिभा का प्रदर्शन किया।

अमृतसर की 450वीं वर्षगांठ को समर्पित महोत्सव

विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर करमजीत सिंह ने यूथ फेस्टिवल का उद्घाटन किया। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजन विद्यार्थियों में रचनात्मकता, आत्मविश्वास और सांस्कृतिक जागरूकता विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने युवाओं को पंजाब की सांस्कृतिक और साहित्यिक विरासत से जुड़े रहने के साथ-साथ नए विचारों को अपनाने के लिए भी प्रोत्साहित किया।

इस बार महोत्सव को अमृतसर की 450वीं वर्षगांठ के साथ जोड़कर आयोजित किया जा रहा है। इसका उद्देश्य शहर की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पहचान को नई पीढ़ी तक पहुंचाना है। कार्यक्रम में विद्यार्थियों को अपनी प्रतिभा दिखाने के साथ-साथ पंजाब की लोक परंपराओं को समझने और उन्हें आगे बढ़ाने का अवसर मिल रहा है।

विश्वविद्यालय की सीनेट सदस्य गुरजोत कौर हमदर्द उद्घाटन समारोह में विशेष अतिथि के रूप में शामिल हुईं। उन्होंने विद्यार्थियों की प्रतिभा को प्रोत्साहित करने और पारंपरिक सांस्कृतिक मूल्यों को सुरक्षित रखने के लिए विश्वविद्यालय के प्रयासों की सराहना की।

गिद्धा और लोक गायन ने बढ़ाई महोत्सव की रौनक

यूथ फेस्टिवल के दौरान पंजाबी लोक संस्कृति से जुड़ी विभिन्न प्रस्तुतियां आकर्षण का केंद्र बनी हुई हैं। गिद्धा, वार गायन, कविशरी और कोरियोग्राफी जैसी प्रतियोगिताओं में विद्यार्थियों को अपनी कला दिखाने का मौका मिल रहा है। इन प्रस्तुतियों के जरिए पंजाब की लोक परंपराओं, संगीत और सांस्कृतिक अभिव्यक्ति को मंच प्रदान किया जा रहा है।

कार्यक्रम में शास्त्रीय गायन और वाद्य संगीत से संबंधित प्रतियोगिताएं भी आयोजित की जा रही हैं। इसके अलावा समूह गायन, शबद-भजन, गीत और गजल तथा लोकगीतों से जुड़ी गतिविधियां भी महोत्सव का हिस्सा हैं।

इन प्रतियोगिताओं में विभिन्न कॉलेजों के विद्यार्थी अपनी तैयारी और प्रतिभा के आधार पर हिस्सा ले रहे हैं। आयोजन का उद्देश्य केवल प्रतियोगिता तक सीमित नहीं है, बल्कि विद्यार्थियों को एक-दूसरे की कला और सांस्कृतिक परंपराओं को समझने का अवसर देना भी है।

रंगोली और पारंपरिक कलाओं में दिखी रचनात्मकता

महोत्सव में ललित कला और पारंपरिक हस्तकलाओं से जुड़ी प्रतियोगिताएं भी आयोजित की जा रही हैं। रंगोली, फुलकारी, पोस्टर निर्माण, मौके पर चित्रकारी, कोलाज, मिट्टी से आकृतियां बनाने, कार्टून बनाने और मौके पर फोटोग्राफी जैसी गतिविधियों में विद्यार्थियों ने हिस्सा लिया।

इन प्रतियोगिताओं के माध्यम से विद्यार्थियों को अपनी कल्पनाशीलता और कलात्मक कौशल प्रदर्शित करने का अवसर मिलता है। रंगों, डिजाइनों और पारंपरिक कला रूपों के जरिए युवा कलाकार अपनी रचनात्मक सोच को सामने रख रहे हैं।

इसके साथ ही मेहंदी, टोकरी बनाने, छिक्कू बनाने, पीढ़ी बुनने और पंखे यानी पाखी बनाने जैसी पारंपरिक कलाओं से संबंधित प्रतियोगिताएं भी कार्यक्रम का हिस्सा हैं। इन गतिविधियों का उद्देश्य ऐसी लोक कलाओं को बढ़ावा देना है, जो पंजाब की सांस्कृतिक पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं।

नाटक और साहित्यिक प्रतियोगिताएं भी शामिल

यूथ फेस्टिवल में नाटक और साहित्य से संबंधित प्रतियोगिताओं को भी स्थान दिया गया है। विद्यार्थियों के लिए माइम, मिमिक्री, स्किट, एकांकी नाटक और वेशभूषा प्रदर्शन जैसी गतिविधियां आयोजित की जा रही हैं। इन प्रस्तुतियों के जरिए युवा कलाकार सामाजिक विषयों और रोजमर्रा के अनुभवों को रचनात्मक तरीके से सामने रख सकते हैं।

इसके अलावा भाषण, कविता, वाद-विवाद, प्रश्नोत्तरी और पंजाबी तथा हिंदी भाषा से संबंधित प्रतियोगिताएं भी आयोजित की जा रही हैं। इससे विद्यार्थियों को अपनी अभिव्यक्ति, भाषा और संवाद कौशल विकसित करने का अवसर मिलता है।

15 अक्टूबर को होगा समापन

विश्वविद्यालय के युवा कल्याण विभाग के निदेशक प्रोफेसर अमनदीप सिंह के अनुसार, तीन दिवसीय महोत्सव विश्वविद्यालय परिसर के चार प्रमुख स्थानों पर आयोजित किया जा रहा है। इनमें दशमेश ऑडिटोरियम, गोल्डन जुबली कन्वेंशन सेंटर, संगत हॉल और कॉन्फ्रेंस हॉल शामिल हैं।

महोत्सव के अंतिम दिन 15 अक्टूबर को सामान्य नृत्य और भांगड़ा प्रतियोगिताएं आयोजित की जाएंगी। इसके साथ ही पश्चिमी एकल गायन, समूह गायन और वाद्य संगीत से जुड़ी प्रतियोगिताएं भी होंगी।

कुल मिलाकर, GNDU का यह यूथ फेस्टिवल विद्यार्थियों की प्रतिभा को मंच देने के साथ-साथ अमृतसर की ऐतिहासिक पहचान और पंजाब की सांस्कृतिक विरासत को प्रोत्साहित करने का प्रयास है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *