14 अक्टूबर 2026: पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान 16 अक्टूबर 2026 को राज्य में चल रहे नशा विरोधी अभियान और कानून-व्यवस्था की स्थिति की समीक्षा करेंगे। इसके लिए फिल्लौर स्थित पंजाब पुलिस अकादमी में उच्चस्तरीय बैठक आयोजित की जाएगी। बैठक में राज्य के वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों, जिला प्रशासन और विभिन्न सरकारी विभागों के प्रतिनिधियों के शामिल होने की उम्मीद है। इसका उद्देश्य नशे के खिलाफ चल रही कार्रवाई की प्रगति का आकलन करना, प्रशासनिक तालमेल को मजबूत बनाना और जिलों में सामने आ रही चुनौतियों पर चर्चा करना है।
द ट्रिब्यून की 14 अक्टूबर की रिपोर्ट के अनुसार, मुख्यमंत्री ने सभी जिलों के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षकों (SSP), उपमंडल मजिस्ट्रेट (SDM) और पुलिस उपाधीक्षकों (DSP) को बैठक में उपस्थित रहने के निर्देश दिए हैं। अधिकारियों से अपने-अपने जिलों में अपराध नियंत्रण के लिए उठाए गए कदमों की जानकारी देने को कहा गया है। हत्या के मामलों की जांच और अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई भी समीक्षा के प्रमुख विषयों में शामिल रहेगी। मुख्यमंत्री ने पुलिस को मानसा में नशा विरोधी कार्यकर्ता परविंदर सिंह झोटा की हत्या के मामले की जांच में तेजी लाने और आरोपियों को जल्द गिरफ्तार करने के निर्देश दिए हैं।
बैठक ऐसे समय में हो रही है, जब मानसा में नशे के खिलाफ आवाज उठाने वाले परविंदर सिंह झोटा की हत्या के बाद राज्य में नशा विरोधी अभियान और कानून-व्यवस्था को लेकर चर्चा तेज हो गई है। झोटा की हत्या के बाद स्थानीय स्तर पर विरोध प्रदर्शन हुए और विपक्षी दलों ने भी सरकार की कार्रवाई पर सवाल उठाए। इस घटना ने नशे के कारोबार के खिलाफ काम करने वाले लोगों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ाई है। हालांकि, रिपोर्टों के मुताबिक 16 अक्टूबर की समीक्षा बैठक की तैयारी हत्या की घटना से पहले ही शुरू हो गई थी। इसलिए इसे केवल इस घटना के बाद बुलाई गई बैठक के रूप में प्रस्तुत करना सही नहीं होगा।
बैठक में सरकार के 60 दिवसीय नशा प्रभावित क्षेत्रों पर केंद्रित अभियान की प्रगति की समीक्षा की जाएगी। इस अभियान के तहत उन इलाकों पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है, जहां नशीले पदार्थों की तस्करी और बिक्री से जुड़ी गतिविधियों को रोकने की जरूरत है। जिला प्रशासन से संबंधित क्षेत्रों के लिए तैयार योजनाओं, पिछले दो सप्ताह में हुई कार्रवाई और उपलब्ध आंकड़ों की जानकारी देने को कहा गया है। अधिकारियों को अपने जिलों में सामने आई प्रमुख समस्याओं और उन्हें दूर करने के प्रस्तावित उपायों पर भी रिपोर्ट प्रस्तुत करनी होगी।
नशा विरोधी अभियान में पुलिस और प्रशासन के बीच बेहतर तालमेल को भी प्राथमिकता दी जाएगी। बैठक के दौरान गांवों और वार्डों में बनाई गई रक्षा समितियों की गतिविधियों की समीक्षा होने की संभावना है। इन समितियों के माध्यम से स्थानीय लोगों से नशे की बिक्री और तस्करी से संबंधित जानकारी प्राप्त करने तथा संदिग्ध गतिविधियों की सूचना प्रशासन तक पहुंचाने पर जोर दिया जाता है। अधिकारियों को इस व्यवस्था की प्रगति और स्थानीय स्तर पर सामने आ रहे अनुभवों के बारे में भी जानकारी साझा करनी होगी।
इसके अलावा, नशे की रोकथाम, जागरूकता, उपचार और पुनर्वास से संबंधित सरकारी विभागों की भूमिका पर भी ध्यान दिया जाएगा। नशे की समस्या से निपटने के लिए केवल पुलिस कार्रवाई ही नहीं, बल्कि स्वास्थ्य सेवाओं, सामाजिक कल्याण और समुदाय की भागीदारी को साथ लेकर चलने की जरूरत होती है। बैठक में विभिन्न विभागों के बीच समन्वय बेहतर करने और सफल पहलों को दूसरे जिलों में अपनाने पर भी चर्चा हो सकती है।
जिला उपायुक्तों (DCs) को बैठक के लिए विस्तृत प्रस्तुतियां तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं। इन प्रस्तुतियों में नशा प्रभावित क्षेत्रों की योजनाएं, हाल के दिनों में हुई प्रगति, सत्यापित आंकड़े, सफल प्रयास और प्रमुख चुनौतियां शामिल होंगी। सरकार का उद्देश्य जिलों में चल रही गतिविधियों की वास्तविक स्थिति समझना और यह देखना है कि तय योजनाओं को जमीन पर किस तरह लागू किया जा रहा है। बैठक में बेहतर प्रदर्शन करने वाले प्रयासों और संबंधित अधिकारियों के योगदान को भी सामने लाया जाएगा।
पंजाब सरकार के लिए यह बैठक नशा विरोधी अभियान की दिशा और उसके क्रियान्वयन की समीक्षा का अहम अवसर होगी। इसमें सामने आने वाली जानकारी के आधार पर आगे की कार्रवाई, विभागीय समन्वय और जिलों की जवाबदेही पर जोर दिया जा सकता है। साथ ही, मानसा की घटना के बाद पुलिस जांच और नशा विरोधी कार्यकर्ताओं की सुरक्षा का मुद्दा भी सार्वजनिक चर्चा में बना हुआ है। बैठक के बाद यह स्पष्ट हो सकेगा कि राज्य प्रशासन अभियान को अधिक प्रभावी बनाने और कानून-व्यवस्था से जुड़ी चुनौतियों से निपटने के लिए किन कदमों को प्राथमिकता देता है।
