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पंजाब चुनाव से पहले Waris Punjab De ने बजाया चुनावी बिगुल, SAD के पारंपरिक ‘पंथिक स्पेस’ में सेंध लगाने की तैयारी

9 अक्टूबर 2026:  पंजाब में 2027 के विधानसभा चुनावों से पहले राजनीतिक गतिविधियां तेज होने लगी हैं। इसी क्रम में अकाली दल वारिस पंजाब दे ने चुनावी तैयारी का संकेत देते हुए पटियाला जिले के भादसों में ‘पंथिक मिलन’ आयोजित किया। पार्टी के शीर्ष नेताओं ने इस कार्यक्रम में कार्यकर्ताओं और समर्थकों को संबोधित करते हुए पंजाब और सिख समुदाय से जुड़े विभिन्न मुद्दे उठाए।

इस आयोजन को पंजाब की पंथिक राजनीति में अपनी जगह मजबूत करने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है। लंबे समय से इस राजनीतिक क्षेत्र में शिरोमणि अकाली दल (SAD) का प्रभाव रहा है। अब वारिस पंजाब दे भी इसी क्षेत्र में अपनी राजनीतिक पहचान और समर्थन बढ़ाने की कोशिश कर रहा है। citeturn806374search0

भादसों में आयोजित हुआ पंथिक सम्मेलन

द ट्रिब्यून की रिपोर्ट के अनुसार, गुरुवार को पटियाला ग्रामीण विधानसभा क्षेत्र के भादसों में पार्टी का पंथिक सम्मेलन आयोजित किया गया। कार्यक्रम का आयोजन शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (SGPC) के सदस्य सतविंदर सिंह तोहरा ने किया।

सम्मेलन में पार्टी नेताओं ने आगामी विधानसभा चुनाव में जीत हासिल करने और इसके बाद SGPC से जुड़े मुद्दों पर संघर्ष शुरू करने की बात कही। नेताओं ने सिख समुदाय और पंजाब से जुड़े विषयों को अपने राजनीतिक एजेंडे का हिस्सा बताया। citeturn806374search0

SGPC के कामकाज को लेकर भी उठाए सवाल

कार्यक्रम के दौरान डाखा के विधायक मनप्रीत सिंह अयाली ने SGPC के कामकाज पर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि पंथ विरोधी ताकतों ने संस्था पर नियंत्रण कर लिया है और इसे लेकर सिख समुदाय को सामूहिक रूप से विचार करना चाहिए।

अयाली ने कहा कि पार्टी केवल चुनावी राजनीति तक सीमित नहीं रह सकती और SGPC में कथित अनियमितताओं तथा फैसलों से जुड़े मुद्दों पर भी अपनी बात रखेगी। ये आरोप पार्टी नेताओं की ओर से लगाए गए हैं।

SAD की राजनीति को लेकर वारिस पंजाब दे का निशाना

सम्मेलन में खडूर साहिब से सांसद अमृतपाल सिंह के पिता तरसेम सिंह ने भी पंजाब की स्थिति पर चिंता जताई। उन्होंने कथित फर्जी पुलिस मुठभेड़ों, युवाओं में नशे की समस्या और गैंगस्टरों की ओर से रंगदारी मांगने जैसे मुद्दे उठाए।

तरसेम सिंह ने SAD की आलोचना करते हुए कहा कि पार्टी, जिसकी स्थापना सिख समुदाय के हितों और मूल्यों का प्रतिनिधित्व करने के उद्देश्य से हुई थी, अब राजनीतिक सत्ता को प्राथमिकता देती दिखाई देती है। उन्होंने वारिस पंजाब दे को इसी उद्देश्य को आगे बढ़ाने वाला संगठन बताया। ये बयान पार्टी नेताओं के राजनीतिक विचारों और आरोपों को दर्शाते हैं।

समान विचारधारा वाली पार्टियों से गठबंधन के संकेत

वारिस पंजाब दे के नेताओं ने संभावित गठबंधन को लेकर भी अपना रुख सामने रखा। तरसेम सिंह ने कहा कि समान सिद्धांतों और उद्देश्यों वाली राजनीतिक पार्टियों के साथ गठबंधन के लिए उनके दरवाजे खुले हैं।

इस बयान से संकेत मिलता है कि आगामी विधानसभा चुनाव में पार्टी अन्य दलों के साथ सहयोग की संभावनाओं पर विचार कर सकती है। हालांकि, सम्मेलन में किसी गठबंधन की औपचारिक घोषणा नहीं की गई।

2027 के चुनाव से पहले पंथिक राजनीति में बढ़ेगी हलचल

पंजाब में आगामी विधानसभा चुनावों को देखते हुए अलग-अलग अकाली धड़ों और क्षेत्रीय राजनीतिक संगठनों की गतिविधियां बढ़ रही हैं। वारिस पंजाब दे की ओर से सम्मेलन आयोजित करना और SGPC से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता देना इसी राजनीतिक तैयारी का हिस्सा है।

SAD लंबे समय से पंथिक राजनीति में प्रमुख भूमिका निभाता रहा है, लेकिन अब विभिन्न संगठन इस क्षेत्र में अपनी जगह बनाने का प्रयास कर रहे हैं। ऐसे में आने वाले महीनों में चुनावी मुद्दों, संभावित गठबंधनों और राजनीतिक नेतृत्व को लेकर बहस तेज होने की संभावना है।

हालांकि, किसी पार्टी की चुनावी सफलता का आकलन केवल एक सम्मेलन या नेताओं के बयानों के आधार पर नहीं किया जा सकता। इसके लिए उम्मीदवारों, संगठनात्मक नेटवर्क, स्थानीय मुद्दों और मतदाताओं की प्रतिक्रिया जैसे कई पहलुओं को देखना होगा।

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