9 अक्टूबर 2026: हरियाणा सरकार ने युवाओं को नशे से दूर रखने और स्वस्थ जीवनशैली को बढ़ावा देने के लिए चलाए जा रहे ‘ड्रग-मुक्त हरियाणा’ अभियान के तहत प्रोटीन पाउडर, न्यूट्रास्युटिकल्स और एनर्जी ड्रिंक्स की गुणवत्ता की जांच तेज कर दी है। सरकार का ध्यान अब उन उत्पादों पर भी है, जिन्हें फिटनेस, मांसपेशियों के विकास और ऊर्जा बढ़ाने के नाम पर बाजार में बेचा जाता है।
हरियाणा के खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग ने 5 अक्टूबर को प्रदेश के सभी जिलों में एक साथ विशेष जांच अभियान चलाया। इस दौरान निर्माताओं, वितरकों, खुदरा विक्रेताओं और केमिस्ट दुकानों सहित 61 प्रतिष्ठानों का निरीक्षण किया गया। अधिकारियों ने जांच के लिए 73 सैंपल एकत्र किए हैं।
73 सैंपल जांच के लिए भेजे गए
जांच अभियान के दौरान एकत्र किए गए सैंपलों में न्यूट्रास्युटिकल्स, प्रोटीन पाउडर और एनर्जी ड्रिंक्स शामिल हैं। इन सैंपलों को चंडीगढ़ और करनाल स्थित राज्य खाद्य प्रयोगशालाओं के साथ-साथ राष्ट्रीय प्रत्यायन बोर्ड (NABL) से मान्यता प्राप्त प्रयोगशालाओं में जांच के लिए भेजा गया है।
अधिकारियों के मुताबिक, उत्पादों की गुणवत्ता और लेबल पर दी गई जानकारी की जांच की जाएगी। प्रयोगशाला रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई तय होगी। जिन उत्पादों या कारोबारियों में नियमों का उल्लंघन पाया जाएगा, उनके खिलाफ लागू कानूनों के तहत कार्रवाई की जा सकती है।
रोहतक में ‘100% नेचुरल’ दावे पर कार्रवाई
जांच के दौरान रोहतक में एक पोषण उत्पाद कारोबारी के यहां ऐसा प्रोटीन पाउडर मिला, जिस पर ‘100% नेचुरल’ होने का दावा किया गया था। अधिकारियों के अनुसार, उत्पाद के लेबल पर समाप्ति तिथि, निर्माता का पता और FSSAI लाइसेंस नंबर जैसी जरूरी जानकारियां नहीं दी गई थीं।
विभाग ने इस मामले में संबंधित फर्म के खिलाफ खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 के तहत कानूनी कार्रवाई शुरू की है। यह मामला इस बात को सामने लाता है कि किसी उत्पाद को प्राकृतिक या स्वास्थ्य के लिए लाभकारी बताने के साथ-साथ उसकी पैकेजिंग और लेबलिंग पर जरूरी जानकारी देना भी महत्वपूर्ण है।
युवाओं की सेहत पर सरकार का जोर
हरियाणा सरकार का कहना है कि ‘ड्रग-मुक्त हरियाणा’ अभियान का उद्देश्य केवल युवाओं को नशीले पदार्थों से दूर रखना ही नहीं, बल्कि उन्हें खेल, नियमित शारीरिक गतिविधियों और स्वस्थ जीवनशैली की ओर प्रोत्साहित करना भी है।
प्रोटीन पाउडर और फिटनेस सप्लीमेंट का इस्तेमाल करने वाले लोगों के लिए उत्पाद की गुणवत्ता, सामग्री और लेबल पर लिखे दावों को समझना जरूरी है। किसी उत्पाद पर ‘नेचुरल’, ‘फिटनेस’ या ‘एनर्जी’ जैसे शब्द लिखे होने से अपने आप यह साबित नहीं होता कि वह हर व्यक्ति के लिए उपयुक्त है।
नाबालिगों और गर्भवती महिलाओं को लेकर चेतावनी
खाद्य एवं औषधि प्रशासन ने चेतावनी दी है कि नाबालिगों, गर्भवती महिलाओं और अन्य संवेदनशील समूहों को ऐसे उत्पाद डॉक्टर या योग्य आहार विशेषज्ञ की सलाह के बिना नहीं बेचे जाने चाहिए। नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर संबंधित कारोबारियों के खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है।
माता-पिता को भी बच्चों को प्रोटीन पाउडर, सप्लीमेंट या अधिक कैफीन वाले पेय देने से पहले विशेषज्ञ की सलाह लेनी चाहिए। इसी तरह, फिटनेस के लिए सप्लीमेंट इस्तेमाल करने वाले लोगों को उत्पाद की पैकेजिंग, सामग्री, निर्माता और लाइसेंस संबंधी जानकारी की जांच करनी चाहिए।
गलत दावों और लेबलिंग पर रहेगी नजर
खाद्य उत्पादों की पैकेजिंग पर सही और पूरी जानकारी होना उपभोक्ताओं के लिए महत्वपूर्ण है। यदि लेबल पर जरूरी विवरण मौजूद नहीं हैं या उत्पाद के गुणों को लेकर भ्रामक दावा किया गया है, तो उपभोक्ता के लिए उसकी गुणवत्ता और उपयुक्तता का आकलन करना मुश्किल हो सकता है।
हरियाणा में चलाए गए इस अभियान के तहत अब प्रयोगशाला रिपोर्ट और निरीक्षण के निष्कर्षों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि सार्वजनिक स्वास्थ्य से समझौता करने वाले कारोबारियों के खिलाफ सख्ती बरती जाएगी।
हरियाणा सरकार ने ‘ड्रग-मुक्त हरियाणा’ अभियान के तहत प्रोटीन पाउडर, न्यूट्रास्युटिकल्स और एनर्जी ड्रिंक्स की गुणवत्ता जांचने के लिए प्रदेशभर में अभियान चलाया है। 61 प्रतिष्ठानों का निरीक्षण कर 73 सैंपल लिए गए हैं। रोहतक में गलत या अधूरी लेबलिंग वाले प्रोटीन पाउडर के मामले में कानूनी कार्रवाई शुरू की गई है, जबकि अन्य उत्पादों पर आगे के कदम प्रयोगशाला रिपोर्ट के आधार पर तय होंगे।
