9 अक्टूबर 2026: हरियाणा के पूर्व खेल मंत्री संदीप सिंह के खिलाफ छेड़छाड़ का मामला लड़ रही महिला खिलाड़ी को अदालत में सुनवाई के दौरान सुरक्षा प्रदान की गई है। महिला ने कई महीनों से धमकियां मिलने, पीछा किए जाने और कुछ मौकों पर उसके साथ हाथापाई होने का आरोप लगाया था। शिकायत के बाद पंचकूला में जिला एवं सत्र न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली सक्षम प्राधिकरण ने हरियाणा गवाह संरक्षण योजना के तहत उसकी सुरक्षा के निर्देश दिए।
महिला खिलाड़ी के अनुसार, सुरक्षा के आदेश जारी होने के बावजूद उसे इसकी जानकारी काफी देर से मिली। गुरुवार को अदालत में पेशी के दौरान उसे एक महिला पुलिसकर्मी उपलब्ध कराई गई। यह मामला चंडीगढ़ की अदालत में चल रहा है, जबकि शिकायतकर्ता पंचकूला में रहती है।
सुनवाई के दौरान पीछा करने का आरोप
महिला खिलाड़ी ने ‘द ट्रिब्यून’ को बताया कि उसे लंबे समय से डर के माहौल में रहना पड़ रहा है। उसका आरोप है कि पहले उसकी कार के शीशे तोड़े गए और कुछ मौकों पर उसके साथ हाथापाई भी हुई। उसने यह भी दावा किया कि अदालत में सुनवाई वाले दिनों में उसका पीछा किया जाता रहा है।
महिला ने इन घटनाओं को लेकर हरियाणा के पुलिस महानिदेशक (DGP), अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (CID), चंडीगढ़ के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट, पंचकूला के पुलिस उपायुक्त और मुख्यमंत्री को शिकायतें भेजने की बात कही। बाद में उसने सोशल मीडिया पर वीडियो साझा कर सुरक्षा की मांग भी उठाई।
अगस्त में भी मांगी थी सुरक्षा
रिपोर्ट के अनुसार, महिला ने 8 अगस्त को पंचकूला के जिला एवं सत्र न्यायाधीश को आधिकारिक ईमेल के जरिए शिकायत भेजी थी। इसके साथ एक वीडियो भी साझा किया गया, जिसमें उसने धमकियों और पीछा किए जाने की बात बताते हुए सुरक्षा देने की अपील की थी।
शिकायत के बाद 27 अगस्त को सक्षम प्राधिकरण की बैठक हुई। इसमें पंचकूला की पुलिस उपायुक्त अदिति सिंह और जिला अटॉर्नी अनुराग हुड्डा शामिल हुए। बैठक में महिला की सुरक्षा व्यवस्था और पुलिस की ओर से किए गए खतरे के आकलन पर चर्चा की गई।
पुलिस एस्कॉर्ट देने के पहले भी दिए गए थे निर्देश
महिला की सुरक्षा को लेकर सक्षम प्राधिकरण ने 2 जुलाई को उसके घर से चंडीगढ़ की जिला अदालत तक पुलिस एस्कॉर्ट उपलब्ध कराने का निर्देश दिया था। इसके बाद 20 और 22 जुलाई को भेजे गए ईमेल के आधार पर 24 जुलाई को फिर बैठक हुई।
उस बैठक में पुलिस को खतरे का नया आकलन करने और 1 अगस्त को महिला के बयान दर्ज कराने के लिए पुलिस एस्कॉर्ट देने को कहा गया था। हालांकि, हरियाणा पुलिस ने 31 जुलाई को दावा किया कि महिला ने फोन कॉल का जवाब नहीं दिया। महिला के अनुसार, उसे उस दिन सुरक्षा नहीं मिली, फिर भी उसने अदालत में अपना बयान दर्ज कराया।
पुलिस ने खतरे से इनकार किया, प्राधिकरण ने फिर दिए निर्देश
रिपोर्ट के मुताबिक, पुलिस की एक नई खतरा आकलन रिपोर्ट में कहा गया कि बयान दर्ज होने के बाद महिला को कोई खतरा नहीं था। इसके बावजूद सक्षम प्राधिकरण ने 27 अगस्त की बैठक में उसकी सुरक्षा के लिए अतिरिक्त कदम उठाने का फैसला किया।
निर्देशों के तहत संबंधित पुलिस वाहन या पुलिसकर्मी को महिला के घर के आसपास नियमित गश्त करनी है। महिला को भी कहा गया कि अदालत जाने से पहले गवाह संरक्षण प्रकोष्ठ से संपर्क करे, ताकि उसके लिए पुलिस एस्कॉर्ट की व्यवस्था की जा सके। संबंधित प्रकोष्ठ और थाना प्रभारी को उसके संपर्क में रहने तथा सुरक्षा से जुड़ी जानकारी देने के निर्देश भी दिए गए।
सुरक्षा की जानकारी मिलने में देरी का दावा
महिला ने बताया कि बैठक के निर्णयों पर 28 अगस्त को हस्ताक्षर किए गए थे, लेकिन उसे इसकी जानकारी 5 अक्टूबर को मिली। उसके अनुसार, सुरक्षा को लेकर लंबे समय से शिकायतें किए जाने के बावजूद व्यवस्था मिलने में देरी हुई।
गुरुवार को अदालत में पेशी के दौरान महिला को महिला पुलिसकर्मी उपलब्ध कराई गई। इस कदम का उद्देश्य सुनवाई के दौरान उसकी सुरक्षा सुनिश्चित करना है।
संदीप सिंह के खिलाफ क्या है मामला?
पूर्व भारतीय हॉकी कप्तान और हरियाणा के पूर्व खेल मंत्री संदीप सिंह के खिलाफ एक जूनियर एथलेटिक्स कोच ने शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत के आधार पर चंडीगढ़ पुलिस ने 31 दिसंबर 2022 को मामला दर्ज किया था। महिला ने आरोप लगाया था कि 1 जुलाई 2022 को चंडीगढ़ स्थित मंत्री के आधिकारिक आवास पर उसके साथ यौन उत्पीड़न हुआ।
जुलाई 2024 में चंडीगढ़ की एक अदालत ने संदीप सिंह के खिलाफ यौन उत्पीड़न, महिला की गरिमा को ठेस पहुंचाने, कपड़े उतारने के इरादे से हमला करने और आपराधिक धमकी सहित कई आरोपों में मुकदमा चलाने के लिए आरोप तय किए थे। संदीप सिंह ने आरोपों से इनकार किया है और खुद को झूठे मामले में फंसाए जाने की बात कही है। आरोप तय होना दोष सिद्ध होना नहीं है; मामले में अंतिम निर्णय अदालत द्वारा किया जाना है।
गवाहों की सुरक्षा पर फिर चर्चा
इस मामले में महिला की सुरक्षा को लेकर उठे सवाल गवाह संरक्षण व्यवस्था के महत्व को सामने लाते हैं। अदालत में बयान देने वाले व्यक्ति को किसी भी तरह के दबाव या भय से बचाना निष्पक्ष न्यायिक प्रक्रिया के लिए जरूरी है। अब संबंधित अधिकारियों को सुरक्षा संबंधी निर्देशों का पालन करना है और महिला की ओर से बताई गई धमकियों की प्रकृति का रिकॉर्ड तैयार करना है।
