8 अक्टूबर 2026: दिल्ली के न्यू सीमापुरी इलाके में एक इमारत के ढहने से मौतों का आंकड़ा बढ़कर चार हो गया है, जबकि कई लोग घायल हुए हैं। हादसे के बाद राहत और बचाव अभियान चलाया गया। स्थानीय लोगों का दावा है कि मंगलवार रात आए भूकंप के झटकों के बाद इमारत में दरारें आ गई थीं और इसे खाली कराने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई थी। हालांकि, अधिकारियों ने अभी तक भूकंप और इमारत के गिरने के बीच किसी सीधे संबंध की पुष्टि नहीं की है।
न्यू सीमापुरी में अचानक ढही इमारत
हादसा बुधवार दोपहर करीब 3:10 से 3:15 बजे के बीच न्यू सीमापुरी के घनी आबादी वाले झुग्गी क्षेत्र में हुआ। इमारत के मलबे में कई लोग दब गए। सूचना मिलने के बाद दिल्ली फायर सर्विस, दिल्ली पुलिस, नगर निगम, दिल्ली आपदा प्रबंधन प्राधिकरण और बाद में एनडीआरएफ की टीमें मौके पर पहुंचीं।
स्थानीय लोगों ने भी बचाव अभियान में मदद की और मलबे से लोगों को बाहर निकालने की कोशिश की। भारी मलबा हटाने के लिए बाद में मशीनों का इस्तेमाल किया गया।
भूकंप के बाद इमारत में आई थीं दरारें?
स्थानीय निवासियों के अनुसार, मंगलवार शाम उत्तर भारत में महसूस किए गए भूकंप के झटकों के बाद इमारत में दरारें दिखाई दी थीं। उनका दावा है कि इसके बाद मकान मालिक इमारत को खाली कराने की कोशिश कर रहा था।
मंगलवार को उत्तराखंड के चमोली के पास 4.9 तीव्रता का भूकंप आया था, जिसके झटके दिल्ली समेत उत्तर भारत के कई हिस्सों में महसूस किए गए थे। हालांकि, प्रशासन ने अभी यह स्पष्ट नहीं किया है कि भूकंप के कारण आई दरारें ही इमारत गिरने की वजह बनीं। हादसे के वास्तविक कारण की जांच की जा रही है।
हादसे में चार लोगों की मौत
शुरुआती जानकारी में तीन लोगों की मौत की बात सामने आई थी, लेकिन गुरुवार तड़के एक और शव मिलने के बाद मृतकों की संख्या बढ़कर चार हो गई। मृतकों में करीब चार महीने की गर्भवती 21 वर्षीय गुलफशां और दो बच्चे भी शामिल हैं। एक अन्य मृतक की पहचान की प्रक्रिया जारी थी।
हादसे में आठ लोग घायल हुए हैं। घायलों को इलाज के लिए राजीव गांधी सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल, ताहिरपुर ले जाया गया। बचाव दलों ने मलबे से लोगों को निकालने के लिए लगातार अभियान चलाया।
आसपास की इमारतों को भी नुकसान
इमारत गिरने से आसपास की संरचनाएं भी प्रभावित हुईं। नगर निगम के अनुसार, पास की एक इमारत की दीवारें क्षतिग्रस्त हुईं, जबकि नजदीकी मस्जिद की सीमा दीवार भी गिर गई।
नगर निगम के मुताबिक, हादसे वाली इमारत करीब 20 से 25 साल पुरानी थी और डूसिब की जमीन पर बने झुग्गी-झोपड़ी क्षेत्र में स्थित थी। स्थानीय पूछताछ के अनुसार, वहां कुछ परिवार कचरा और प्लास्टिक इकट्ठा करने का काम करते थे।
बचाव अभियान में जुटीं कई एजेंसियां
हादसे की सूचना मिलते ही दिल्ली फायर सर्विस की टीम मौके पर पहुंची। इसके बाद दिल्ली पुलिस, एमसीडी, डीडीएमए और एनडीआरएफ की टीमें भी बचाव कार्य में शामिल हुईं।
स्थानीय लोगों ने भी मलबा हटाने में राहतकर्मियों की मदद की। शुरुआती चरण में लोगों ने हाथों से ईंट और मलबा हटाकर अंदर फंसे लोगों तक पहुंचने की कोशिश की। बाद में भारी मलबा हटाने के लिए खुदाई मशीनें लगाई गईं।
मलबे में और लोगों के फंसे होने की आशंका
गुरुवार सुबह तक बचाव अभियान जारी था और अधिकारियों ने एक-दो और लोगों के मलबे में फंसे होने की आशंका जताई। मलबे का बड़ा हिस्सा हटाया जा चुका था, लेकिन पूरी तरह तलाशी अभियान पूरा होने तक स्थिति स्पष्ट नहीं थी।
दिल्ली ट्रैफिक पुलिस ने भी लोगों से हादसे वाली जगह के आसपास जाने, वाहन खड़े करने या भीड़ लगाने से बचने की अपील की, ताकि एंबुलेंस और बचाव वाहनों की आवाजाही में परेशानी न हो।
इमारत गिरने की असली वजह की जांच
फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि इमारत आखिर किन परिस्थितियों में गिरी। स्थानीय लोगों ने भूकंप के बाद आई दरारों को हादसे से जोड़कर देखा है, लेकिन अधिकारियों ने अभी तक इसे आधिकारिक कारण नहीं माना है।
इमारत की उम्र, उसकी संरचना और उसमें किए गए संभावित निर्माण बदलाव समेत अन्य पहलुओं की भी जांच की जा रही है। हादसे की पूरी तस्वीर जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।
कुल मिलाकर, दिल्ली के न्यू सीमापुरी में इमारत गिरने से चार लोगों की मौत और कई लोगों के घायल होने की घटना ने इलाके में चिंता बढ़ा दी है। स्थानीय लोगों ने भूकंप के बाद इमारत में दरारें आने का दावा किया है, लेकिन प्रशासन ने अभी भूकंप को हादसे की निश्चित वजह नहीं माना है। बचाव अभियान के साथ-साथ इमारत गिरने के वास्तविक कारणों की जांच जारी है।
