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हरियाणा सिख गुरुद्वारा कमेटी में गतिरोध, विकास और कल्याण कार्य प्रभावित

8 अक्टूबर 2026: हरियाणा सिख गुरुद्वारा मैनेजमेंट कमेटी (HSGMC) में जारी प्रशासनिक गतिरोध का असर अब विकास, धार्मिक, शिक्षा और स्वास्थ्य से जुड़े कार्यों पर दिखाई देने लगा है। आपसी मतभेद, बैठकों का बहिष्कार और कानूनी विवादों के कारण कमेटी की कार्यप्रणाली प्रभावित हो रही है। बुधवार को भी कमेटी की कार्यकारिणी की बैठक कोरम पूरा न होने के कारण नहीं हो सकी।

कोरम पूरा न होने से बढ़ी परेशानी

HSGMC में सामान्य सदन की बैठकों के दौरान आवश्यक दो-तिहाई उपस्थिति पूरी नहीं हो पाने के कारण कई महत्वपूर्ण फैसले अटक रहे हैं। असहमति रखने वाले कुछ सदस्य लगातार बैठकों का बहिष्कार कर रहे हैं, जिससे कमेटी के लिए जरूरी प्रशासनिक और वित्तीय निर्णय लेना मुश्किल हो गया है।

हरियाणा सिख गुरुद्वारा अधिनियम, 2014 के तहत बैठकों के लिए निर्धारित कोरम पूरा होना जरूरी है। कोरम के अभाव में कमेटी बजट और अन्य महत्वपूर्ण प्रस्तावों को प्रभावी ढंग से आगे नहीं बढ़ा पा रही है।

104.5 करोड़ रुपये का बजट हुआ था रद्द

HSGMC ने वित्त वर्ष 2025-26 के लिए करीब 104.5 करोड़ रुपये का बजट मंजूर किया था, लेकिन बाद में हरियाणा सिख गुरुद्वारा न्यायिक आयोग ने इसे रद्द कर दिया। यह कार्रवाई विपक्षी सदस्यों की ओर से उठाई गई आपत्तियों के बाद हुई, जिसमें वैध कोरम नहीं होने का मुद्दा उठाया गया था।

इसके बाद वित्त वर्ष 2026-27 के लिए प्रस्तावित करीब 110 करोड़ रुपये के बजट को भी आगे नहीं बढ़ाया जा सका। बजट पास नहीं होने के कारण नई योजनाओं और परियोजनाओं के लिए फंड जारी करने में कानूनी और प्रशासनिक अड़चनें बनी हुई हैं।

धार्मिक और कल्याणकारी योजनाओं पर असर

बजट और प्रशासनिक निर्णयों में देरी का असर HSGMC के धार्मिक प्रचार, स्वास्थ्य सेवाओं, शिक्षा और अन्य कल्याणकारी गतिविधियों पर पड़ रहा है। कमेटी से जुड़े कई कार्य नियमित स्तर पर तो चल रहे हैं, लेकिन नई योजनाओं को शुरू करना मुश्किल हो रहा है।

इस स्थिति से सिख समुदाय के उन लोगों की उम्मीदों पर भी असर पड़ रहा है, जो HSGMC से गुरुद्वारों, शिक्षा संस्थानों और स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार की अपेक्षा रखते हैं।

अमृतसर में 350 कमरों की सराय का प्रोजेक्ट अटका

HSGMC की प्रस्तावित योजनाओं में अमृतसर में श्रद्धालुओं के लिए 350 कमरों वाली सराय का निर्माण भी शामिल है। इसमें भूमिगत पार्किंग की सुविधा देने की योजना है। हालांकि, नए फंड को मंजूरी नहीं मिलने के कारण यह परियोजना आगे नहीं बढ़ पा रही है।

इसके अलावा हरियाणा में गुरुद्वारा सुविधाओं के विस्तार, अस्पताल स्थापित करने और दो संगीत विद्यालय शुरू करने जैसी योजनाएं भी अभी तक अपेक्षित गति नहीं पकड़ सकी हैं।

मिरी पीरी संस्थान पर भी पड़ा असर

HSGMC के प्रमुख संस्थानों में शामिल मिरी पीरी इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज एंड रिसर्च को भी वित्तीय दबाव का सामना करना पड़ा। संस्थान के डॉक्टरों और कर्मचारियों ने वेतन में देरी को लेकर विरोध प्रदर्शन किया था। बाद में कर्मचारियों के बकाया वेतन का भुगतान किया गया।

इससे यह साफ होता है कि प्रशासनिक और वित्तीय गतिरोध का असर केवल नई परियोजनाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि संस्थानों के नियमित संचालन पर भी पड़ सकता है।

कुरुक्षेत्र में मुख्यालय का काम भी अधर में

HSGMC के कुरुक्षेत्र स्थित मुख्यालय की आधारशिला रखी जा चुकी है, लेकिन परियोजना अभी भी आगे बढ़ने का इंतजार कर रही है। बजट और वित्तीय फैसलों में अड़चन के कारण कई योजनाओं का भविष्य स्पष्ट नहीं है।

SGPC से तुलना

रिपोर्ट में HSGMC की स्थिति की तुलना पंजाब की शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (SGPC) से भी की गई है। SGPC नियमित जनरल हाउस प्रक्रिया के जरिए अपने वार्षिक बजट को मंजूरी देकर विभिन्न धार्मिक, शिक्षा और विकास कार्यों को आगे बढ़ा रही है।

SGPC ने 2025-26 के लिए 1,386.47 करोड़ रुपये और 2026-27 के लिए 1,487.41 करोड़ रुपये का बजट पारित किया था। इन बजटों में गुरुद्वारों, धर्म प्रचार, शिक्षा और श्रद्धालुओं के लिए आवास जैसी गतिविधियों के लिए राशि शामिल है।

गतिरोध दूर करना बड़ी चुनौती

HSGMC के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती आपसी मतभेदों को दूर कर कोरम पूरा करना और बजट प्रक्रिया को आगे बढ़ाना है। इससे पहले भी कमेटी के सदस्यों के बीच मतभेदों के कारण बजट और विकास योजनाएं प्रभावित होती रही हैं। सितंबर में भी एक सदस्य ने HSGMC अध्यक्ष जगदीश सिंह झींडा के इस्तीफे की मांग को लेकर धरना दिया था।

कमेटी के लिए बजट पास होना इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि इसके बिना नई परियोजनाओं, शिक्षा, स्वास्थ्य, धर्म प्रचार और कल्याणकारी कार्यों के लिए आवश्यक वित्तीय फैसले लेना मुश्किल बना हुआ है।

कुल मिलाकर, हरियाणा सिख गुरुद्वारा मैनेजमेंट कमेटी में जारी प्रशासनिक गतिरोध का असर अब विकास और कल्याणकारी गतिविधियों पर पड़ रहा है। कोरम की समस्या, बजट को लेकर विवाद और सदस्यों के बीच मतभेदों के कारण कई महत्वपूर्ण परियोजनाएं अटकी हुई हैं। ऐसे में HSGMC के प्रभावी संचालन के लिए आपसी सहमति बनाकर बजट और जरूरी प्रशासनिक फैसलों को जल्द आगे बढ़ाना अहम होगा।

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