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PGIMER में एनेस्थीसिया पर बड़ा सम्मेलन, 400 से ज्यादा हेल्थकेयर प्रोफेशनल्स ने लिया हिस्सा

6 अक्टूबर 2026 पोस्टग्रेजुएट इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल एजुकेशन एंड रिसर्च (PGIMER), चंडीगढ़ के एनेस्थीसिया एंड इंटेंसिव केयर विभाग की ओर से 22वीं नॉर्थ जोन ISA कॉन्फ्रेंस (NZ ISACON 2026) का आयोजन किया गया। चार दिवसीय यह सम्मेलन 1 से 4 अक्टूबर तक चंडीगढ़ में आयोजित हुआ, जिसमें 400 से अधिक एनेस्थीसियोलॉजिस्ट, नर्सिंग ऑफिसर्स, तकनीशियन, प्रशिक्षु, पुलिसकर्मी और अन्य स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़े पेशेवर शामिल हुए।

‘Gen X to Gen Z Alpha’ रहा सम्मेलन का विषय

इस वर्ष सम्मेलन की थीम ‘Gen X to Gen Z Alpha: Shaping the Future of Anaesthesia’ रखी गई। कार्यक्रम का उद्देश्य एनेस्थीसिया और क्रिटिकल केयर के क्षेत्र में बदलती तकनीक, उपचार पद्धतियों, प्रशिक्षण और मरीजों की सुरक्षा से जुड़े विषयों पर विशेषज्ञों के बीच विचार-विमर्श करना था।

सम्मेलन का आयोजन PGIMER के एनेस्थीसिया एंड इंटेंसिव केयर विभाग की प्रमुख डॉ. काजल जैन के नेतृत्व में किया गया। विभाग के प्रोफेसर डॉ. जीतिंदर मक्कड़ ने आयोजन सचिव के रूप में जिम्मेदारी संभाली।

प्री-कॉन्फ्रेंस ट्रेनिंग से हुई शुरुआत

कार्यक्रम की शुरुआत प्री-कॉन्फ्रेंस ट्रेनिंग वर्कशॉप से हुई। इसमें नर्सिंग ऑफिसर्स, तकनीशियनों और पुलिस कर्मियों को आपातकालीन स्थिति में मरीजों की मदद, रिससिटेशन, मरीजों की सुरक्षा और फर्स्ट-रिस्पॉन्स स्किल्स से संबंधित प्रशिक्षण दिया गया।

इस तरह की ट्रेनिंग का उद्देश्य आपात स्थिति में शुरुआती स्तर पर सही प्रतिक्रिया देने की क्षमता को मजबूत करना रहा, ताकि गंभीर मरीजों को समय पर आवश्यक सहायता मिल सके।

मुख्य सम्मेलन में विशेषज्ञों ने साझा किए अनुभव

दो दिवसीय मुख्य वैज्ञानिक सम्मेलन का आयोजन चंडीगढ़ के द ललित में किया गया। इसमें विशेषज्ञों के व्याख्यान, पैनल डिस्कशन, इंटरैक्टिव अकादमिक सत्र और वैज्ञानिक प्रस्तुतियां आयोजित की गईं।

भारत के साथ-साथ विदेशों से भी विशेषज्ञों ने सम्मेलन में हिस्सा लिया। एनेस्थीसिया और क्रिटिकल केयर के क्षेत्र में सामने आ रहे नए बदलावों और तकनीकों पर चर्चा के साथ युवा शोधकर्ताओं और प्रशिक्षुओं को अपने शोध कार्य प्रस्तुत करने का अवसर भी मिला।

युवा डॉक्टरों के लिए मास्टरक्लास

सम्मेलन के दौरान शुरुआती करियर वाले डॉक्टरों के लिए पांच विशेष मास्टरक्लास भी आयोजित की गईं। इनका उद्देश्य युवा चिकित्सा पेशेवरों को विशेषज्ञों के अनुभव और आधुनिक चिकित्सा पद्धतियों से जोड़ना था।

कार्यक्रम में वैज्ञानिक कार्यों को प्रस्तुत करने के साथ अकादमिक प्रतियोगिताओं का भी आयोजन किया गया, जिससे प्रतिभागियों को अपने शोध और ज्ञान को साझा करने का मंच मिला।

हांगकांग के विशेषज्ञ ने दिया मुख्य व्याख्यान

सम्मेलन में इंडियन सोसाइटी ऑफ एनेस्थीसियोलॉजिस्ट्स के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. नवीन मल्होत्रा ने प्रेसिडेंशियल एड्रेस दिया। इसके अलावा डॉ. जीएल कमरा और डॉ. प्रीतम सिंह ओरशन भी कार्यक्रम का हिस्सा रहे।

हांगकांग के प्रोफेसर मनोज कुमार करमाकर ने मुख्य व्याख्यान दिया। उनका शोध विशेष रूप से रीजनल एनेस्थीसिया के क्षेत्र से जुड़ा है।

सम्मेलन को मिले 16 क्रेडिट घंटे

कार्यक्रम में चंडीगढ़ प्रशासन की शिक्षा सचिव प्रेणा पुरी मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुईं, जबकि गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल की डायरेक्टर-प्रिंसिपल प्रो. डॉ. रवनीत कौर सम्मानित अतिथि रहीं। पंजाब मेडिकल काउंसिल की ओर से सम्मेलन को 16 क्रेडिट घंटे प्रदान किए गए।

10 हैंड्स-ऑन वर्कशॉप का आयोजन

सम्मेलन के अंतिम दिन 4 अक्टूबर को PGIMER और क्षेत्र के अन्य स्वास्थ्य संस्थानों में कुल 10 हैंड्स-ऑन वर्कशॉप आयोजित की गईं। इनमें गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल, सेक्टर-32 चंडीगढ़, AIMS मोहाली और होमी भाभा कैंसर हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर, न्यू चंडीगढ़ भी शामिल रहे।

वर्कशॉप में Immediate Trauma Life Support, Paediatric Anaesthesia, Ultrasound-Guided Regional Anaesthesia, Transthoracic Echocardiography और ECMO, Mechanical Ventilation, Research Methodology, Neuromonitoring, Airway Management, Chronic Pain, Simulation और Communication Skills जैसे विषयों पर प्रशिक्षण दिया गया।

चिकित्सा शिक्षा और प्रशिक्षण को बढ़ावा

PGIMER की ओर से आयोजित इस सम्मेलन ने एनेस्थीसिया और क्रिटिकल केयर के क्षेत्र में विशेषज्ञों, युवा डॉक्टरों और अन्य स्वास्थ्यकर्मियों को एक साझा मंच उपलब्ध कराया। वैज्ञानिक प्रस्तुतियों, प्रशिक्षण सत्रों और व्यावहारिक वर्कशॉप के माध्यम से प्रतिभागियों को नई तकनीकों और उपचार पद्धतियों को समझने का अवसर मिला।

कुल मिलाकर, PGIMER चंडीगढ़ में आयोजित 22वीं नॉर्थ जोन ISA कॉन्फ्रेंस में 400 से अधिक हेल्थकेयर प्रोफेशनल्स ने हिस्सा लिया। चार दिवसीय कार्यक्रम में एनेस्थीसिया, क्रिटिकल केयर, ट्रॉमा रिस्पॉन्स, मरीजों की सुरक्षा और आधुनिक चिकित्सा प्रशिक्षण से जुड़े विभिन्न विषयों पर विशेषज्ञों ने विचार साझा किए।

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