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महाराष्ट्र में बढ़ी गर्मी, कोकण में हल्की बारिश की संभावना; पालघर में बारिश का इंतजार

6 अक्टूबर 2026 महाराष्ट्र में अक्टूबर की शुरुआत के साथ कई इलाकों में गर्मी और उमस बढ़ गई है। राज्य के कई हिस्सों में बारिश ने ब्रेक लिया है, जिससे दिन के अधिकतम तापमान में बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है। हालांकि, भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के ताजा अनुमान के मुताबिक कोकण और पश्चिमी महाराष्ट्र के कुछ हिस्सों में स्थानीय स्तर पर बारिश की संभावना बनी हुई है। कोकण के रायगढ़, रत्नागिरी और सिंधुदुर्ग जिलों के लिए मौसम विभाग ने बारिश और गरज-चमक को लेकर येलो अलर्ट जारी किया है।

कोकण में हल्की बारिश की संभावना

IMD के अनुसार मंगलवार को रायगढ़ और रत्नागिरी में मौसम गर्म और उमस भरा रह सकता है। दोपहर के बाद या शाम के समय कुछ स्थानों पर हल्की बारिश अथवा गरज-चमक के साथ बौछारें पड़ने की संभावना है।

सिंधुदुर्ग में कुछ स्थानों पर हल्की से मध्यम बारिश के साथ तेज हवाएं चल सकती हैं। यहां हवा की रफ्तार करीब 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंचने का अनुमान है। इसी वजह से रायगढ़, रत्नागिरी और सिंधुदुर्ग के लिए येलो अलर्ट जारी किया गया है।

पालघर में बारिश ने किया इंतजार

कोकण के कुछ हिस्सों में बारिश की संभावना के बीच पालघर में स्थिति अलग बनी हुई है। जिले के कई इलाकों में पिछले करीब 30 से 35 दिनों से बारिश नहीं हुई है। इसका सीधा असर धान की फसल पर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।

पालघर में इस साल मानसून के देर से पहुंचने के कारण धान की रोपाई भी देर से हुई। इसके बाद कुछ इलाकों में हुई भारी बारिश से फसलों को नुकसान पहुंचा था। अब फसल की वृद्धि के महत्वपूर्ण चरण में लंबे समय तक बारिश नहीं होने से किसानों की चिंता बढ़ गई है।

धान की फसल पर संकट

बारिश की कमी के कारण कई खेतों में पानी का स्तर कम होने लगा है। किसानों को डर है कि यदि जल्द बारिश नहीं हुई तो धान की फसल सूख सकती है और उत्पादन में कमी आ सकती है।

पालघर में बड़ी संख्या में किसान धान की खेती पर निर्भर हैं। ऐसे में बारिश में लंबे अंतराल का असर केवल मौजूदा फसल पर ही नहीं, बल्कि किसानों की आय पर भी पड़ सकता है।

बारिश की कमी को देखते हुए बोईसर के पूर्व विधायक राजेश रघुनाथ पाटील ने जिला प्रशासन से पर्जन्यमान की कमी, जलसाठों और फसलों की स्थिति का तत्काल जायजा लेने की मांग की है। उन्होंने सरकार के मानदंडों के अनुसार सूखे जैसी स्थिति को लेकर प्रस्ताव भेजने की भी मांग की है।

महाराष्ट्र के दूसरे हिस्सों में भी बारिश के आसार

कोकण के अलावा पश्चिमी महाराष्ट्र के कुछ हिस्सों में भी बारिश की संभावना जताई गई है। पुणे के घाट क्षेत्रों में गरज-चमक के साथ हल्की बारिश हो सकती है। कोल्हापुर और सातारा के घाट क्षेत्रों में कुछ जगहों पर हल्की से मध्यम बारिश और तेज हवाएं चलने का अनुमान है।

कोल्हापुर शहर और आसपास के इलाकों में भी बारिश की संभावना बनी हुई है। वहीं सातारा, सांगली और सोलापुर के कुछ हिस्सों में स्थानीय स्तर पर बारिश हो सकती है।

मुंबई, ठाणे और पालघर में मौसम रहेगा अलग

मुंबई, ठाणे और पालघर में फिलहाल मुख्य रूप से गर्म और शुष्क मौसम रहने का अनुमान है। हाल के दिनों में इन इलाकों में अधिकतम तापमान बढ़ने से लोगों को अक्टूबर की गर्मी का सामना करना पड़ रहा है।

मौसम विभाग के अनुसार मानसून की वापसी के साथ राज्य में बारिश की गतिविधि धीरे-धीरे कम हो रही है। IMD के कोकण-गोवा उपखंड के लिए 6 अक्टूबर को गरज-चमक और बिजली से जुड़ी चेतावनी है, जबकि 7 अक्टूबर के बाद के दिनों के लिए कोई चेतावनी नहीं दी गई है।

किसानों के लिए मौसम का अनुमान अहम

महाराष्ट्र में मानसून के कमजोर पड़ने के बाद स्थानीय स्तर पर होने वाली बारिश किसानों के लिए महत्वपूर्ण हो गई है। जिन इलाकों में फसलें अभी खेतों में हैं, वहां बारिश का कुछ दिनों का अंतर भी उत्पादन पर असर डाल सकता है।

खासकर पालघर जैसे इलाकों में जहां धान की खेती बड़े स्तर पर होती है, वहां किसान अब बारिश की उम्मीद लगाए बैठे हैं। दूसरी ओर, जिन जिलों में बारिश की संभावना है, वहां तेज हवाओं और गरज-चमक को देखते हुए किसानों और आम लोगों को सावधानी बरतने की जरूरत है।

गर्मी से राहत की उम्मीद कम

अक्टूबर की शुरुआत में ही महाराष्ट्र के कई हिस्सों में तापमान बढ़ने लगा है। मौसम विशेषज्ञों के अनुसार मानसून की वापसी के साथ शुष्क हवाओं का प्रभाव बढ़ने से गर्मी और उमस महसूस हो सकती है। आने वाले दिनों में राज्य के कुछ हिस्सों में तापमान और बढ़ने की संभावना भी जताई गई है।

कुल मिलाकर, महाराष्ट्र में एक तरफ अक्टूबर की गर्मी लोगों को परेशान कर रही है, वहीं कोकण के कुछ जिलों में हल्की बारिश की उम्मीद बनी हुई है। रायगढ़, रत्नागिरी और सिंधुदुर्ग में बारिश को लेकर येलो अलर्ट जारी किया गया है, जबकि पालघर में लंबे समय से बारिश नहीं होने के कारण धान की फसल पर संकट बढ़ता नजर आ रहा है।

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