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हरियाणा में 10 हजार करोड़ रुपये का बड़ा निवेश, हिसार में बनेगा ग्रीन इंडस्ट्रियल कैंपस

3 अक्टूबर 2026  हरियाणा में औद्योगिक और हरित ऊर्जा क्षेत्र को बढ़ावा देने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया गया है। हरियाणा सरकार ने Avaada Group के साथ हिसार में ग्रीन इंडस्ट्रियल कैंपस स्थापित करने के लिए समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए हैं। प्रस्तावित परियोजना में करीब 10,000 करोड़ रुपये के निवेश की योजना है और इससे 5,000 से अधिक रोजगार के अवसर पैदा होने की संभावना जताई गई है।

300 एकड़ में विकसित होगा ग्रीन कैंपस

Avaada Group के अनुसार, हिसार में प्रस्तावित कैंपस करीब 300 एकड़ क्षेत्र में विकसित किया जाएगा। इसे Zero-CBAM Green Industrial Campus के रूप में तैयार करने की योजना है। परियोजना को चरणबद्ध तरीके से विकसित किया जाएगा, हालांकि इसके पहले चरण की शुरुआत और पूरी परियोजना के पूरा होने की अभी कोई निश्चित समयसीमा तय नहीं की गई है।

हरियाणा एंटरप्राइजेज प्रमोशन सेंटर (HEPC), जो राज्य के उद्योग एवं वाणिज्य विभाग के तहत काम करता है, ने Avaada Group के साथ यह MoU किया है। समझौते के दौरान मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी भी मौजूद रहे।

10 हजार करोड़ रुपये के निवेश की योजना

प्रस्तावित ग्रीन इंडस्ट्रियल कैंपस में कुल करीब 10,000 करोड़ रुपये का निवेश होने की उम्मीद है। परियोजना का उद्देश्य हरित ऊर्जा, औद्योगिक ढांचे और ग्रीन मैन्युफैक्चरिंग को एक ही औद्योगिक इकोसिस्टम में जोड़ना है।

राज्य सरकार के अनुसार, यह परियोजना हिसार में औद्योगिक गतिविधियों को बढ़ावा देने के साथ-साथ नए निवेशकों को आकर्षित करने में मदद कर सकती है। स्थानीय उद्योग जगत से जुड़े लोगों ने भी प्रस्तावित निवेश को हिसार के औद्योगिक विकास के लिए महत्वपूर्ण बताया है।

5 हजार से ज्यादा रोजगार के अवसर

परियोजना की एक प्रमुख खासियत रोजगार सृजन भी है। Avaada Group के मुताबिक, ग्रीन कैंपस के विकास से 5,000 से ज्यादा रोजगार के अवसर पैदा होने की संभावना है।

कैंपस में औद्योगिक इकाइयों, तकनीकी भागीदारों और अन्य कंपनियों को आकर्षित करने की योजना है। इससे प्रत्यक्ष रोजगार के साथ-साथ निर्माण, सेवाओं और सहायक औद्योगिक गतिविधियों में भी अवसर बढ़ सकते हैं।

रिन्यूएबल एनर्जी से चलेगा औद्योगिक इकोसिस्टम

प्रस्तावित कैंपस को ऐसे ग्रीन इंडस्ट्रियल इकोसिस्टम के रूप में विकसित करने की योजना है, जिसे चौबीसों घंटे नवीकरणीय ऊर्जा से संचालित किया जा सके। इसका उद्देश्य ऐसी औद्योगिक इकाइयों को सुविधा देना है जो अपने कारोबार में कार्बन उत्सर्जन कम करना चाहती हैं।

परियोजना में विश्वसनीय और ट्रेसेबल रिन्यूएबल पावर उपलब्ध कराने पर जोर दिया जाएगा। इससे यहां काम करने वाली कंपनियों को कम-कार्बन उत्पादों और वैश्विक सप्लाई चेन की बढ़ती मांग के अनुरूप तैयार होने में मदद मिल सकती है।

यूरोपीय बाजार की जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयारी

ग्रीन कैंपस को वैश्विक कार्बन और सस्टेनेबिलिटी मानकों को ध्यान में रखकर विकसित करने की योजना है। इसमें यूरोपीय संघ के Carbon Border Adjustment Mechanism (CBAM) जैसी व्यवस्थाओं को भी ध्यान में रखा जाएगा।

CBAM का उद्देश्य कार्बन-इंटेंसिव उत्पादों के आयात से जुड़े कार्बन उत्सर्जन को लेकर नियमों को लागू करना है। ऐसे में कम-कार्बन उत्पादन व्यवस्था वाली औद्योगिक इकाइयों को वैश्विक बाजार में अपनी प्रतिस्पर्धात्मक स्थिति बनाए रखने में मदद मिल सकती है।

सरकार देगी जरूरी सुविधाओं में सहयोग

MoU के तहत हरियाणा सरकार HEPC के माध्यम से प्रस्तावित कैंपस के विकास में सहयोग करेगी। इसमें औद्योगिक पार्क का उचित दर्जा, संभावित प्रोत्साहन पैकेज, कॉमन इंफ्रास्ट्रक्चर, कनेक्टिविटी और यूटिलिटी जैसी सुविधाओं से जुड़े मामलों में सहयोग शामिल है।

इसके अलावा आवश्यक वैधानिक मंजूरियों को राज्य के सिंगल-विंडो सिस्टम के जरिए तेजी से आगे बढ़ाने में भी मदद की जाएगी।

विदेशी निवेशकों को आकर्षित करने की तैयारी

प्रस्तावित परियोजना में अंतरराष्ट्रीय निवेशकों और तकनीकी भागीदारों को भी जोड़ने की योजना है। MoU के तहत हरियाणा सरकार और Avaada Group जर्मनी, फ्रांस, इटली, नीदरलैंड, बेल्जियम, जापान और दक्षिण कोरिया जैसे देशों में संयुक्त अंतरराष्ट्रीय निवेश रोडशो आयोजित करने की संभावनाएं तलाशेंगे।

इन रोडशो का उद्देश्य ग्रीन इंडस्ट्रियल कैंपस में निवेश के अवसरों को अंतरराष्ट्रीय कंपनियों और निवेशकों के सामने रखना होगा।

हिसार के औद्योगिक विकास को मिल सकती है नई गति

प्रस्तावित परियोजना से हिसार में औद्योगिक गतिविधियों को नई गति मिलने की उम्मीद है। ग्रीन एनर्जी और मैन्युफैक्चरिंग को एक साथ जोड़ने से जिले में नए उद्योगों और निवेश के अवसर विकसित हो सकते हैं।

हालांकि, परियोजना अभी MoU स्तर पर है और इसके चरणबद्ध विकास की विस्तृत समयसीमा बाद में तय की जानी है। इसलिए प्रस्तावित निवेश और रोजगार के आंकड़े परियोजना की योजना से जुड़े अनुमान हैं, न कि अभी सृजित हो चुके रोजगार या निवेश।

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