3 अक्टूबर 2026 यमुना नदी में बिना उपचारित सीवेज और औद्योगिक अपशिष्ट के बहाव को रोकने के लिए हरियाणा के करनाल जिले में सात नए सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) बनाए जाएंगे। इनमें पांच मिनी STP भी शामिल हैं। इन परियोजनाओं का मुख्य उद्देश्य उन नालों और ड्रेनों से आने वाले गंदे पानी को ट्रीट करना है, जो आगे चलकर यमुना नदी में मिलते हैं।
प्रशासन ने इन परियोजनाओं के लिए ऐसे स्थानों को प्राथमिकता दी है, जहां से सीवेज और गंदा पानी सीधे या अप्रत्यक्ष रूप से यमुना की ओर जाता है। हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, करनाल नगर निगम और जन स्वास्थ्य एवं अभियांत्रिकी विभाग समेत संबंधित विभाग मिलकर इन योजनाओं पर काम कर रहे हैं।
करनाल में पहले से 14 STP मौजूद
करनाल जिले में इस समय 14 सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट संचालित हैं। इन सभी की संयुक्त क्षमता करीब 130 MLD है। इसके बावजूद जिले के अलग-अलग हिस्सों से निकलने वाले सीवेज और नालों के पानी को पूरी तरह नियंत्रित करने के लिए अतिरिक्त STP की जरूरत महसूस की गई है।
इसी कड़ी में बरसत में जन स्वास्थ्य एवं अभियांत्रिकी विभाग की ओर से 2 MLD क्षमता का एक और STP बनाया जा रहा है। इस परियोजना का करीब 70 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है और इसे वर्ष के अंत तक शुरू किए जाने की उम्मीद है।
निगधू और करणा कैनाल में भी परियोजनाएं
निगधू में 1.5 MLD क्षमता का STP पूरा हो चुका है। वहीं करणा कैनाल, जिसे पहले मुगल कैनाल के नाम से जाना जाता था, वहां 0.8 MLD क्षमता वाले STP का काम चल रहा है।
इन परियोजनाओं का मकसद स्थानीय स्तर पर सीवेज के पानी को उपचारित करना है, ताकि बिना ट्रीटमेंट के पानी को जल स्रोतों में जाने से रोका जा सके।
नगर निगम बनाएगा दो बड़े STP
करनाल नगर निगम की ओर से दो और बड़े सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट बनाए जाने हैं। इनमें सेक्टर-4 में मौजूदा 50 MLD क्षमता वाले STP के साथ 15 MLD क्षमता का नया प्लांट प्रस्तावित है।
इसके अलावा शिव कॉलोनी में पहले से मौजूद 8 MLD क्षमता वाले STP के साथ 8 MLD क्षमता का एक और प्लांट बनाया जाएगा। दोनों परियोजनाओं के टेंडर फिलहाल तकनीकी मूल्यांकन के चरण में हैं।
पांच मिनी STP नालों पर होंगे केंद्रित
पांच मिनी STP का निर्माण विशेष रूप से उन स्थानों पर किया जाएगा, जहां से नाले और ड्रेन यमुना की ओर जाते हैं। इन मिनी प्लांटों के लिए शेखपुर खालसा मलिकपुर, हलवाना, खोरा खेड़ी, ढोलकुआं ब्रास और नारायणा को चिन्हित किया गया है।
इन छोटे प्लांटों के जरिए स्थानीय स्तर पर सीवेज को उपचारित करने की कोशिश की जाएगी, ताकि प्रदूषित पानी को आगे बहने से पहले ही नियंत्रित किया जा सके।
नालों पर विशेष फोकस
अतिरिक्त उपायुक्त राहुल रायया के अनुसार, STP निर्माण की योजना बनाते समय उन नालों और ड्रेनों को विशेष रूप से ध्यान में रखा गया है, जो आगे जाकर यमुना में मिलते हैं। अधिकारियों का कहना है कि स्रोत के स्तर पर सीवेज का उपचार करना नदी में प्रदूषण का प्रवाह कम करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
समय पर पूरा करने के निर्देश
उपायुक्त आनंद कुमार शर्मा ने अधिकारियों को सभी परियोजनाओं को निर्धारित समय में पूरा करने और निर्माण की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। परियोजनाओं की नियमित निगरानी भी की जा रही है।
प्रशासन का लक्ष्य है कि बिना उपचारित सीवेज और औद्योगिक अपशिष्ट का बहाव यमुना में न हो। इसके लिए STP परियोजनाओं के साथ-साथ संबंधित नालों और जल स्रोतों की निगरानी पर भी जोर दिया जा रहा है।
यमुना की सफाई के लिए हरियाणा में बढ़ाए जा रहे प्रयास
हरियाणा सरकार ने यमुना की स्थिति सुधारने के लिए STP, औद्योगिक अपशिष्ट उपचार, ठोस कचरा प्रबंधन और नालों के उपचार समेत कई उपायों पर जोर दिया है। अगस्त 2026 में हुई समीक्षा में भी राज्य सरकार ने प्रदूषण नियंत्रण से जुड़ी परियोजनाओं को योजना और टेंडर प्रक्रिया से आगे बढ़ाकर समय पर पूरा करने पर जोर दिया था।
कुल मिलाकर, करनाल में यमुना प्रदूषण को कम करने के लिए सात नए STP बनाए जाएंगे। इनमें दो बड़े STP करनाल नगर निगम द्वारा और पांच मिनी STP उन क्षेत्रों में बनाए जाएंगे, जहां के नाले यमुना की ओर जाते हैं। प्रशासन का उद्देश्य बिना उपचारित सीवेज और औद्योगिक अपशिष्ट को नदी में जाने से रोकना और यमुना की स्वच्छता में सुधार करना है।
