2 अक्टूबर 2026 हरियाणा सरकार ने अधिक भीड़ वाले पर्यटन और धार्मिक स्थलों पर ठोस कचरा प्रबंधन को आधुनिक और तकनीक आधारित बनाने की योजना तैयार की है। इसके तहत प्रमुख पर्यटन स्थलों, धार्मिक केंद्रों, ऐतिहासिक स्थानों, पवित्र जलाशयों और मेलों वाले क्षेत्रों में कचरे के प्रबंधन के लिए विशेष व्यवस्था लागू की जाएगी। योजना में IoT तकनीक से लैस कूड़ेदान, चार-स्ट्रीम कचरा पृथक्करण, जियो-टैगिंग और डिजिटल डेटाबेस जैसी व्यवस्थाएं शामिल हैं।
हर 50 मीटर पर लगाए जाएंगे चार कूड़ेदान
नई व्यवस्था के तहत प्रमुख स्थलों तक पहुंचने वाले मार्गों पर हर 50 मीटर की दूरी पर चार कूड़ेदान लगाए जाएंगे। वहीं, श्रद्धालुओं की कतार वाले कॉरिडोर में हर 25 मीटर पर चार कूड़ेदान की व्यवस्था होगी।
इन कूड़ेदानों के जरिए कचरे को अलग-अलग श्रेणियों में एकत्र करने पर जोर दिया जाएगा। इसके अलावा निर्धारित स्थानों पर चार-स्ट्रीम कचरा संग्रहण केंद्र बनाए जाएंगे, जहां कचरे को ढककर रखने की व्यवस्था होगी।
IoT तकनीक से कूड़ेदानों की होगी निगरानी
हरियाणा की प्रस्तावित व्यवस्था में IoT-enabled bins को भी शामिल किया गया है। इन कूड़ेदानों में सेंसर लगाए जाएंगे, जो उनके भरने के स्तर की जानकारी वास्तविक समय में उपलब्ध करा सकेंगे।
इन सेंसर आधारित कूड़ेदानों में ढक्कन अपने आप खुलने की सुविधा भी होगी। इससे सफाई कर्मचारियों को यह पता लगाने में मदद मिलेगी कि किस स्थान पर कूड़ेदान भर चुका है और वहां से कचरा कब उठाने की जरूरत है।
तीन प्रमुख धार्मिक स्थलों से शुरू होगा पहला चरण
योजना के पहले चरण में तीन प्रमुख स्थलों को शामिल किया गया है। इनमें गुरुग्राम का श्री माता शीतला देवी मंदिर, पंचकूला का श्री मनसा देवी मंदिर और कुरुक्षेत्र के थानेसर स्थित ब्रह्म सरोवर शामिल हैं।
इन स्थानों पर आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों की संख्या को ध्यान में रखते हुए विशेष कचरा प्रबंधन मॉडल तैयार किया जाएगा।
सात दिन तक होगा कचरे का ऑडिट
प्रत्येक स्थल के लिए स्थानीय शहरी निकाय को विस्तृत मूल्यांकन करना होगा। इसमें स्थल का धार्मिक या पर्यटन महत्व, सालाना फुटफॉल, पीक सीजन और सबसे अधिक भीड़ वाले दिनों की संख्या को शामिल किया जाएगा।
इसके साथ ही कम से कम सात दिनों तक कचरे का ऑडिट किया जाएगा। इससे यह पता लगाने में मदद मिलेगी कि किसी स्थान पर रोजाना कितना कचरा पैदा होता है और उसके निपटारे के लिए कितने संसाधनों की जरूरत है। इन आंकड़ों का डिजिटल डेटाबेस तैयार किया जाएगा, जिसे स्थानीय और जिला स्तर पर रखा जाएगा और बाद में निदेशालय स्तर पर समेकित किया जाएगा।
500 मीटर के दायरे में होगी विशेष व्यवस्था
प्रत्येक धार्मिक या पर्यटन स्थल के आसपास करीब 500 मीटर के क्षेत्र को विशेष प्रबंधन क्षेत्र के रूप में देखा जाएगा। इसमें मुख्य परिसर के अलावा आने-जाने वाली सड़कें, दुकानदारों का क्षेत्र, पार्किंग और कचरे को प्रोसेसिंग सुविधा तक पहुंचाने वाले मार्ग शामिल होंगे।
इस क्षेत्र में खुले कचरा संग्रहण केंद्र नहीं होंगे। कचरा उठाने के लिए निर्धारित वाहन और सफाई दल तैनात किए जाएंगे, खासकर उन दिनों में जब किसी स्थल पर ज्यादा भीड़ होती है।
फूलों के कचरे के निस्तारण पर भी जोर
धार्मिक स्थलों पर पूजा और प्रसाद से निकलने वाले कचरे को देखते हुए फूलों के कचरे के प्रबंधन पर भी विशेष ध्यान दिया जाएगा। योजना के अनुसार फूलों के कचरे को जलाशयों में विसर्जित करने की अनुमति नहीं होगी।
वहीं, भंडारे, प्रसाद की दुकानें, फूलों की दुकानें, धर्मशालाएं, होटल और ढाबे जैसे प्रतिष्ठानों को निर्धारित नियमों के तहत बल्क वेस्ट जनरेटर के रूप में पंजीकृत किया जाएगा।
जियो-टैगिंग से चिन्हित होंगे कचरा फैलाने वाले हॉटस्पॉट
नई व्यवस्था में कचरा फैलने वाले संवेदनशील स्थानों की पहचान के लिए जियो-टैगिंग का इस्तेमाल किया जाएगा। इससे प्रशासन को यह पता लगाने में मदद मिलेगी कि किस स्थान पर बार-बार कचरा जमा हो रहा है।
फुटफॉल का डेटा और कचरे के ऑडिट को एक साथ इस्तेमाल करके प्रत्येक स्थल के लिए अलग-अलग सफाई व्यवस्था तैयार की जाएगी। इसका उद्देश्य केवल त्योहार या मेले के दौरान अस्थायी सफाई व्यवस्था करने के बजाय पूरे साल लगातार निगरानी रखना है।
सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुरूप तैयार हुआ प्लान
हरियाणा के शहरी स्थानीय निकाय विभाग ने यह खाका सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुरूप तैयार किया है। रिपोर्ट के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट ने 5 मई को Bhopal Municipal Corporation बनाम Dr Subhash C Pandey एवं अन्य मामले में मुख्य सचिवों को पर्यटन और धार्मिक स्थलों की पहचान कर ठोस कचरा प्रबंधन नियमों को लागू करने के लिए समर्पित व्यवस्था स्थापित करने का निर्देश दिया था।
अस्थायी सफाई व्यवस्था से आगे बढ़ने की तैयारी
हरियाणा सरकार का प्रस्तावित मॉडल उन स्थानों पर स्थायी और निगरानी आधारित कचरा प्रबंधन व्यवस्था विकसित करने पर केंद्रित है जहां पूरे साल बड़ी संख्या में लोग पहुंचते हैं। खासकर मेलों और धार्मिक आयोजनों के दौरान अचानक बढ़ने वाली भीड़ को ध्यान में रखते हुए अतिरिक्त सफाई कर्मचारी, कचरा उठाने वाले वाहन और लिटर-पिकिंग टीमें उपलब्ध कराई जाएंगी।
इस योजना से धार्मिक और पर्यटन स्थलों पर साफ-सफाई बनाए रखने के साथ-साथ कचरे को स्रोत पर अलग करने और उसके व्यवस्थित निस्तारण को बढ़ावा देने की कोशिश की जा रही है।
कुल मिलाकर, हरियाणा सरकार पर्यटन और धार्मिक स्थलों पर कचरा प्रबंधन को पारंपरिक सफाई व्यवस्था से आगे ले जाकर तकनीक आधारित बनाने की तैयारी कर रही है। पहले चरण में गुरुग्राम, पंचकूला और कुरुक्षेत्र के तीन प्रमुख स्थलों को शामिल किया गया है। हर 50 मीटर पर चार कूड़ेदान, IoT सेंसर, जियो-टैगिंग, डिजिटल डेटाबेस और नियमित कचरा ऑडिट के जरिए इन हाई-फुटफॉल वाले क्षेत्रों में सफाई व्यवस्था की लगातार निगरानी की जाएगी।
