29 सितंबर 2026 हरियाणा में किसानों की फसल संबंधी जानकारी के डिजिटल सत्यापन में देरी का मामला सामने आया है। राज्य के Meri Fasal Mera Byora (MFMB) पोर्टल पर दर्ज फसल क्षेत्र और वास्तविक स्थिति के बीच पाए गए अंतर वाले कुल क्षेत्र में से करीब 59 फीसदी क्षेत्र का सत्यापन अभी बाकी है। यह स्थिति ऐसे समय सामने आई है जब राज्य में धान की सरकारी खरीद शुरू होने वाली है।
22.35 लाख एकड़ क्षेत्र में मिली गड़बड़ी
उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, किसानों ने खरीफ सीजन के लिए राज्य में करीब 57 लाख एकड़ क्षेत्र में फसलों का पंजीकरण कराया है। इसमें लगभग 23 लाख एकड़ क्षेत्र पर परमानेंट यानी सामान्य किस्म के धान की फसल दर्ज की गई है।
जांच के दौरान करीब 22.35 लाख एकड़ फसल क्षेत्र mismatched पाया गया। इनमें से अब तक केवल लगभग 9.14 लाख एकड़ क्षेत्र का सत्यापन पूरा हो सका है। वहीं करीब 13.20 लाख एकड़ क्षेत्र अभी verification का इंतजार कर रहा है।
इस तरह mismatched क्षेत्र का करीब 41 फीसदी हिस्सा ही अब तक सत्यापित हुआ है, जबकि लगभग 59 फीसदी क्षेत्र लंबित है।
धान खरीद शुरू होने से पहले बढ़ी चिंता
हरियाणा में धान की सरकारी खरीद 29 सितंबर से शुरू होने वाली है। ऐसे में फसल और जमीन के क्षेत्रफल से संबंधित जानकारी का समय पर सत्यापन जरूरी माना जा रहा है।
MFMB पोर्टल पर पंजीकरण उन किसानों के लिए महत्वपूर्ण है जो अपनी फसल को मंडियों में न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर बेचना चाहते हैं। अगर किसान की फसल या क्षेत्र से जुड़ी जानकारी पोर्टल पर लंबित रहती है, तो खरीद प्रक्रिया के दौरान उसे परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।
सत्यापन में किन विभागों की भूमिका
फसल क्षेत्र के सत्यापन के लिए राजस्व विभाग और कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के अधिकारी मिलकर काम कर रहे हैं। विभागों का प्रयास है कि लंबित सत्यापन को जल्द पूरा किया जाए ताकि किसानों को फसल बेचने में किसी तरह की दिक्कत न हो।
अधिकारियों के अनुसार, सत्यापन प्रक्रिया को तेजी से पूरा करने के लिए संबंधित विभागों के कर्मचारी आपसी समन्वय से काम कर रहे हैं।
डिजिटल फसल सत्यापन में पहले भी आई थी चुनौती
रिपोर्ट के अनुसार, सरकार ने पिछले साल डिजिटल फसल सर्वे की योजना बनाई थी, लेकिन पटवारियों की कमी के कारण इसे पूरी तरह लागू नहीं किया जा सका। इसके बाद राजस्व विभाग ने गिरदावरी की प्रक्रिया के माध्यम से फसल की स्थिति दर्ज की।
इस साल डिजिटल फसल सत्यापन को अनिवार्य किया गया, लेकिन अगस्त में पटवारियों और कानूनगो के आंदोलन के कारण सत्यापन प्रक्रिया प्रभावित हुई। इसका असर अब लंबित मामलों की संख्या में भी दिखाई दे रहा है।
सिरसा में सबसे ज्यादा क्षेत्र लंबित
जिलावार आंकड़ों में सिरसा में mismatched क्षेत्र सबसे अधिक बताया गया है। यहां करीब 3 लाख एकड़ क्षेत्र mismatched पाया गया, जिसमें से लगभग 78,158 एकड़ का सत्यापन हो चुका है। करीब 2.27 लाख एकड़ क्षेत्र अभी लंबित है।
हिसार में 1.58 लाख एकड़ mismatched क्षेत्र में से लगभग 88 हजार एकड़ का सत्यापन बाकी है। वहीं महेंद्रगढ़ में 1.37 लाख एकड़ में से करीब 74 हजार एकड़ और भिवानी में 2.87 लाख एकड़ में से करीब 1.83 लाख एकड़ क्षेत्र का सत्यापन लंबित है।
धान वाले जिलों में भी कई मामले बाकी
हरियाणा के प्रमुख धान उत्पादक क्षेत्रों में भी फसल सत्यापन के मामले लंबित हैं। पानीपत में करीब 46,600 एकड़ mismatched क्षेत्र में से लगभग 22 हजार एकड़ की verification बाकी है। सोनीपत में करीब 64 हजार एकड़ mismatched क्षेत्र में से लगभग 27 हजार एकड़ अभी सत्यापन का इंतजार कर रहा है।
वहीं करनाल में स्थिति तुलनात्मक रूप से अलग है। यहां 62,771 एकड़ mismatched क्षेत्र में से लगभग 50 हजार एकड़ का सत्यापन पूरा हो चुका है। कैथल में करीब 35 हजार एकड़ mismatched क्षेत्र में लगभग 9,700 एकड़ लंबित है। कुरुक्षेत्र में 56 हजार एकड़ में से करीब 47 हजार एकड़ का सत्यापन पूरा किया जा चुका है।
किसानों को परेशानी से बचाने पर जोर
कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के एक अधिकारी के अनुसार, राजस्व और कृषि विभाग के अधिकारी मिलकर लंबित सत्यापन को पूरा करने में जुटे हैं। विभाग का उद्देश्य है कि फसल खरीद के समय किसानों को किसी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े।
फसल क्षेत्र का सही सत्यापन किसानों की मंडी बिक्री और MSP पर खरीद प्रक्रिया के लिए महत्वपूर्ण है। ऐसे में आने वाले दिनों में लंबित क्षेत्र के सत्यापन की गति पर विशेष नजर रहेगी।
