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पंजाब के 3,763 SC बहुल गांवों के विकास पर खर्च होंगे ₹750 करोड़, CM मान ने किया बड़ा ऐलान

25 सितंबर 2026 पंजाब सरकार ने राज्य के अनुसूचित जाति (SC) बहुल गांवों के विकास के लिए बड़ा कार्यक्रम घोषित किया है। मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने गुरुवार को सामाजिक न्याय, अधिकारिता एवं अल्पसंख्यक विभाग की कार्यप्रणाली की समीक्षा के दौरान 3,763 ऐसे गांवों के समग्र और समावेशी विकास के लिए ₹750 करोड़ से अधिक खर्च करने की घोषणा की, जहां अनुसूचित जाति की आबादी 40 प्रतिशत से अधिक है। सरकार के अनुसार, इस पहल का उद्देश्य ऐसे क्षेत्रों में संतुलित ग्रामीण विकास को बढ़ावा देना और जरूरी सुविधाओं को मजबूत करना है।

3,763 गांवों को विकास कार्यक्रम में किया गया शामिल

मुख्यमंत्री के अनुसार, राज्य के 3,763 गांवों को इस विशेष विकास कार्यक्रम के तहत शामिल किया गया है। इन गांवों में अनुसूचित जाति की आबादी 40 प्रतिशत से अधिक है।

सरकार का कहना है कि विकास कार्यों को केवल एक समान तरीके से लागू करने के बजाय प्रत्येक गांव की स्थानीय जरूरतों के आधार पर प्राथमिकता दी जाएगी। इसके लिए संबंधित जिलों के उपायुक्त यानी डिप्टी कमिश्नर विकास कार्यों की पहचान और प्राथमिकता तय करेंगे।

हर गांव को शुरुआत में मिलेंगे ₹20 लाख

कार्यक्रम के तहत प्रत्येक चिन्हित गांव को शुरुआत में ₹20 लाख की अनटाइड राशि उपलब्ध कराई जाएगी। इस राशि का इस्तेमाल गांव की स्थानीय जरूरतों के अनुसार किया जा सकेगा।

सरकार के मुताबिक, राशि के उचित उपयोग और अतिरिक्त जरूरतों के आकलन के बाद किसी गांव के लिए आवंटन बढ़ाया भी जा सकता है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि उपलब्ध सरकारी धन का इस्तेमाल उन कार्यों पर किया जाए, जिनसे स्थानीय लोगों को सबसे ज्यादा फायदा हो।

गांवों के लिए तैयार होगा Specific Village Development Plan

हर गांव के लिए एक Specific Village Development Plan (VDP) तैयार किया जाएगा। इस योजना के माध्यम से गांव की जरूरतों की पहचान कर विकास कार्यों को व्यवस्थित तरीके से आगे बढ़ाया जाएगा।

VDP के जरिए विकास कार्यों को जरूरत आधारित, समन्वित और परिणाम केंद्रित रखने पर जोर दिया जाएगा। सरकार का कहना है कि इससे अलग-अलग विभागों के काम में बेहतर तालमेल बनाने में मदद मिलेगी।

RO सिस्टम से लेकर स्कूल और लाइब्रेरी तक काम

मुख्यमंत्री के अनुसार, अनटाइड फंड का इस्तेमाल गांवों में जरूरी सार्वजनिक सुविधाओं और बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए किया जा सकता है।

इन कार्यों में RO सिस्टम, अतिरिक्त स्कूल कक्षाएं, लाइब्रेरी, एंबुलेंस, मोहल्ला क्लीनिक और सोलर स्ट्रीट लाइट जैसी सुविधाएं शामिल हैं। इसके अलावा गांव की जरूरत के हिसाब से अन्य नागरिक सुविधाओं को भी विकास कार्यों में शामिल किया जा सकता है।

सामाजिक न्याय विभाग होगा नोडल विभाग

इस पूरे कार्यक्रम के लिए सामाजिक न्याय, अधिकारिता एवं अल्पसंख्यक विभाग को नोडल विभाग बनाया गया है। वहीं ग्रामीण विकास और बागवानी विभाग आवश्यक सहयोग प्रदान करेंगे।

डिप्टी कमिश्नरों की भूमिका भी महत्वपूर्ण होगी, क्योंकि वे अपने-अपने जिलों के गांवों में स्थानीय जरूरतों के आधार पर विकास कार्यों को प्राथमिकता देंगे। इससे अलग-अलग गांवों में उनकी वास्तविक जरूरत के अनुसार सरकारी राशि खर्च करने की व्यवस्था बनाई जाएगी।

लंबे समय से वंचित क्षेत्रों तक विकास पहुंचाने पर जोर

मुख्यमंत्री भगवंत मान ने कहा कि हर गांव को विकास के समान अवसर मिलने चाहिए और विकास उन समुदायों तथा क्षेत्रों तक भी पहुंचना चाहिए, जो लंबे समय से वंचित रहे हैं।

सरकार की ओर से जारी जानकारी के अनुसार, इस कार्यक्रम का उद्देश्य केवल सरकारी राशि खर्च करना नहीं, बल्कि गांवों में सुविधाओं को बेहतर बनाकर लोगों के जीवन स्तर में सुधार लाना है।

रोजगार और स्थानीय जरूरतों को भी मिल सकता है लाभ

गांवों में बेहतर बुनियादी सुविधाओं के विकास से स्थानीय लोगों को स्वास्थ्य, शिक्षा, पेयजल और सार्वजनिक सुविधाओं के स्तर पर लाभ मिलने की संभावना है। अलग-अलग गांवों की जरूरत के अनुसार विकास कार्य तय किए जाने से स्थानीय स्तर पर जरूरी परियोजनाओं को प्राथमिकता दी जा सकेगी।

सरकार के अनुसार, इस पहल के जरिए सामाजिक न्याय और ग्रामीण विकास को एक साथ आगे बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है।

विकास कार्यों की निगरानी और फंड के इस्तेमाल पर जोर

सरकार ने स्पष्ट किया है कि शुरुआती राशि के उचित उपयोग और अतिरिक्त जरूरतों के आकलन के बाद आगे की राशि बढ़ाई जा सकती है। ऐसे में गांवों के लिए तैयार होने वाले विकास प्लान और खर्च की उपयोगिता कार्यक्रम के अगले चरणों के लिए महत्वपूर्ण होगी।

इस व्यवस्था के तहत स्थानीय जरूरतों की पहचान कर उपलब्ध संसाधनों को प्राथमिकता वाले कार्यों पर खर्च करने का लक्ष्य रखा गया है।

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