24 सितंबर 2026 देशभर में बुधवार को 11वां आयुर्वेद दिवस मनाया गया। इस अवसर पर लुधियाना के वरिष्ठ आयुर्वेद चिकित्सक डॉ. आर. वत्स्यायन ने अपने साथी चिकित्सकों और आयुर्वेद की नई पीढ़ी के विशेषज्ञों से इस प्राचीन भारतीय चिकित्सा पद्धति को अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाने और इसे जनसुलभ बनाने की अपील की।
डॉ. आर. वत्स्यायन राष्ट्रीय आयुर्वेद विद्यापीठ से भी जुड़े हैं। उन्होंने आयुर्वेद दिवस के अवसर पर लोगों और आयुर्वेद समुदाय को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि आज के तेज रफ्तार जीवन में स्वास्थ्य और कल्याण को प्राथमिकता देना बेहद जरूरी है। इस वर्ष आयुर्वेद दिवस की थीम ‘Ayurveda for a healthier tomorrow’ रखी गई है।
आयुर्वेद को जनसुलभ बनाने पर जोर
डॉ. वत्स्यायन ने कहा कि आयुर्वेद को केवल पारंपरिक चिकित्सा पद्धति के रूप में देखने के बजाय इसे आज की स्वास्थ्य संबंधी जरूरतों से जोड़ने की आवश्यकता है। उनके अनुसार, आधुनिक जीवनशैली में लोगों के बीच स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाना और बचाव आधारित स्वास्थ्य देखभाल को प्रोत्साहित करना महत्वपूर्ण है।
उन्होंने आयुर्वेद के पारंपरिक ज्ञान को वर्तमान समय की स्वास्थ्य जरूरतों के साथ जोड़ने पर जोर दिया। उनका कहना है कि इस तरह आयुर्वेद स्वस्थ भविष्य के निर्माण में अपनी भूमिका निभा सकता है।
रोकथाम आधारित स्वास्थ्य देखभाल पर ध्यान
आयुर्वेद दिवस के अवसर पर डॉ. वत्स्यायन ने स्वस्थ जीवनशैली के महत्व को भी रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य को केवल बीमारी होने के बाद इलाज तक सीमित नहीं रखना चाहिए, बल्कि बीमारी से बचाव और बेहतर जीवनशैली पर भी ध्यान देना चाहिए।
आयुर्वेद में संतुलित जीवन, उचित आहार, सही आचरण और सकारात्मक सोच को महत्व दिया जाता है। डॉ. वत्स्यायन ने बताया कि दैनिक जीवन में इन पहलुओं पर ध्यान देने से स्वास्थ्य और जीवनशैली के प्रति अधिक संतुलित दृष्टिकोण विकसित किया जा सकता है।
आधुनिक जरूरतों के साथ पारंपरिक ज्ञान का मेल
डॉ. वत्स्यायन ने पारंपरिक ज्ञान को आधुनिक स्वास्थ्य जरूरतों से जोड़ने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि आज की पीढ़ी की जीवनशैली और स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियां पहले की तुलना में अलग हैं। ऐसे में आयुर्वेद के सिद्धांतों को वर्तमान परिस्थितियों के संदर्भ में लोगों तक पहुंचाना जरूरी है।
उनके अनुसार, आयुर्वेद की उपयोगिता को आम लोगों तक पहुंचाने के लिए चिकित्सकों और विशेषज्ञों को जागरूकता बढ़ाने की दिशा में काम करना चाहिए। इससे लोगों को स्वस्थ जीवनशैली और निवारक स्वास्थ्य देखभाल के बारे में जानकारी मिल सकती है।
नई पीढ़ी के विशेषज्ञों की भूमिका अहम
आयुर्वेद को आगे बढ़ाने में नई पीढ़ी के विशेषज्ञों की भूमिका को भी महत्वपूर्ण बताया गया। डॉ. वत्स्यायन ने अपने साथियों और युवा विशेषज्ञों से इस चिकित्सा पद्धति को अधिक सार्वजनिक और लोगों के लिए आसान बनाने की दिशा में काम करने का आह्वान किया।
उन्होंने कहा कि आयुर्वेद केवल एक दिन मनाए जाने वाला अवसर नहीं है, बल्कि यह भारतीय विरासत के महत्वपूर्ण अध्याय को आगे बढ़ाने और उसके प्रति जिम्मेदारी को दोहराने का अवसर भी है।
संतुलित जीवन का संदेश
इस वर्ष के आयुर्वेद दिवस के आयोजन में स्वास्थ्य और संतुलित जीवन पर विशेष जोर दिया गया। आयुर्वेद दिवस को निश्चित तारीख पर मनाने का यह दूसरा वर्ष है। रिपोर्ट के अनुसार, यह दिन उस समय रखा गया है जब दिन और रात लगभग 12-12 घंटे के संतुलन में होते हैं। इस प्रतीकात्मक संतुलन को आयुर्वेद में जीवन में संतुलन के विचार से जोड़ा गया है।
डॉ. वत्स्यायन ने इसी संदर्भ में उचित आहार, सही व्यवहार और सकारात्मक सोच जैसे पहलुओं को दैनिक जीवन का हिस्सा बनाने पर जोर दिया। उनका संदेश लोगों को स्वास्थ्य को प्राथमिकता देने और जीवनशैली में संतुलन बनाए रखने की दिशा में प्रेरित करने वाला रहा।
आयुर्वेद दिवस का उद्देश्य
आयुर्वेद दिवस के माध्यम से देश में आयुर्वेद और पारंपरिक भारतीय चिकित्सा ज्ञान के प्रति जागरूकता बढ़ाने का प्रयास किया जाता है। इस अवसर पर चिकित्सकों, विशेषज्ञों और आम लोगों को स्वास्थ्य तथा जीवनशैली से जुड़े आयुर्वेदिक दृष्टिकोण के बारे में जानकारी देने पर जोर रहता है।
लुधियाना के वरिष्ठ आयुर्वेद विशेषज्ञ डॉ. आर. वत्स्यायन का आह्वान भी इसी व्यापक संदेश से जुड़ा रहा कि पारंपरिक ज्ञान को वर्तमान समय की जरूरतों के साथ जोड़कर लोगों तक पहुंचाया जाए।
