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जालंधर में वोटर लिस्ट रिवीजन के दौरान NRIs की बढ़ी परेशानी, विदेश से सत्यापन में आ रही दिक्कत

24 सितंबर 2026: पंजाब में चल रही मतदाता सूची की Special Intensive Revision (SIR) प्रक्रिया के बीच विदेशों में रहने वाले जालंधर के कई NRI मतदाताओं को मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। लंबे समय से विदेश में रह रहे ऐसे भारतीय नागरिक, जिन्होंने किसी दूसरे देश की नागरिकता नहीं ली है और भारत में मतदान का अधिकार रखते हैं, उनके लिए मतदाता सूची में नाम का सत्यापन कराना चुनौती बन गया है।

समस्या खास तौर पर उन NRI मतदाताओं के सामने आ रही है, जिनके परिवार या करीबी रिश्तेदार अब जालंधर में नहीं रहते। ऐसे लोगों को Booth Level Officers (BLOs) के स्तर पर सत्यापन की प्रक्रिया पूरी करने में परेशानी हो रही है। कुछ मामलों में ड्राफ्ट मतदाता सूची में नाम नहीं होने के बाद विदेश में रह रहे मतदाताओं को आगे की प्रक्रिया के लिए सुनवाई का सामना करना पड़ रहा है।

विदेश में रहने वाले मतदाताओं के सामने बड़ी चुनौती

SIR प्रक्रिया के तहत मतदाता रिकॉर्ड का सत्यापन पुराने चुनावी रिकॉर्ड के आधार पर किया जा रहा है। इस प्रक्रिया में BLOs ने घर-घर जाकर मतदाताओं से Enumeration Forms भरवाए थे। इन फॉर्म में परिवार के सदस्यों, EPIC नंबर और विधानसभा क्षेत्र जैसी जानकारी शामिल थी।

जिन मतदाताओं के फॉर्म समय पर जमा नहीं हो सके या जिनकी जानकारी पुराने रिकॉर्ड से मैच नहीं हो पाई, उनके नाम ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में दिखाई नहीं दिए। विदेश में रहने वाले कई NRI मतदाताओं के लिए यह स्थिति और मुश्किल हो गई, क्योंकि वे खुद मौके पर मौजूद नहीं थे।

एक NRI ने बताई अपनी परेशानी

रिपोर्ट के अनुसार, कपूरथला के पास अथोली गांव से जुड़े एक NRI ने अपनी परेशानी साझा की। वह वर्ष 2002 में कनाडा चले गए थे और उनके पास भारत में संपत्ति भी है। उन्होंने SIR के लिए जरूरी दस्तावेज जमा किए, लेकिन इसके बावजूद उनका नाम ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में नहीं मिला।

इसके बाद उन्हें सुनवाई के लिए व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने को कहा गया। अधिकारियों की ओर से उन्हें बताया गया कि उनकी तरफ से परिवार का कोई सदस्य प्रतिनिधित्व कर सकता है, लेकिन विदेश में रहने वाले इस व्यक्ति के भारत में कोई परिवार के सदस्य नहीं हैं। ऐसी स्थिति में विदेश से प्रक्रिया पूरी करना उनके लिए चुनौती बन गया।

जालंधर में करीब 1.8 लाख नाम ड्राफ्ट सूची से बाहर

यह मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि जालंधर में ड्राफ्ट मतदाता सूची में करीब 1.8 लाख मतदाताओं के नाम शामिल नहीं हो पाए। रिपोर्ट के मुताबिक, इनमें ऐसे मतदाता भी हैं जिनके Enumeration Forms प्राप्त नहीं हुए या जो अपने दिए गए पते पर मौजूद नहीं मिले।

BLOs की ओर से कई बार संपर्क करने के प्रयास के बावजूद जिन मतदाताओं से संपर्क नहीं हो सका, उनके मामलों को भी आगे सत्यापन की प्रक्रिया से गुजरना पड़ रहा है।

अधिकारियों ने बताया समाधान का विकल्प

जालंधर के Deputy Commissioner-cum-District Election Officer Varjeet Walia के अनुसार, जिन NRI मतदाताओं को परेशानी हो रही है, वे सुनवाई के दौरान किसी भरोसेमंद व्यक्ति की मदद ले सकते हैं।

अधिकारियों ने बताया कि NRI मतदाता की ओर से कोई परिचित व्यक्ति, यहां तक कि घरेलू सहायक भी, निर्धारित प्रक्रिया में प्रतिनिधित्व कर सकता है। यदि ऐसा कोई व्यक्ति भी उपलब्ध नहीं है, तो कुछ मामलों में संबंधित मतदाता को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने से छूट दी जा सकती है और डिजिटल माध्यम से सुनवाई में शामिल होने का विकल्प दिया जा सकता है।

NRI मतदाताओं के लिए अलग प्रावधान

भारत में रहने वाले पात्र मतदाताओं के अलावा विदेश में रहने वाले भारतीय नागरिकों के लिए चुनावी प्रक्रिया में अलग प्रावधान भी मौजूद हैं। Election Commission के Citizen Service Portal पर NRI मतदाताओं के लिए Form 6A उपलब्ध है। यह फॉर्म ऐसे भारतीय नागरिकों के लिए है जिन्होंने किसी अन्य देश की नागरिकता हासिल नहीं की है।

SIR के दौरान जिन मतदाताओं का नाम ड्राफ्ट सूची में नहीं है, उन्हें निर्धारित अवधि में दावे और आपत्तियां दर्ज करने का अवसर दिया गया है। पंजाब में इस प्रक्रिया के लिए 13 अगस्त से 12 सितंबर तक का समय निर्धारित किया गया था।

अंतिम मतदाता सूची कब जारी होगी?

जालंधर में SIR के तहत दावे और आपत्तियों की प्रक्रिया पूरी होने के बाद अंतिम मतदाता सूची तैयार की जाएगी। रिपोर्ट के अनुसार, दावों और आपत्तियों के निपटारे की अंतिम तारीख 8 अक्टूबर निर्धारित है, जबकि अंतिम Electoral Roll 12 अक्टूबर 2026 को प्रकाशित होने वाली है।

NRI मतदाताओं के अधिकारों पर ध्यान जरूरी

विदेश में रहने वाले भारतीय नागरिकों के लिए मतदाता सूची में अपना नाम बनाए रखना कई बार स्थानीय स्तर पर सत्यापन की उपलब्धता पर निर्भर हो जाता है। खासकर वे लोग जिनके परिवार अब अपने पुराने गांव या शहर में नहीं रहते, उनके लिए घर-घर होने वाली प्रक्रिया में शामिल होना आसान नहीं होता।

जालंधर में सामने आया मामला बताता है कि विदेश में रहने वाले पात्र मतदाताओं तक सत्यापन और सुनवाई की प्रक्रिया की जानकारी पहुंचाना महत्वपूर्ण है। अधिकारियों ने डिजिटल सुनवाई और प्रतिनिधि के माध्यम से प्रक्रिया पूरी करने जैसे विकल्प बताए हैं, जिससे ऐसे मतदाताओं को राहत मिल सकती है।

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