22 सितंबर 2026: पंजाब के केमिस्टों ने रिटेल फार्मेसियों में CCTV कैमरे अनिवार्य करने के केंद्र सरकार के प्रस्ताव पर आपत्ति जताई है। पंजाब केमिस्ट एसोसिएशन (PCA) ने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय को पत्र भेजकर कहा है कि प्रस्तावित व्यवस्था से मरीजों की निजी मेडिकल जानकारी की सुरक्षा और छोटे मेडिकल स्टोरों पर पड़ने वाले आर्थिक व तकनीकी बोझ को लेकर गंभीर चिंताएं पैदा हो सकती हैं।
प्रस्तावित नियम में क्या है?
केंद्र सरकार ने Drugs Rules, 1945 में संशोधन का प्रस्ताव रखा है। प्रस्तावित Rule 65(2A) के तहत प्रिस्क्रिप्शन दवाएं बेचने वाली रिटेल फार्मेसियों में CCTV surveillance की व्यवस्था अनिवार्य किए जाने का प्रस्ताव है।
प्रस्ताव के अनुसार, फार्मेसी परिसर में लगाए गए CCTV सिस्टम के जरिए दवाओं की बिक्री और उससे जुड़ी गतिविधियों की निगरानी की जा सकेगी। रिकॉर्डिंग को कम से कम तीन महीने तक सुरक्षित रखने का प्रावधान प्रस्तावित है। स्वास्थ्य मंत्रालय ने इस प्रस्ताव पर संबंधित पक्षों और आम लोगों से आपत्तियां एवं सुझाव भी मांगे हैं।
पंजाब केमिस्ट एसोसिएशन ने जताई मरीजों की प्राइवेसी की चिंता
PCA का कहना है कि मेडिकल स्टोर पर दवा खरीदते समय मरीज कई बार ऐसी स्वास्थ्य समस्याओं से जुड़ी जानकारी साझा करते हैं जो निजी और संवेदनशील होती है। इनमें प्रजनन और यौन स्वास्थ्य, मानसिक स्वास्थ्य, न्यूरोलॉजिकल समस्याएं और लंबे समय से चल रही बीमारियां शामिल हो सकती हैं।
एसोसिएशन के मुताबिक, अगर दवा खरीदने के दौरान ग्राहक और फार्मासिस्ट के बीच बातचीत CCTV में रिकॉर्ड होती है, तो इससे संवेदनशील स्वास्थ्य जानकारी सामने आने का खतरा पैदा हो सकता है।
परिवार के दूसरे सदस्य की मेडिकल जानकारी भी रिकॉर्ड हो सकती है
केमिस्ट एसोसिएशन ने परिवार की प्राइवेसी को लेकर भी सवाल उठाया है। कई बार किसी व्यक्ति की दवा परिवार का दूसरा सदस्य मेडिकल स्टोर से खरीदकर ले जाता है।
ऐसी स्थिति में CCTV फुटेज में दवा खरीदने वाला व्यक्ति तो दिखाई देगा, लेकिन दवा जिस मरीज के लिए खरीदी जा रही है, उसकी स्वास्थ्य स्थिति के बारे में भी अप्रत्यक्ष जानकारी सामने आ सकती है। PCA ने इसे मरीजों की निजता से जुड़ा महत्वपूर्ण मुद्दा बताया है।
CCTV से हर तरह की अनियमितता का पता लगाना संभव नहीं
PCA ने यह भी सवाल उठाया है कि केवल CCTV फुटेज के आधार पर दवाओं की बिक्री की पूरी निगरानी संभव नहीं है। एसोसिएशन के अनुसार, कैमरा यह दिखा सकता है कि कोई लेनदेन हुआ, लेकिन इससे यह तय नहीं किया जा सकता कि संबंधित प्रिस्क्रिप्शन असली था या नहीं, दवा सही मरीज के लिए थी या नहीं और बिक्री से जुड़े सभी कानूनी नियमों का पालन हुआ या नहीं।
एसोसिएशन ने कहा कि प्रिस्क्रिप्शन, बिल, रजिस्टर और अन्य नियामकीय रिकॉर्ड पहले से ही दवाओं की बिक्री की निगरानी में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
छोटे मेडिकल स्टोरों पर आर्थिक बोझ की चिंता
केमिस्टों ने प्रस्तावित CCTV व्यवस्था को लेकर आर्थिक बोझ का मुद्दा भी उठाया है। कैमरा, DVR/NVR सिस्टम, स्टोरेज, वायरिंग, इंटरनेट कनेक्टिविटी और रखरखाव की लागत छोटे मेडिकल स्टोरों के लिए अतिरिक्त खर्च बन सकती है।
देश के अन्य केमिस्ट संगठनों ने भी इसी तरह की चिंता जताई है। ऑल इंडिया ऑर्गनाइजेशन ऑफ केमिस्ट्स एंड ड्रगिस्ट्स (AIOCD) ने अनुमान लगाया है कि कई छोटे और मध्यम आकार के मेडिकल स्टोरों पर इस तरह के सिस्टम की लागत लगभग ₹50,000 से ₹1 लाख या उससे अधिक हो सकती है।
बिजली और तकनीकी समस्याओं को लेकर भी सवाल
PCA ने कहा कि ग्रामीण और छोटे इलाकों में बिजली कटौती, इंटरनेट की खराब कनेक्टिविटी और तकनीकी कर्मचारियों की कमी के कारण लगातार CCTV रिकॉर्डिंग बनाए रखना चुनौतीपूर्ण हो सकता है।
कैमरा खराब होने, DVR या स्टोरेज डिवाइस में समस्या आने जैसी परिस्थितियों में दुकानदारों के सामने अतिरिक्त दिक्कतें खड़ी हो सकती हैं। इसलिए एसोसिएशन ने नियम लागू करने से पहले व्यावहारिक परिस्थितियों पर विचार करने की मांग की है।
रिकॉर्डिंग की सुरक्षा के लिए स्पष्ट नियमों की मांग
PCA ने CCTV फुटेज के इस्तेमाल और सुरक्षा को लेकर भी स्पष्ट दिशा-निर्देश तय करने की मांग की है। एसोसिएशन जानना चाहता है कि रिकॉर्डिंग को कौन देख या कॉपी कर सकेगा, किन परिस्थितियों में इसे किसी तीसरे पक्ष के साथ साझा किया जा सकेगा और अनधिकृत पहुंच या डेटा लीक को कैसे रोका जाएगा।
एसोसिएशन ने यह भी कहा है कि निर्धारित अवधि पूरी होने के बाद रिकॉर्डिंग को सुरक्षित तरीके से हटाने की प्रक्रिया स्पष्ट होनी चाहिए।
केमिस्ट एसोसिएशन नियम के उद्देश्य के खिलाफ नहीं
PCA ने स्पष्ट किया कि वह प्रिस्क्रिप्शन दवाओं की अवैध बिक्री रोकने और दवाओं के सही तरीके से वितरण की सरकारी कोशिश का समर्थन करता है। प्रस्तावित नियम का उद्देश्य Schedule H, H1 और X जैसी प्रिस्क्रिप्शन दवाओं की अनधिकृत बिक्री पर निगरानी मजबूत करना है।
हालांकि, एसोसिएशन का कहना है कि सभी रिटेल फार्मेसियों पर एक समान CCTV व्यवस्था लागू करने से पहले मरीजों की निजता, डेटा सुरक्षा और छोटे मेडिकल स्टोरों की व्यावहारिक समस्याओं को ध्यान में रखना जरूरी है।
सरकार ने मांगे हैं सुझाव
केंद्र सरकार ने प्रस्तावित संशोधन पर stakeholders और आम लोगों से सुझाव और आपत्तियां मांगी हैं। ऐसे में पंजाब केमिस्ट एसोसिएशन की ओर से उठाए गए मुद्दे इस प्रक्रिया का हिस्सा होंगे।
अब यह देखना होगा कि अंतिम नियम में मरीजों की प्राइवेसी, दवाओं की निगरानी और छोटे मेडिकल स्टोरों पर पड़ने वाले आर्थिक बोझ के बीच किस तरह संतुलन बनाया जाता है।
