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जालंधर में स्कूलों के आसपास 500 मीटर का क्षेत्र होगा ‘ड्रग-फ्री जोन’, पंजाब में नई पहल

22 सितंबर 2026: पंजाब में छात्रों को नशे से दूर रखने और स्कूलों के आसपास सुरक्षित माहौल तैयार करने के लिए एक नई पहल शुरू की गई है। राज्य के सभी सरकारी, सरकारी सहायता प्राप्त और निजी स्कूलों को अपने परिसर के 500 मीटर के दायरे को ‘ड्रग-फ्री जोन’ के रूप में चिन्हित करने के निर्देश दिए गए हैं। यह कदम केंद्र सरकार के तीन वर्षीय Drug-Free School Action Plan 2026-29 का हिस्सा है।

स्कूलों के बाहर लगाए जाएंगे सूचना बोर्ड

जारी निर्देशों के अनुसार स्कूलों को अपने परिसर के बाहर सूचना बोर्ड लगाना होगा, जिसमें 500 मीटर के क्षेत्र को ड्रग-फ्री जोन घोषित किए जाने की जानकारी दी जाएगी। इसका उद्देश्य छात्रों, अभिभावकों और आसपास के लोगों को नशे के खिलाफ जागरूक करना है।

पंजाब के State Council of Educational Research and Training (SCERT) की ओर से स्कूलों को इन दिशा-निर्देशों का पालन करने के लिए कहा गया है। यह निर्देश केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय के Department of School Education and Literacy की ओर से शुरू किए गए तीन वर्षीय एक्शन प्लान के तहत जारी किए गए हैं।

ड्रग-फ्री स्कूल पोर्टल पर करना होगा रजिस्ट्रेशन

इस अभियान के तहत स्कूलों को Drug Free School Portal पर अपना पंजीकरण भी कराना होगा। इसके साथ ही स्कूलों को निर्धारित मानकों के आधार पर अपना सेल्फ-असेसमेंट करना होगा।

जो स्कूल निर्धारित आवश्यकताओं को पूरा करेंगे, वे पोर्टल पर खुद को ‘Drug Free School’ घोषित कर सकेंगे। हालांकि, यह घोषणा अंतिम नहीं होगी। शिक्षा विभाग की टीमें औचक निरीक्षण के जरिए स्कूलों की स्थिति और दावे का सत्यापन करेंगी।

छात्रों को नशे से बचाने पर जोर

इस योजना का मुख्य उद्देश्य स्कूलों में बच्चों और युवाओं के लिए सुरक्षित, स्वस्थ, तंबाकू मुक्त और नशा मुक्त वातावरण तैयार करना है। इसके तहत केवल स्कूल परिसर तक ही सीमित रहने के बजाय आसपास के 500 मीटर क्षेत्र को भी अभियान से जोड़ा जा रहा है।

स्कूलों को नियमित रूप से नशे के खिलाफ जागरूकता कार्यक्रम और रोकथाम से जुड़ी शैक्षणिक गतिविधियां आयोजित करने के लिए कहा गया है।

अभिभावकों और शिक्षकों की भी होगी भागीदारी

नशे की समस्या से निपटने के लिए स्कूलों में केवल विद्यार्थियों को जागरूक करना पर्याप्त नहीं माना गया है। एक्शन प्लान में अभिभावकों को भी अभियान से जोड़ने और बच्चों को जरूरी काउंसलिंग उपलब्ध कराने पर जोर दिया गया है।

स्कूलों में तंबाकू और ड्रग्स के दुरुपयोग से संबंधित मानकीकृत प्रशिक्षण तथा सूचना, शिक्षा और संचार सामग्री का इस्तेमाल भी किया जाएगा।

नियमित जागरूकता और काउंसलिंग पर फोकस

स्कूलों को नशे के दुष्प्रभावों के बारे में विद्यार्थियों को जानकारी देने के साथ-साथ रोकथाम से जुड़ी गतिविधियां आयोजित करनी होंगी। जरूरत पड़ने पर छात्रों के लिए काउंसलिंग की व्यवस्था भी की जाएगी।

इस पहल का उद्देश्य शुरुआती स्तर पर ही बच्चों और युवाओं को नशे के खतरे के प्रति जागरूक करना और उन्हें इससे दूर रखने के लिए स्कूल, परिवार और समुदाय की भूमिका मजबूत करना है।

तीन साल के एक्शन प्लान का हिस्सा

500 मीटर का ड्रग-फ्री जोन बनाने की पहल 2026 से 2029 तक चलने वाले तीन वर्षीय Drug-Free School Action Plan के तहत की जा रही है। यह योजना स्कूलों में नशीले पदार्थों के इस्तेमाल की रोकथाम के लिए कई स्तरों पर गतिविधियों को बढ़ावा देने पर केंद्रित है।

जानकारी के अनुसार, इस एक्शन प्लान की तैयारी Narco-Coordination Centre (NCORD) की 10वीं उच्चस्तरीय बैठक के दौरान दिए गए निर्देशों के बाद की गई है। इसका उद्देश्य शैक्षणिक संस्थानों में नशे की रोकथाम से जुड़े उपायों को और मजबूत करना है।

स्कूलों के आसपास सुरक्षित माहौल बनाने की कोशिश

जालंधर सहित पंजाब के स्कूलों के आसपास 500 मीटर के क्षेत्र को ड्रग-फ्री जोन के रूप में चिन्हित करने की पहल को छात्रों के लिए सुरक्षित वातावरण तैयार करने के प्रयास के रूप में देखा जा रहा है।

स्कूलों की ओर से सूचना बोर्ड लगाने, पोर्टल पर पंजीकरण, सेल्फ-असेसमेंट, जागरूकता कार्यक्रम, अभिभावकों की भागीदारी और काउंसलिंग जैसी गतिविधियों के जरिए नशे की रोकथाम पर काम किया जाएगा।

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