21 सितंबर, 2026 : दिल्ली में चल रहे Special Intensive Revision (SIR) के दौरान मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार की वोटर मैपिंग को लेकर सवाल उठाए गए हैं। पूर्व सांसद और तृणमूल कांग्रेस (TMC) नेता साकेत गोखले ने चुनाव आयोग से स्पष्टीकरण मांगा है कि दिल्ली की ड्राफ्ट मतदाता सूची में दर्ज ज्ञानेश कुमार के नाम को पिछली SIR मतदाता सूचियों से किस आधार पर जोड़ा गया।
साकेत गोखले ने क्या दावा किया?
साकेत गोखले ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए दावा किया कि दिल्ली की ड्राफ्ट SIR मतदाता सूची में “Gyanesh Kumar, son of Subodh Kumar” नाम से एंट्री मौजूद है। उन्होंने कहा कि उन्होंने इसी नाम और पिता के नाम वाली एंट्री को दिल्ली, उत्तर प्रदेश और केरल की पिछली SIR सूचियों में तलाशने की कोशिश की, लेकिन उन्हें कोई समान रिकॉर्ड नहीं मिला।
गोखले ने इसी आधार पर चुनाव आयोग से सवाल किया कि अगर पिछली SIR सूची में संबंधित एंट्री मौजूद नहीं थी, तो वर्तमान मतदाता सूची में ज्ञानेश कुमार की एंट्री को किस पुराने रिकॉर्ड से मैप किया गया।
SIR में ‘Unmapped’ और ‘Logical Discrepancy’ क्या है?
SIR प्रक्रिया के तहत वर्तमान मतदाता रिकॉर्ड को पिछली SIR सूचियों के साथ मिलाने की प्रक्रिया की जा रही है। रिपोर्ट के अनुसार, जिन मतदाताओं की जानकारी पिछली SIR सूची से मैप नहीं हो पाती, उन्हें ‘unmapped’ श्रेणी में रखा जा सकता है। वहीं कुछ तरह की असंगतियों को ‘logical discrepancy’ के तौर पर चिन्हित किया जा सकता है, जिसके बाद संबंधित मतदाता को नोटिस देकर स्पष्टीकरण मांगा जा सकता है।
गोखले का सवाल इसी प्रक्रिया से जुड़ा है। उनका कहना है कि अगर ज्ञानेश कुमार की एंट्री पिछली SIR सूची से मैप नहीं होती, तो उनकी वर्तमान एंट्री को भी संबंधित प्रक्रिया के तहत चिन्हित किया जाना चाहिए था।
चुनाव आयोग से चार सवाल
गोखले ने चुनाव आयोग के सामने चार प्रमुख सवाल रखे। उन्होंने पूछा कि ज्ञानेश कुमार को पिछली SIR की किस राज्य की मतदाता सूची में मैप किया गया है और क्या वह 2002-03 के दौरान उस सूची में पंजीकृत मतदाता थे।
उन्होंने यह भी पूछा कि अगर केरल, दिल्ली और उत्तर प्रदेश की पिछली SIR सूचियों में उनके नाम का समान रिकॉर्ड नहीं है, तो वर्तमान मतदाता सूची में उनकी एंट्री किस आधार पर मौजूद है।
इसके अलावा उन्होंने यह सवाल भी उठाया कि क्या ज्ञानेश कुमार को ‘unmapped voter’ या ‘logical discrepancy’ के संबंध में कोई नोटिस जारी किया गया है।
ज्ञानेश कुमार कौन हैं?
ज्ञानेश कुमार 1988 बैच के केरल कैडर के IAS अधिकारी हैं। उन्होंने फरवरी 2025 में भारत के 26वें मुख्य चुनाव आयुक्त के रूप में पदभार संभाला था। उनके करियर में केरल, केंद्र सरकार और दिल्ली में विभिन्न जिम्मेदारियां शामिल रही हैं।
गोखले ने उनके उत्तर प्रदेश में जन्म, केरल कैडर से जुड़े होने और दिल्ली में पोस्टिंग के संदर्भ में भी सवाल उठाया है कि उनकी मौजूदा दिल्ली वोटर एंट्री को पिछली SIR सूची से किस राज्य के रिकॉर्ड के आधार पर जोड़ा गया।
दिल्ली SIR को लेकर पहले से जारी है बहस
दिल्ली में SIR को लेकर मतदाता रिकॉर्ड की जांच और नोटिस जारी किए जाने पर पहले से चर्चा चल रही है। दिल्ली के ड्राफ्ट मतदाता रोल में बड़ी संख्या में नामों को हटाया गया है और लाखों मतदाताओं को ‘No Mapping’ या ‘Logical Discrepancy’ जैसी श्रेणियों के तहत नोटिस दिए जाने की जानकारी सामने आई है।
इसी मुद्दे को लेकर सुप्रीम कोर्ट में भी याचिका लंबित है। याचिकाकर्ताओं ने नोटिस पाने वाले मतदाताओं के नाम और नोटिस जारी करने के कारणों को सार्वजनिक करने तथा ‘Logical Discrepancy’ तय करने के मानदंडों में अधिक पारदर्शिता की मांग की है। सुप्रीम कोर्ट इस मामले पर 22 सितंबर को सुनवाई करने वाला है।
प्रमुख लोगों की वोटर एंट्री भी हुई चिन्हित
SIR के दौरान कई प्रमुख लोगों की मतदाता एंट्री में भी विसंगतियां चिन्हित होने की खबर सामने आई है। चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया है कि किसी मतदाता को नोटिस जारी होने का मतलब यह नहीं है कि उसका नाम स्वतः अंतिम मतदाता सूची से हटा दिया जाएगा।
उदाहरण के तौर पर, दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता की एंट्री में उम्र से जुड़ी विसंगति चिन्हित होने के बाद दस्तावेजों के सत्यापन के आधार पर उनकी एंट्री को अंतिम सूची में शामिल करने के लिए वैध माना गया। चुनाव आयोग ने चुनाव आयुक्त एसएस संधू की एंट्री के बारे में भी सत्यापन के बाद उसे अंतिम सूची में शामिल करने की बात कही है।
ज्ञानेश कुमार की एंट्री पर अभी स्पष्टीकरण का इंतजार
साकेत गोखले द्वारा उठाए गए सवालों पर उपलब्ध रिपोर्ट में चुनाव आयोग की ओर से ज्ञानेश कुमार की व्यक्तिगत वोटर मैपिंग को लेकर कोई विस्तृत स्पष्टीकरण दर्ज नहीं है। रिपोर्ट में यह भी स्पष्ट किया गया है कि पिछली SIR सूचियों में नाम नहीं मिलने और नोटिस जारी होने संबंधी दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि उपलब्ध जानकारी से नहीं हो सकी है।
इसलिए फिलहाल यह मामला मुख्य रूप से वोटर रिकॉर्ड की मैपिंग और SIR प्रक्रिया की पारदर्शिता से जुड़ा सवाल है। उपलब्ध जानकारी के आधार पर इससे ज्ञानेश कुमार की नागरिकता को लेकर कोई निष्कर्ष नहीं निकलता।
