17 सितंबर, 2026 : रोहतक स्थित पंडित भगवत दयाल शर्मा पोस्ट ग्रेजुएट इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (PGIMS) में आयुष्मान भारत योजना के तहत आने वाले मरीजों की संख्या बढ़ाने के लिए नई व्यवस्था शुरू की गई है। संस्थान ने मेडिकल सुपरिंटेंडेंट के कार्यालय में एक डेडिकेटेड आयुष्मान सेल का गठन किया है। इसके साथ ही अलग-अलग विभागों में आयुष्मान योजना से जुड़े काम को सुचारू बनाने के लिए 15 हाउस सर्जनों की तैनाती की गई है।
आयुष्मान मरीजों के इलाज पर विशेष ध्यान
PGIMS रोहतक में हर दिन हरियाणा के अलग-अलग जिलों के अलावा पड़ोसी राज्यों से भी बड़ी संख्या में मरीज इलाज के लिए पहुंचते हैं। संस्थान के एक अधिकारी के अनुसार, रोजाना 8,000 से अधिक मरीज OPD और ट्रॉमा सेंटर में चिकित्सा सेवाएं लेने आते हैं। इनमें बड़ी संख्या ऐसे मरीजों की है जो आयुष्मान भारत योजना के लाभार्थी हैं और जिन्हें सर्जरी, विशेष उपचार या अन्य जरूरी चिकित्सा सेवाओं की आवश्यकता होती है।
संस्थान का उद्देश्य अब यह सुनिश्चित करना है कि आयुष्मान योजना के पात्र मरीजों के पंजीकरण और इलाज से जुड़े काम में अनावश्यक देरी न हो और उन्हें समय पर जरूरी स्वास्थ्य सेवाएं मिल सकें।
मेडिकल सुपरिंटेंडेंट कार्यालय में बना आयुष्मान सेल
PGIMS प्रशासन की ओर से गठित नए आयुष्मान सेल में मेडिकल सुपरिंटेंडेंट कार्यालय से जुड़े अधिकारी और कर्मचारी शामिल होंगे। इसमें डिप्टी मेडिकल सुपरिंटेंडेंट, PMJAY-AB, संबंधित विभाग का नोडल अधिकारी, दो क्लर्क/डेटा एंट्री ऑपरेटर या सहायक तथा खरीद और अकाउंट्स सेक्शन से एक-एक प्रतिनिधि शामिल होंगे।
इस सेल का मुख्य काम आयुष्मान लाभार्थियों के पंजीकरण को समय पर पूरा कराना और मरीजों के इलाज के लिए जरूरी इम्प्लांट तथा अन्य मेडिकल सामान की खरीद से जुड़े काम को व्यवस्थित करना होगा।
15 हाउस सर्जनों की अलग-अलग विभागों में तैनाती
आयुष्मान योजना से संबंधित कार्यों को बेहतर तरीके से संचालित करने के लिए PGIMS प्रशासन ने 15 हाउस सर्जनों को अलग-अलग विभागों में तैनात किया है। यह तैनाती प्रशासनिक आधार पर तत्काल प्रभाव से और अगले आदेश तक की गई है।
इन हाउस सर्जनों को मेडिसिन, जनरल सर्जरी, ऑर्थोपेडिक्स, ऑब्स्टेट्रिक्स एवं गायनेकोलॉजी, पीडियाट्रिक्स, ENT, कार्डियोलॉजी, कार्डियक सर्जरी, न्यूरोलॉजी, न्यूरोसर्जरी, यूरोलॉजी, नेफ्रोलॉजी और कई अन्य विभागों से जुड़े आयुष्मान कार्यों की जिम्मेदारी दी गई है।
रजिस्ट्रेशन और जरूरी सामान की व्यवस्था पर जोर
प्रशासन के आदेश के मुताबिक, आयुष्मान सेल और तैनात किए गए हाउस सर्जनों की मदद से लाभार्थियों के रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया को तेज करने का प्रयास किया जाएगा। इसके अलावा इलाज के दौरान आवश्यक इम्प्लांट और अन्य उपभोग्य चिकित्सा सामग्री समय पर उपलब्ध कराने पर भी ध्यान दिया जाएगा।
इस व्यवस्था का उद्देश्य यह है कि किसी आयुष्मान लाभार्थी का इलाज केवल प्रशासनिक या खरीद प्रक्रिया में देरी के कारण प्रभावित न हो।
विभागाध्यक्षों को भी जिम्मेदारी
PGIMS के अलग-अलग विभागों के प्रमुखों को हाउस सर्जनों के लिए ड्यूटी रोस्टर तैयार करने को कहा गया है। यह रोस्टर संबंधित विभागों की जरूरत को ध्यान में रखते हुए तैयार किया जाएगा, ताकि आयुष्मान योजना से जुड़े काम के लिए उपलब्ध कर्मचारियों का सही इस्तेमाल हो सके।
यदि किसी हाउस सर्जन को एक से अधिक विभागों की जिम्मेदारी दी गई है तो उसे संबंधित विभागों के साथ समन्वय करते हुए आयुष्मान योजना से जुड़े काम को संभालना होगा।
पात्र मरीजों को मिलेगा कैशलेस इलाज का लाभ
आयुष्मान भारत योजना के तहत पात्र लाभार्थियों को सालाना 5 लाख रुपये तक का कैशलेस स्वास्थ्य कवर उपलब्ध कराया जाता है। ऐसे में बड़े सरकारी चिकित्सा संस्थानों की भूमिका महत्वपूर्ण हो जाती है, जहां गंभीर बीमारियों और जटिल प्रक्रियाओं के लिए मरीज पहुंचते हैं।
PGIMS में नई व्यवस्था लागू होने से पात्र मरीजों के रजिस्ट्रेशन, इलाज और जरूरी चिकित्सा सामग्री की उपलब्धता से जुड़ी प्रक्रिया को अधिक व्यवस्थित करने का प्रयास किया जा रहा है।
मरीजों के लिए प्रक्रिया आसान बनाने की कोशिश
PGIMS प्रशासन द्वारा उठाए गए कदमों का मुख्य उद्देश्य आयुष्मान लाभार्थियों को समय पर इलाज उपलब्ध कराना और योजना से संबंधित प्रशासनिक प्रक्रिया को बेहतर बनाना है। डेडिकेटेड सेल और अलग-अलग विभागों में कर्मचारियों की तैनाती से मरीजों के मामलों की निगरानी और समन्वय में मदद मिलने की उम्मीद है।
