17 सितंबर, 2026 : हरियाणा के राज्यपाल और चांसलर ने दीनबंधु छोटू राम यूनिवर्सिटी ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी (DCRUST), मुरथल की कार्यकारी परिषद यानी Executive Council (EC) में किए गए नामांकनों को रद्द कर दिया है। यह फैसला विश्वविद्यालय की कार्यकारी परिषद के गठन को लेकर उठाई गई आपत्तियों और विश्वविद्यालय अधिनियम व नियमों के कथित उल्लंघन के बाद लिया गया है। राज्यपाल ने विश्वविद्यालय को निर्देश दिया है कि EC के लिए पात्र सदस्यों का नामांकन निर्धारित रोटेशन और वरिष्ठता के सिद्धांतों के अनुसार किया जाए।
2025 में किए गए थे पांच नामांकन
DCRUST प्रशासन ने 27 फरवरी 2025 को कार्यकारी परिषद में पांच प्रोफेसरों को नामित किया था। इनमें आर्किटेक्चर, अर्बन एंड टाउन प्लानिंग, मैनेजमेंट स्टडीज और एजुकेशन फैकल्टी के डीन के अलावा इलेक्ट्रॉनिक्स एंड कम्युनिकेशन विभाग के प्रोफेसर मनोज कुमार दुहन और केमिस्ट्री विभाग के प्रोफेसर अशोक कुमार शर्मा शामिल थे।
इसके बाद दीनबंधु छोटू राम यूनिवर्सिटी टीचर्स एसोसिएशन ने इन नामांकनों को लेकर आपत्ति जताई। एसोसिएशन का आरोप था कि कार्यकारी परिषद का गठन विश्वविद्यालय अधिनियम और उससे जुड़े नियमों के अनुरूप नहीं किया गया।
रोटेशन सिस्टम को लेकर उठे सवाल
शिक्षक संघ के अनुसार, विश्वविद्यालय अधिनियम में कार्यकारी परिषद के लिए तीन डीन का नामांकन वाइस चांसलर द्वारा निर्धारित प्रक्रिया और रोटेशन के आधार पर किए जाने का प्रावधान है। इसके अलावा दो ऐसे प्रोफेसरों को नामित किया जाना होता है जो डीन न हों और जिनका चयन वरिष्ठता के आधार पर रोटेशन से किया जाए।
एसोसिएशन ने आरोप लगाया कि विश्वविद्यालय ने आर्किटेक्चर, अर्बन एंड टाउन प्लानिंग, मैनेजमेंट स्टडीज और एजुकेशन के डीन को दोबारा नामित कर दिया, जबकि रोटेशन के अनुसार इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी, इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी एंड कंप्यूटर साइंस और ह्यूमैनिटीज एंड सोशल साइंसेज के डीन की बारी थी।
तीन प्रोफेसरों ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया
EC के सदस्यों के नामांकन को लेकर तीन विश्वविद्यालय प्रोफेसरों ने पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट का रुख किया। उन्होंने विश्वविद्यालय अधिनियम और नियमों के कथित उल्लंघन का मुद्दा उठाया।
हाईकोर्ट के निर्देश के बाद हरियाणा के राज्यपाल ने 7 अगस्त को संबंधित पक्षों की व्यक्तिगत सुनवाई की। इसके बाद राज्यपाल की ओर से मंगलवार को वाइस चांसलर को आदेश जारी किया गया, जिसमें 27 फरवरी 2025 के नामांकनों को अलग रखते हुए निर्धारित नियमों के अनुसार नए नामांकन करने का निर्देश दिया गया।
राज्यपाल ने दिए नए नामांकन के निर्देश
राज्यपाल ने विश्वविद्यालय प्रशासन को स्पष्ट रूप से कहा है कि कार्यकारी परिषद में सदस्यों का चयन पात्रता के साथ-साथ निर्धारित रोटेशन और वरिष्ठता के सिद्धांतों के अनुसार किया जाए। इसका मतलब है कि आगे होने वाले नामांकन में संबंधित पदों और विभागों की बारी तथा प्रोफेसरों की वरिष्ठता को नियमों के अनुसार ध्यान में रखना होगा।
यह आदेश विश्वविद्यालय की प्रशासनिक व्यवस्था में Executive Council के गठन को लेकर चल रहे विवाद को लेकर महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
विश्वविद्यालय प्रशासन से जवाब नहीं मिला
मामले को लेकर DCRUST के वाइस चांसलर प्रो. एसपी सिंह से प्रतिक्रिया लेने के लिए कई बार संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन उनकी ओर से कोई जवाब नहीं मिला। इसलिए विश्वविद्यालय प्रशासन का इस फैसले और शिक्षक संघ की आपत्तियों पर पक्ष सामने नहीं आया है।
पहले भी रोटेशन व्यवस्था को लेकर उठते रहे हैं सवाल
DCRUST में डीन और अन्य प्रशासनिक पदों पर नियुक्तियों को लेकर रोटेशन व्यवस्था का मुद्दा पहले भी सामने आ चुका है। मई 2026 में विश्वविद्यालय के शिक्षक संघ ने Faculty of Engineering and Technology के अगले डीन की नियुक्ति में भी DCRUST Act, 2006 में निर्धारित रोटेशन प्रणाली का पालन सुनिश्चित करने के लिए राज्यपाल-कम-चांसलर से हस्तक्षेप की मांग की थी।
ऐसे में कार्यकारी परिषद के नामांकन पर राज्यपाल का ताजा आदेश विश्वविद्यालय में वैधानिक प्रक्रिया और निर्धारित नियमों के पालन को लेकर महत्वपूर्ण है।
आगे क्या होगा?
अब विश्वविद्यालय प्रशासन को कार्यकारी परिषद के उन सदस्यों के नामांकन की प्रक्रिया दोबारा आगे बढ़ानी होगी, जो अधिनियम और निर्धारित नियमों के तहत पात्र हों। नए नामांकन में रोटेशन और वरिष्ठता के सिद्धांतों का पालन करना होगा।
