15 सितंबर, 2026 राजस्थान के निकाय चुनाव परिणाम सामने आने के बाद बहुजन समाज पार्टी (BSP) प्रमुख मायावती ने चुनाव प्रक्रिया को लेकर सवाल खड़े किए हैं। मायावती ने दावा किया कि कई सीटों पर सरकारी मशीनरी की गड़बड़ी के कारण बसपा उम्मीदवारों को दोबारा मतगणना में मामूली अंतर से हराया गया। उन्होंने कहा कि अगर ऐसी गड़बड़ी नहीं होती तो राजस्थान में बसपा का प्रदर्शन और बेहतर हो सकता था।
BSP ने जीतीं 19 सीटें
मायावती ने कहा कि राजस्थान के निकाय चुनाव में बसपा ने 19 सीटों पर अपने पार्षद जिताए हैं। उन्होंने पार्टी के पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं को इस प्रदर्शन के लिए बधाई दी।
राजस्थान के 309 शहरी स्थानीय निकायों में कुल 10,244 वार्डों के परिणामों में BSP ने 19 वार्ड जीते। वहीं भाजपा ने 4,179 और कांग्रेस ने 3,613 वार्डों में जीत दर्ज की, जबकि निर्दलीय उम्मीदवारों ने 2,273 वार्ड जीते।
मायावती ने मतगणना में गड़बड़ी का लगाया आरोप
मायावती ने अपने बयान में आरोप लगाया कि कई बसपा उम्मीदवारों को दोबारा गिनती के दौरान थोड़े-थोड़े वोटों के अंतर से हराया गया। उनका कहना है कि सरकारी मशीनरी की कथित गड़बड़ी के कारण पार्टी को अपेक्षित परिणाम नहीं मिल सके।
उन्होंने कहा कि अगर मतगणना के दौरान ऐसी स्थिति नहीं बनती तो बसपा का राजस्थान में प्रदर्शन और मजबूत हो सकता था। हालांकि, मायावती द्वारा लगाए गए इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
चुनाव नतीजों पर मायावती ने जताई नाराजगी
बसपा प्रमुख ने राजस्थान के नतीजों पर संतोष जताने के साथ-साथ चुनाव प्रक्रिया को लेकर नाराजगी भी जाहिर की। उन्होंने पार्टी कार्यकर्ताओं को संदेश दिया कि कम सीटें मिलने के बावजूद संगठन ने अपनी मौजूदगी दर्ज कराई है।
मायावती ने उम्मीद जताई कि आने वाले विधानसभा और लोकसभा चुनावों में पार्टी इससे बेहतर प्रदर्शन कर सकती है। उन्होंने कार्यकर्ताओं से संगठन को मजबूत करने और जनता के बीच अपनी पहुंच बढ़ाने की दिशा में काम करने की अपील की।
भाजपा और कांग्रेस के बीच कड़ा मुकाबला
राजस्थान के शहरी निकाय चुनाव में भाजपा ने कांग्रेस से अधिक वार्डों में जीत दर्ज की। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक भाजपा को करीब 35.18 प्रतिशत वोट मिले, जबकि कांग्रेस का वोट शेयर 34.24 प्रतिशत रहा। दोनों प्रमुख दलों के बीच वोट शेयर का अंतर करीब 0.94 प्रतिशत रहा।
भाजपा ने राज्य के 10 नगर निगमों में से चार में स्पष्ट बहुमत हासिल किया। जयपुर, उदयपुर, कोटा और भीलवाड़ा में भाजपा को बहुमत मिला, जबकि बीकानेर नगर निगम में कांग्रेस ने बढ़त बनाई।
छोटे दलों और निर्दलीयों का भी प्रदर्शन
इन चुनावों में सिर्फ भाजपा और कांग्रेस ही चर्चा में नहीं रहे। निर्दलीय उम्मीदवारों ने भी बड़ी संख्या में जीत दर्ज की और कई स्थानीय निकायों में उनकी भूमिका महत्वपूर्ण हो गई है।
इसके अलावा राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी (RLP), आम आदमी पार्टी (AAP), कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (मार्क्सवादी) और भारत आदिवासी पार्टी जैसे दलों ने भी अलग-अलग वार्डों में जीत हासिल की। BSP के 19 वार्डों में जीत दर्ज करने से पार्टी ने भी अपनी राजनीतिक मौजूदगी बनाए रखी।
चुनावी प्रक्रिया पर उठे सवाल
राजस्थान निकाय चुनाव के दौरान कुछ स्थानों पर मतगणना और इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों से जुड़ी तकनीकी समस्याओं की भी खबरें सामने आईं। कुछ वार्डों में परिणामों की घोषणा में देरी हुई और कुछ स्थानों पर दोबारा मतदान कराया जाना है।
हालांकि, इन घटनाओं और मायावती द्वारा लगाए गए सरकारी मशीनरी की गड़बड़ी के आरोपों के बीच सीधा संबंध स्थापित नहीं किया गया है। इसलिए उनके आरोपों को फिलहाल राजनीतिक आरोप के रूप में ही देखा जा रहा है।
आगे विधानसभा चुनाव पर नजर
राजस्थान के निकाय चुनावों के नतीजे आगामी राजनीतिक रणनीति के लिहाज से भी महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं। भाजपा और कांग्रेस के बीच करीबी वोट शेयर के साथ ही निर्दलीयों और छोटे दलों के प्रदर्शन ने राज्य की स्थानीय राजनीति में कई समीकरण बनाए हैं।
मायावती ने भी आने वाले विधानसभा और लोकसभा चुनावों में बेहतर परिणाम की उम्मीद जताई है। BSP अब राजस्थान में अपने संगठन और जनाधार को मजबूत करने पर जोर दे सकती है।
