10 सितंबर 2026: दिल्ली विश्वविद्यालय की छात्रा और एक्टिविस्ट आकृति चौधरी की राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) के तहत हिरासत रद्द करने के इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले को उत्तर प्रदेश सरकार सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देगी। यूपी सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने बुधवार को सुप्रीम कोर्ट में बताया कि हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ अपील दाखिल की जाएगी।
यह मामला नोएडा में अप्रैल 2026 में हुए श्रमिकों के प्रदर्शन से जुड़ा है। आकृति चौधरी को इस मामले में गिरफ्तार किया गया था और बाद में उनके खिलाफ NSA के तहत हिरासत का आदेश जारी किया गया था। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 2 सितंबर को इस हिरासत को रद्द कर दिया था।
हाईकोर्ट ने NSA हिरासत को किया था रद्द
इलाहाबाद हाईकोर्ट की जस्टिस अतुल श्रीधरन और जस्टिस अचल सचदेव की खंडपीठ ने आकृति चौधरी की हिरासत को रद्द करते हुए इसे मनमाना और अस्पष्ट बताया था। अदालत ने माना कि NSA जैसी कड़ी कानूनी व्यवस्था लागू करने के लिए जिस सामग्री और प्रक्रिया की जरूरत होती है, उसमें गंभीर कमियां थीं।
हाईकोर्ट ने आकृति चौधरी को 5 लाख रुपये मुआवजा देने का भी निर्देश दिया था। अदालत ने कहा था कि यह राशि गौतम बुद्ध नगर की जिलाधिकारी मेधा रूपम और हिरासत की प्रक्रिया में जिम्मेदार पाए गए अन्य अधिकारियों के वेतन से वसूल की जाए।
अधिकारियों की भूमिका पर भी कोर्ट ने जताई नाराजगी
हाईकोर्ट ने अपने फैसले में प्रशासनिक अधिकारियों और पुलिस की भूमिका को लेकर भी कड़ी टिप्पणियां की थीं। अदालत ने कहा था कि अधिकारियों को संविधान और कानून के तहत नागरिकों के अधिकारों, सम्मान और स्वतंत्रता की रक्षा की जिम्मेदारी दी गई है।
अदालत ने यह भी टिप्पणी की कि अधिकारियों की निष्ठा संविधान के प्रति होनी चाहिए, न कि राजनीतिक कार्यपालिका के प्रति। कोर्ट ने चेतावनी दी थी कि अगर प्रशासनिक शक्ति का गलत तरीके से इस्तेमाल जारी रहा तो उत्तर प्रदेश में स्थिति ‘Orwellian Dystopia’ जैसी हो सकती है।
अप्रैल में हुए नोएडा श्रमिक प्रदर्शन से जुड़ा मामला
आकृति चौधरी दिल्ली विश्वविद्यालय से पढ़ाई कर चुकी हैं और नोएडा में श्रमिकों के प्रदर्शन से जुड़े मामलों में गिरफ्तार की गई थीं। रिपोर्टों के मुताबिक, यह प्रदर्शन अप्रैल 2026 में मजदूरों की मांगों को लेकर हुआ था।
इसके बाद यूपी पुलिस ने आकृति चौधरी और एक्टिविस्ट-जर्नलिस्ट सत्य वर्मा समेत कुछ लोगों के खिलाफ मामलों में NSA लागू किया था। आकृति को 13 मई को NSA के तहत हिरासत में लिया गया था।
हाईकोर्ट के आदेश के बाद भी जेल में रहने की स्थिति
हाईकोर्ट द्वारा NSA हिरासत रद्द किए जाने के बावजूद आकृति चौधरी की रिहाई तत्काल नहीं हुई थी। रिपोर्टों के अनुसार, उनके खिलाफ प्रदर्शन से जुड़े अन्य आपराधिक मामलों में जमानत नहीं मिलने के कारण वह न्यायिक हिरासत में बनी हुई थीं। यानी हाईकोर्ट के आदेश का असर विशेष रूप से NSA के तहत हिरासत पर था, जबकि अन्य मामलों की कानूनी प्रक्रिया अलग चल रही थी।
सुप्रीम कोर्ट में सरकार रखेगी अपना पक्ष
बुधवार को सुप्रीम कोर्ट में सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ के सामने स्पष्ट किया कि हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती दी जाएगी। पीठ में जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना भी शामिल थे।
इससे अब मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचने की दिशा में आगे बढ़ गया है। हाईकोर्ट के आदेश में NSA हिरासत की प्रक्रिया और अधिकारियों की भूमिका पर उठाए गए सवालों की समीक्षा अब शीर्ष अदालत में हो सकती है।
मामला नागरिक स्वतंत्रता और प्रशासनिक शक्ति से भी जुड़ा
आकृति चौधरी का मामला केवल एक छात्रा की हिरासत तक सीमित नहीं है, बल्कि यह NSA जैसे सख्त कानून के इस्तेमाल, प्रशासनिक शक्तियों और नागरिकों के मौलिक अधिकारों से जुड़े व्यापक सवाल भी उठाता है।
हाईकोर्ट ने अपने आदेश में अनुच्छेद 21 के तहत जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के अधिकार पर जोर दिया था। अब यूपी सरकार द्वारा फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दिए जाने के बाद इन कानूनी सवालों पर आगे की सुनवाई महत्वपूर्ण होगी।
