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यमुनानगर में नशामुक्ति केंद्र बना उम्मीद की किरण, 800 लोगों ने छोड़ी लत

10 सितंबर 2026:  हरियाणा के यमुनानगर में नशे की समस्या से जूझ रहे लोगों के लिए जिला सिविल अस्पताल स्थित Addiction Treatment Facility (ATF) Centre एक महत्वपूर्ण सहारा बनकर सामने आया है। यहां नशे की लत से जूझ रहे लोगों को मेडिकल ट्रीटमेंट के साथ काउंसलिंग और योग जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। अधिकारियों के अनुसार, केंद्र शुरू होने के बाद अब तक करीब 3,800 मरीज OPD में उपचार और काउंसलिंग के लिए पहुंच चुके हैं, जबकि इनमें से लगभग 800 लोगों ने नशे की लत छोड़ने में सफलता हासिल की है।

जून 2024 में शुरू हुआ था केंद्र

यमुनानगर के मुकंद लाल जिला सिविल अस्पताल में Addiction Treatment Facility Centre ने 12 जून 2024 से काम करना शुरू किया था। इसका उद्देश्य नशे पर निर्भर लोगों को मेडिकल निगरानी में व्यवस्थित उपचार उपलब्ध कराना है। केंद्र में मरीजों को इलाज के साथ उनकी मानसिक और सामाजिक स्थिति को ध्यान में रखते हुए काउंसलिंग भी दी जाती है।

अधिकारियों के मुताबिक, मरीजों को परिवार की सहमति के बाद केंद्र में भर्ती किया जाता है। उपचार के दौरान डॉक्टर और काउंसलर लगातार मरीजों से बातचीत करते हैं और उन्हें नशे से बाहर निकलने के लिए प्रेरित करते हैं।

20 बेड की सुविधा, फिर भी मरीजों की संख्या ज्यादा

ATF Centre में फिलहाल 20 बेड उपलब्ध हैं। हालांकि नशामुक्ति उपचार की जरूरत को देखते हुए कई बार मरीजों की संख्या उपलब्ध बेड से अधिक हो जाती है। अधिकारियों के अनुसार, कुछ समय पर केंद्र में 5 से 7 मरीजों की वेटिंग लिस्ट भी रहती है।

केंद्र के मेडिकल ऑफिसर-कम-नोडल ऑफिसर लेफ्टिनेंट कर्नल डॉ. नवीन शर्मा के अनुसार, रोजाना करीब 5 से 7 नए मरीज इलाज के लिए पहुंचते हैं। इसके अलावा केंद्र की कुल डी-एडिक्शन OPD में प्रतिदिन लगभग 35 से 40 मरीज आते हैं और नियमित दवाएं लेते हैं।

800 लोगों ने नशे की लत पर पाई काबू

केंद्र से सामने आए आंकड़े इसके काम की अहमियत को दिखाते हैं। जून 2024 में शुरुआत के बाद करीब 3,800 मरीज OPD में इलाज और काउंसलिंग के लिए पहुंचे। इनमें से लगभग 800 मरीजों ने नशे की लत से बाहर निकलने में सफलता हासिल की है।

हालांकि विशेषज्ञों के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह सुनिश्चित करना है कि इलाज पूरा करने के बाद मरीज दोबारा नशे की ओर न लौटें। इसी वजह से केंद्र में केवल दवाओं पर निर्भर रहने के बजाय काउंसलिंग और मानसिक सहयोग को भी उपचार का अहम हिस्सा बनाया गया है।

इलाज के साथ काउंसलिंग और योग

केंद्र में मरीजों को मेडिकल ट्रीटमेंट के साथ नियमित काउंसलिंग दी जाती है। काउंसलर मरीजों से उनकी परेशानियों, अनुभवों और नशे की आदत के पीछे के कारणों को समझने का प्रयास करते हैं।

इसके अलावा सुबह के समय योग और मेडिटेशन की गतिविधियां भी कराई जाती हैं। इसका उद्देश्य मरीजों में एकाग्रता, आत्मविश्वास और मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाने में मदद करना है। अधिकारियों के अनुसार, मेडिकल देखभाल और मनोवैज्ञानिक सहयोग का संयोजन मरीजों को नशे से बाहर निकलने में मदद कर सकता है।

कई तरह के नशे से जूझ रहे मरीजों का इलाज

केंद्र में अलग-अलग प्रकार के नशीले पदार्थों की लत से प्रभावित लोगों का उपचार किया जाता है। अधिकारियों के अनुसार, अत्यधिक शराब का सेवन करने वाले और स्मैक सहित अन्य नशीले पदार्थों के आदी मरीज भी यहां इलाज के लिए पहुंचते हैं।

मरीजों को उपचार के दौरान स्वस्थ दिनचर्या अपनाने और नशे से दूरी बनाए रखने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है। डॉक्टर और काउंसलर उनके साथ लगातार संपर्क में रहते हैं ताकि इलाज के दौरान आने वाली परेशानियों को समझा जा सके।

परिवार की भूमिका भी अहम

नशामुक्ति की प्रक्रिया में परिवार की भूमिका को भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इलाज पूरा होने के बाद मरीज जब अपने घर लौटता है, तब परिवार और आसपास का माहौल उसके दोबारा नशे की ओर जाने से रोकने में मदद कर सकता है।

अधिकारियों का कहना है कि नशे से छुटकारा केवल इलाज खत्म होने तक सीमित प्रक्रिया नहीं है। मरीज को लंबे समय तक नशे से दूर रहने के लिए परिवार, डॉक्टरों और सपोर्ट सिस्टम से जुड़े रहना जरूरी है।

समय पर मदद लेना जरूरी

डॉ. नवीन शर्मा ने परिवारों से अपील की कि अगर कोई व्यक्ति नशे की समस्या से जूझ रहा है तो उसे समस्या बढ़ने का इंतजार नहीं करना चाहिए। समय पर पेशेवर मदद लेने से उपचार और रिकवरी की संभावना बेहतर हो सकती है।

यमुनानगर का यह केंद्र ऐसे लोगों को मेडिकल निगरानी, काउंसलिंग और योग के माध्यम से नशे से बाहर निकलने का रास्ता देने का प्रयास कर रहा है। करीब 800 लोगों का नशे की लत से उबरना केंद्र की अब तक की महत्वपूर्ण उपलब्धियों में शामिल है।

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