10 सितंबर 2026: हरियाणा के अंबाला जिले में ग्रामीण विकास को गति देने के लिए जिला प्रशासन जल्द 100 दिवसीय ‘अंबाला ग्राम उदय अभियान’ शुरू करने जा रहा है। अभियान का उद्देश्य गांवों में चल रही विकास योजनाओं को तेजी से पूरा करना, सरकारी संसाधनों का बेहतर इस्तेमाल सुनिश्चित करना और ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों को दिखाई देने वाले बदलाव लाना है।
अंबाला के उपायुक्त सचिन गुप्ता ने विकास एवं पंचायत विभाग तथा पंचायती राज संस्थाओं के साथ समीक्षा बैठक में अभियान की रूपरेखा पर चर्चा की। प्रशासन का लक्ष्य जिले के प्रत्येक गांव को आधुनिक, स्वच्छ, हरा-भरा और बेहतर सुविधाओं से लैस मॉडल गांव के रूप में विकसित करना है।
हर गांव में दिखना चाहिए विकास का असर
उपायुक्त ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि केवल विकास कार्यों को मंजूरी देना पर्याप्त नहीं है, बल्कि हर स्वीकृत कार्य का अंतिम उद्देश्य लोगों को सुविधा उपलब्ध कराना होना चाहिए। उन्होंने कहा कि जो परिसंपत्तियां तैयार हो चुकी हैं, उनका उचित रखरखाव भी सुनिश्चित किया जाए।
प्रशासन का जोर ऐसे विकास कार्यों पर रहेगा जिनका सीधा असर ग्रामीणों के दैनिक जीवन में दिखाई दे। इसमें बेहतर सामुदायिक सुविधाएं, साफ-सफाई, पानी की बेहतर व्यवस्था, हरित क्षेत्र, खेल सुविधाएं, पुस्तकालय और पंचायत सेवाओं की आसान उपलब्धता शामिल हैं।
ग्राम पंचायतों को तय करने होंगे पांच प्रमुख लक्ष्य
अभियान के तहत प्रत्येक ग्राम पंचायत को पांच प्रमुख परिणामों की पहचान कर उन पर काम करना होगा। प्रशासन चाहता है कि अभियान के दौरान गांवों में ऐसे बदलाव किए जाएं जिन्हें ग्रामीण खुद देख और इस्तेमाल कर सकें।
गांवों में सामुदायिक भवनों को कार्यशील बनाना, पुस्तकालयों और जिम का बेहतर रखरखाव, गलियों और स्ट्रीट लाइट की व्यवस्था, सार्वजनिक स्थानों की सफाई और जल निकायों को बेहतर बनाना अभियान की प्राथमिकताओं में शामिल रहेगा।
इसके अलावा खेल सुविधाओं को मजबूत करने और पंचायत से जुड़ी सेवाओं को लोगों के लिए अधिक सुलभ बनाने पर भी ध्यान दिया जाएगा।
814 अधूरे विकास कार्य प्रशासन के लिए चुनौती
समीक्षा बैठक के दौरान जिले में अधूरे पड़े विकास कार्यों की स्थिति पर भी चिंता जताई गई। प्रशासन के अनुसार अंबाला जिले में इस समय 814 विकास कार्य अधूरे हैं। इनमें से 706 कार्य ऐसे हैं जिन पर शुरुआत से अब तक कोई खर्च दर्ज नहीं हुआ है।
अंबाला-I क्षेत्र में अधूरे कार्यों की संख्या सबसे अधिक बताई गई है। यहां कुल 531 कार्य अधूरे हैं, जिनमें 461 ऐसे हैं जिन पर अब तक कोई खर्च दर्ज नहीं हुआ है।
इन कार्यों को पूरा करने के लिए प्रशासन ने विशेष रूप से 30 दिन का अभियान चलाने का निर्देश दिया है। इसका उद्देश्य लंबे समय से लंबित विकास कार्यों की पहचान कर उन्हें जल्द से जल्द पूरा करना है।
कचरा और जलभराव की समस्याओं पर भी कार्रवाई
ग्राम उदय अभियान के दौरान गांवों की स्थानीय समस्याओं को भी प्राथमिकता दी जाएगी। उपायुक्त ने प्रत्येक ग्राम पंचायत को अपने क्षेत्र के तीन सबसे महत्वपूर्ण कचरा, ग्रे-वॉटर या जलभराव वाले स्थानों की पहचान करने के निर्देश दिए हैं।
इन स्थानों की समस्या को दूर करने के लिए पंचायत स्तर पर आवश्यक कदम उठाए जाएंगे। इसका उद्देश्य गांवों में स्वच्छता व्यवस्था सुधारने के साथ-साथ जल निकासी की समस्या को भी कम करना है।
प्रशासन चाहता है कि अभियान के दौरान केवल बड़े निर्माण कार्यों पर ध्यान न देकर उन छोटी समस्याओं का भी समाधान किया जाए जिनका ग्रामीणों के रोजमर्रा के जीवन पर सीधा प्रभाव पड़ता है।
स्वयं सहायता समूहों को मिलेगा बढ़ावा
ग्राम उदय अभियान में Self Help Groups (SHGs) को भी महत्वपूर्ण भूमिका दी जाएगी। प्रशासन ने स्वयं सहायता समूहों द्वारा तैयार किए जा रहे उत्पादों, उनसे जुड़ी महिलाओं की संख्या और उनकी आय की जानकारी मांगी है।
अंबाला जिले में SHG के गठन और संस्थागत विस्तार को लेकर प्रदर्शन बेहतर बताया गया है। प्रशासन के अनुसार जिले में 100 के लक्ष्य के मुकाबले 131 स्वयं सहायता समूह गठित किए जा चुके हैं।
अब प्रशासन का जोर इन समूहों को केवल गठन तक सीमित रखने के बजाय उन्हें उद्यम, तकनीक, बाजार से जोड़ने और स्थायी आय के अवसर उपलब्ध कराने पर रहेगा। इससे ग्रामीण महिलाओं के लिए रोजगार और स्वरोजगार के नए अवसर विकसित हो सकते हैं।
आधुनिक और आत्मनिर्भर गांव बनाने की तैयारी
100 दिवसीय ग्राम उदय अभियान के जरिए प्रशासन का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में सरकारी योजनाओं के बेहतर क्रियान्वयन के साथ-साथ गांवों में बुनियादी सुविधाओं को मजबूत करना है।
अभियान के तहत स्वच्छता, जल प्रबंधन, सड़क और प्रकाश व्यवस्था, सामुदायिक सुविधाओं, खेल एवं शिक्षा से जुड़ी सुविधाओं तथा पंचायत सेवाओं में सुधार पर ध्यान दिया जाएगा।
प्रशासन का मानना है कि जब विकास कार्य समय पर पूरे होंगे और तैयार परिसंपत्तियों का सही रखरखाव होगा, तब ग्रामीणों को योजनाओं का वास्तविक लाभ मिलेगा।
