10 सितंबर 2026: लेखक, कॉलमनिस्ट और ब्रांड रणनीतिकार सुहेल सेठ ने देश में शासन व्यवस्था, नागरिक जिम्मेदारी और शहरों की बदहाल बुनियादी सुविधाओं को लेकर गंभीर सवाल उठाए। अमृतसर में Phulkari-Women of Amritsar की ओर से आयोजित एक बातचीत के दौरान उन्होंने अपनी नई किताब ‘WTF India: Are We Losing the Plot?’ के माध्यम से देश की मौजूदा समस्याओं पर विस्तार से चर्चा की।
सुहेल सेठ ने कहा कि भारत ने अंतरिक्ष के क्षेत्र में बड़ी उपलब्धियां हासिल की हैं और चंद्रमा तक पहुंचने की क्षमता दिखाई है, लेकिन दूसरी तरफ देश के कई शहरों में सड़कों, सफाई, जल निकासी और बुनियादी नागरिक सुविधाओं की स्थिति अब भी चिंता का विषय है। उनके अनुसार, समस्या केवल सरकार की नहीं बल्कि नागरिकों की जिम्मेदारी और उनकी भागीदारी से भी जुड़ी हुई है।
शासन व्यवस्था में जवाबदेही की कमी पर सवाल
सेठ ने कहा कि देश में सबसे बड़ी समस्याओं में से एक जवाबदेही की कमी है। उनका मानना है कि सरकार और प्रशासन की कार्यप्रणाली में पारदर्शिता और जिम्मेदारी सुनिश्चित करना जरूरी है। साथ ही नागरिकों को भी केवल शिकायत करने के बजाय अपने आसपास की समस्याओं को लेकर सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए।
उनकी नई किताब में भी शासन व्यवस्था और नागरिक जिम्मेदारी के बीच इसी संबंध को प्रमुखता से उठाया गया है। किताब में भारत की विकास यात्रा और रोजमर्रा की नागरिक समस्याओं के बीच मौजूद विरोधाभासों पर सवाल किए गए हैं।
अमृतसर की सफाई व्यवस्था पर भी चिंता
अमृतसर में बातचीत के दौरान सेठ ने शहर की सफाई व्यवस्था पर भी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि अमृतसर धार्मिक और ऐतिहासिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण शहर है, लेकिन इसके बावजूद स्वर्ण मंदिर के आसपास के क्षेत्रों को साफ और कचरा मुक्त रखने में कमी दिखाई देती है।
उन्होंने कहा कि अमृतसर में काफी संभावनाएं हैं, लेकिन शासन व्यवस्था की कमियों और नागरिकों द्वारा अपने शहर के प्रति जिम्मेदारी नहीं लेने का असर शहर की स्थिति पर दिखाई देता है।
सड़क, जलभराव और शहरी सुविधाओं पर निशाना
सुहेल सेठ लंबे समय से देश के शहरों में जलभराव, खराब सड़कों और कमजोर शहरी बुनियादी ढांचे को लेकर सवाल उठाते रहे हैं। हाल के महीनों में उन्होंने गुरुग्राम में बारिश और जलभराव की स्थिति को भी शासन और नागरिक व्यवस्था की विफलता से जोड़कर देखा था।
उन्होंने सवाल उठाया था कि जब मानसून हर साल आता है और बारिश की संभावना पहले से पता होती है, तो शहरों को उससे निपटने के लिए पहले से तैयार क्यों नहीं किया जाता। उनके अनुसार, समस्या केवल बारिश नहीं बल्कि तैयारी और शासन व्यवस्था की है।
दिल्ली की घटना का भी किया जिक्र
अमृतसर में बातचीत के दौरान सेठ ने दिल्ली में हाल ही में हुए एक इमारत हादसे का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि कई बार किसी हादसे के बाद कुछ अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई कर देना पर्याप्त नहीं होता, बल्कि व्यवस्था में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए पहले से जवाबदेही तय होनी चाहिए।
उन्होंने शासन में केवल दिखावटी कार्रवाई के बजाय वास्तविक जवाबदेही और सुरक्षा व्यवस्था पर जोर दिया।
नागरिकों को भी निभानी होगी जिम्मेदारी
सुहेल सेठ ने कहा कि देश में बदलाव केवल सरकार के भरोसे नहीं हो सकता। नागरिकों को भी अपने शहरों और आसपास के इलाकों की समस्याओं को लेकर सक्रिय होना होगा।
उन्होंने नागरिक आंदोलनों, सामुदायिक पहलों और स्थानीय स्तर पर लोगों की भागीदारी को बढ़ावा देने की जरूरत बताई। उनका कहना है कि लोगों को अपने शहर की समस्याओं की जिम्मेदारी लेनी चाहिए और बच्चों तथा युवाओं को भी स्थानीय समुदायों के साथ जुड़ने के लिए प्रोत्साहित करना चाहिए।
किताब में समस्याओं के साथ समाधान पर भी जोर
‘WTF India: Are We Losing the Plot?’ में सेठ ने केवल समस्याओं की आलोचना करने के बजाय उनके समाधान की जरूरत पर भी जोर दिया है। उनका कहना है कि देश को शिकायत और नाराजगी से आगे बढ़कर समाधान आधारित सोच अपनानी होगी।
उनके अनुसार, नागरिकों को प्रशासन से बेहतर काम की मांग करनी चाहिए और जरूरत पड़ने पर स्थानीय स्तर पर सामुदायिक पहल शुरू करनी चाहिए। जवाबदेही को केवल किसी घटना के बाद की कार्रवाई तक सीमित रखने के बजाय इसे रोजमर्रा की व्यवस्था का हिस्सा बनाने की जरूरत है।
विकास और बुनियादी सुविधाओं के बीच संतुलन जरूरी
सेठ की टिप्पणी का एक प्रमुख मुद्दा यह रहा कि भारत एक ओर बड़े तकनीकी और अंतरिक्ष मिशनों में सफलता हासिल कर रहा है, जबकि दूसरी ओर शहरों में सड़क, सीवर, जल निकासी, कचरा प्रबंधन और अन्य बुनियादी सुविधाएं कई जगह अपेक्षित स्तर तक नहीं पहुंच पाई हैं।
उन्होंने इसी विरोधाभास को अपनी किताब के जरिए सामने रखा है। उनके मुताबिक किसी देश की प्रगति केवल बड़े प्रोजेक्ट और तकनीकी उपलब्धियों से नहीं बल्कि इस बात से भी तय होती है कि आम नागरिक को रोजमर्रा की जिंदगी में कितनी बेहतर सुविधाएं मिल रही हैं।
